Torai . पारंपरिक अनाज की खेती के मुकाबले सब्जी की खेती कहीं अधिक मुनाफा देती है. लेकिन यही मुनाफा समय से पहले मिलने लगे तो फिर बात ही अलग है. जी हां, यह हम यहां बात करने जा रहे हैं ऐसी ही खेती की जो सिर्फ 45 दिनों में तैयार हो कर किसान की आमदनी शुरू करती है. आइए जानते हैं उस सब्जी तोरई की खेती के बारे मैं कुछ खास बातें :

45 दिन में तैयार होती तोरई

उत्तर प्रदेश में आजकल तोरई की अच्छीखासी मांग है. तोरई की खेती से महज 45 दिन में उपज मिलने लगाती है और कम समय कम लागत में किसानों की आमदनी बढ़ाने का काम कर रही है. यही वजह है कि अब किसान कम समय में ज्यादा फायदा देने वाली फसलों की तरफ बढ़ रहे हैं.
जिस तोरई की खेती की बात हम यहां कर रहे हैं, वह कम समय में बंपर पैदावार देती है.

खास बात यह है कि 45 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हने वाली कोई अलग से वैराइटी नहीं है बल्कि आगरा की गरमी और यमुना बैल्ट की मिट्टी में यह जल्दी तैयार होती है. यहां के किसान इस को ‘डेढ़ महीने वाली तोरई’ भी बोलते हैं.

आगरा में चलने वाली 45 दिन वाली टॉप वैराइटी

-पूसा नसदार- IARI, पूसा. 45-48 दिन. गर्मी में सहनशील है, फल में रेशे कम.
-अर्का सुजाता-IIHR बैंगलोर. 45-50 दिन. वायरस/पीला रोग कम लगता है. बारिश में भी खराब नहीं होती.

-संतोष-35 F1-हाईब्रिड-प्राइवेट. 42-45 दिन. फल एकदम सीधा, चमकदार.

इन कुछ प्रजातियों के अलावा आगरा के किसान तोरई का बीज खुद तैयार कर लेते हैं, जो 45-50 दिन में पैदावार देने लगती है.

45 दिन में उपज लेने के लिए जरूरी टिप्स

-मचान तकनीक से तोरई की खेती करें, जिससे मचान पर फल लटकने से फल जल्दी बढ़ता है. ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करें. इस सिंचाई योजना को लगाने में 55 फीसदी तक सब्सिडी भी मिलती है.

-नर्सरी तकनीक का करें इस्तेमाल. इसमें लगभग 10 दिन का समय बचता है.

इसकी खेती है आसान

तोरई की बोआई के लिए खेत को अच्छी तरह जोतकर गोबर की खाद मिला ली जाती है, जिससे मिट्टी उपजाऊ हो जाए. इसके बाद सही दूरी पर इसके बीजों को लगाया जाता है या तैयार की गई पौध की रोपाई की जाती है.

खर्चा और कीट रोग कम, पैदावार में दम

महज 40 से 45 दिनों के भीतर इस तोरई के पौधों में फल आने शुरू हो जाते हैं, इसलिए इसमें कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों का खतरा भी पारंपरिक फसलों के मुकाबले बहुत कम रहता है. कम समय की फसल होने के कारण इसमें सिंचाई और खाद का खर्च भी आधा हो जाता है, जिससे किसानों के लिए मिलता है अधिक मुनाफा.

इन दिनों बाजार में तोरई बड़ी मात्रा में आ रही है और इसकी डिमांड भी ज्यादा है कि इसे आगरा के अलावा उसके आसपास के क्षेत्रों में फ्रेश और हरी तोरई देखते ही व्यापारी इसे हाथों-हाथ खरीद लेते हैं.

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