Azolla. धान की खेती में रासायनिक खाद का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में किसान अजोला को जैव उर्वरक के रूप में अपनाकर खाद की जरूरत और खेती की लागत को कम कर सकते हैं.
क्या है अजोला ?
अजोला पानी में तैरने वाला एक छोटा जलीय पौधा है, जो आसानी से उगाया जा सकता है. यह पानी की सतह पर तैयार होता है. इसमें मौजूद सूक्ष्मजीव वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप में बदलने में मदद करते हैं. इसलिए इसे धान के लिए उपयोगी जैव उर्वरक माना जाता है.
अजोला कैसे करें तैयार ?
अजोला का उत्पादन किसान कई तरीकों से कर सकते हैं.
# इसके लिए टब के आकार की क्यारी या छोटा तालाब बनाया जा सकता है.
# इसके अलावा सीमेंट की टंकी या पॉलीथीन से ढके गड्ढे में भी अजोला उगाया जा सकता है.
# छोटे स्तर पर मिट्टी या सीमेंट के गमले में भी इसका उत्पादन किया जा सकता है.
अजोला तैयार करने के लिए जगह को समतल करके करीब 1 मीटर चौड़ी क्यारी बनाई जाती है. क्यारी के चारों तरफ मेड़ बनाकर उसमें पानी भरा जाता है. इसके बाद गोबर और जरूरी पोषक तत्व डालकर ताजा अजोला का बीज यानी अजोला कल्चर डाल दिया जाता है.
उचित देखभाल करने पर करीब 10-15 दिन में अजोला तैयार हो जाता है और इसकी नियमित कटाई की जा सकती है.
अजोला से क्या फायदे हैं ?
# अजोला खेत में डालने से मिट्टी को नाइट्रोजन मिलती है.
# पौधों को कई पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं.
# इससे जिंक, मैंगनीज, लोहा, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है.
# अजोला में कुछ विटामिन और पौधों की वृद्धि में सहायक पदार्थ भी पाए जाते हैं.
# अजोला के इस्तेमाल से मिट्टी की भौतिक दशा और उर्वरता सुधारने में मदद मिलती है.
# इससे रासायनिक खाद की उपयोग क्षमता बेहतर हो सकती है और खरपतवार नियंत्रण में भी सहायता मिलती है.
# सबसे खास बात यह है कि किसान इसे कम लागत में अपने खेत पर ही तैयार कर सकते हैं.
धान की खेती में ऐसे करें इस्तेमाल:
अजोला का इस्तेमाल धान की खेती में मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जा सकता है.
1. हरी खाद के रूप में:
अजोला को अलग जगह पर तैयार करके धान की रोपाई से पहले खेत में मिला दिया जाता है. इसे खेत में पलटकर मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है. इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और धान की फसल को पोषण मिलता है.
2. धान की खड़ी फसल में:
धान की रोपाई के करीब 2-3 दिन बाद खेत में अजोला का कल्चर डाला जा सकता है. खेत में पानी की उचित मात्रा बनाए रखना जरूरी है. अनुकूल परिस्थितियों में अजोला तेजी से बढ़ता है और खेत की सतह पर फैल जाता है. जरूरत के अनुसार इसमें सुपर फॉस्फेट जैसे पोषक तत्व भी दिए जा सकते हैं.
किसान के लिए क्यों फायदेमंद?
अजोला तैयार करने में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता. इसे खेत के पास ही तैयार किया जा सकता है और बार-बार इस्तेमाल के लिए इसका उत्पादन किया जा सकता है. इससे नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है, मिट्टी की सेहत सुधरती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम की जा सकती है.
इसलिए धान की खेती करने वाले किसान अजोला को अपनी खेती में जैव उर्वरक के रूप में शामिल कर कम लागत में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. Azolla





