Sugarcane Farming: बिहार के किसानों ने गन्ने की खेती में बढ़ती लागत और समय पर तकनीकी जानकारी नहीं मिलने के कारण गन्ने की खेती से दूरी बना ली थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार गन्ने की खेती को कहीं अधिक लाभकारी बनाने के लिए खास योजना पर काम कर रही है, इसलिए अब गन्ना की खेती आने वाले समय में बिहार के किसानों के दिन बदलने वाली है. जानिए, क्याक्या बदलाव होने जा रहा है?

बढ़ेगा गन्ने का रकबा, चलेंगी मिलें, होगा मुनाफा

बिहार राज्य में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए अब गांव और पंचायत स्तर पर विशेष अभियान शुरू करने जा रही है. इस अभियान के तहत पंचायतों में किसान कार्यशालाएं आयोजित कर किसानों को गन्ने की आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी खेती के लिए जागरूक किया जाएगा.

इसके अलावा किसानों को सरकारी अनुदान, बीज उपलब्धता और विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी.

बढ़ेगा गन्ने का रकबा, किसानों की होगी आय

गन्ना उद्योग विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना का मकसद राज्य में गन्ने का रकबा और उत्पादन बढ़ाना है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके और चीनी व गुड़ उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल भी मिल सके जिससे वह भी सुचारू रूप से चल सकें.

अन्य फसलों की तुलन में गन्ना फसल देती है अधिक लाभ

सरकार का मानना है कि गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में गन्ने की खेती किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती है. इस अभियान में कृषि, सहकारिता, लघु जल संसाधन, जल संसाधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पंचायती राज तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे और किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे. जिन क्षेत्रों में चीनी मिलें संचालित नहीं हैं, वहां किसानों को गुड़ उत्पादन और गन्ना बीज तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

45,000 गांवों तक पहुंचेगी उन्नत खेती की जानकारी

सरकार का लक्ष्य राज्य की तकरीबन 8,000 पंचायतों और 45,000 गांवों तक पहुंच बनाना है. पहले चरण में उन पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां पहले से गन्ने की खेती होती रही है या जहां गन्ने की खेती होने की संभावनाएं अधिक हैं. इस दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद, कीट नियंत्रण और कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी.

नकदी फसल है गन्ना

पिछले दिनों बिहार के किसानों ने बढ़ती लागत और समय पर तकनीकी जानकारी नहीं मिलने के कारण गन्ने की खेती से दूरी बना ली थी, इसलिए अब किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि नकदी फसल के रूप में गन्ना किस तरह पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक मुनाफा दे सकती है. किसानों से कृषि एक्सपर्ट्स की सीधे बात होने पर किसानों का भरोसा बढ़ेगा और वह फिर से गन्ने की खेत की ओर अग्रसर हो सकेंगे.

सरकार को अपनी इस पहल से उम्मीद है कि बिहार राज्य में गन्ना उत्पादन बढ़ेगा, किसानों का भरोसा बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नई चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकेगा तो चीनी मिलें भी निर्बाध रूप से चल सकेंगी.

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