गरमी का मौसम किसान और खेती के लिए बड़ी मुसीबतों वाला होता है. तपती धूप और चलती लू में फसल और पशुओं के साथसाथ किसान को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है. इन दिनों पानी की कमी होने लगती है, जबकि गरमी में खेती में अधिक पानी की भी जरूरत होती है. कीट व रोगों से भी फसल का बचाव जरूरी है, इसलिए कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें.

गरमी की फसलों में जरूरत के मुताबिक सिंचाई करते रहें. शाम के समय सिंचाई करने से जल का भाप बन कर उड़ना कम होता है. इस से पानी की बचत होगी.

मेंड़ों पर बोई गई फसल में एकांतर सिंचाई करें.

समयसमय पर फसल की निराईगुड़ाई करते रहें. इस से फसल की जोड़ में हवा का संचरण होगा. साथ ही, खरपतवार भी खत्म होगा.

जायद में बोई गई मूंग व उड़द को ध्यान से देखते रहिए, ताकि पीला चित्त पर्ण रोग की रोकथाम आसानी से हो सके.

कीट का प्रकोप होने पर उचित रसायनों का सावधानी से इस्तेमाल करें और गन्ने में शाकनाशी का प्रयोग उचित नमी पर करें.

गन्ने में बेधक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफास 40 ईसी का 2 लिटर प्रति एकड़ की दर से 600 लिटर पानी मे घोल बना कर पंक्ति में छिड़काव करें.

मूंगफली में सिंचाई आवश्यकतानुसार करें, क्योंकि इस समय खूंटी बनने लगती है और डेढ़ किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बोरैक्स का छिड़काव करने से दाना अच्छा बनता है.

ये सभी काम करते समय मुंह को ढक कर रखें और सामाजिक दूरी का पालन करें.

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