Integrated Nutrients : फसलों की पैदावार लगातार बढ़ रही है, लेकिन रासायनिक खादों के कम व ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल से मिट्टी की दशा बराबर बिगड़ती जा रही है. ऐसे में अब खाद की मात्रा ज्यादा बढ़ाने पर भी पैदावार बढ़ नहीं पा रही है, जबकि मिट्टी, पानी व हवा में गंदगी बढ़ रही है, जिस का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है और हर दिन तरहतरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं.
हमारे बुजुर्ग खेती में गोबर की खाद व कंपोस्ट खाद का ज्यादा इस्तेमाल करते थे. 1960-70 के दशक से पहले हमारे देश में जैविक खेती होती थी. लेकिन आजकल खेत में मशीनों के इस्तेमाल से लोगों ने पशुओं को पालना कम कर दिया है, जिस की वजह से लोग अपने खेतों में कार्बनिक खाद का इस्तेमाल कम कर रहे हैं. इस से मिट्टी में पोषक तत्त्वों की कमी हो रही है और पौधों में तरहतरह की कमियां दिखाई दे रही हैं.
एकीकृत पोषक तत्त्व (Integrated Nutrients)
नीबू वर्गीय फसलों की बढ़वार व विकास के लिए 17 पोषक तत्त्वों की आवश्यकता होती है, जिन में मुख्य तत्त्व नाइट्रोजन, फास्फोरस,पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, कापर, मैग्नीज, आयरन, बोरान व मोलिब्डिनम वगैरह हैं.
एकीकृत पोषक तत्त्व (Integrated Nutrients) इंतजाम का सिद्धांत
एक तत्त्व दूसरे का स्थान नहीं ले सकता. लिहाजा हर तत्त्व अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है.
नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि, प्रोटीन और पर्णहरित (क्लोरोफिल) के निर्माण में खासतौर से मददगार होता है,
वहीं फास्फोरस जड़ों की बढ़वार से जुड़ा है, क्योंकि जड़ों की अच्छी तरह बढ़वार होने पर पौधों को पानी व पोषक तत्त्वों की आपूर्ति अच्छी तरह बनी रहती है.
पोटाश की सही मात्रा से पौधा मजबूत रहता है, जिस से उस में बीमारियों से लड़ने की कूवत बढ़ती है. इस के साथ ही ठंड व सूखे जैसे हालात को सहने की ताकत भी बढ़ती है. पोटाश के सही मात्रा में इस्तेमाल से नीबू वर्गीय फसलों की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है.
बोरोन के इस्तेमाल से नीबू वर्गीय फसलों की पैदावार अच्छी होती है.
क्लोरीन पौधों की ऊर्जा बढ़ाती है.
तांबा यानी कापर पौधों में हरियाली यानी खाना बनाने में सहायक है और पौधों में होने वाली अनेक क्रियाओं को बढ़ावा देता है.
लोहा यानी आयरन पौधों की पत्तियों की हरियाली में सहायक होता है और सांस क्रियाओं से संबंधित एंजाइम बनाने में मदद करता है.
मैगनीज भी पौधों में होने वाली एंजाइम क्रियाओं में एक अंश के रूप में काम करता है और पत्तियों की हरियाली बढ़ाने में मदद करता है.
कैल्शियम से बीजों के अंकुरण और फसल पकने में तेजी आती है.
मालीब्डेनम दलहनी फसलों की जड़गं्रथियों में राइजोबियम जीवाणु द्वारा सहजीवी नाइट्रोजन की प्रक्रिया में मदद करता है.
जस्ते से नीबू वर्गीय फसलों की पैदावार अच्छी होती है.





