Paddy Varieties. धान की उन्नत किस्मों की जानकारी: पूसा बासमती, पूसा सुगंध, PRH-10, सरयू-52 समेत उपज, अवधि और क्षेत्रवार उपयुक्त किस्में.
पूसा बासमती-6 (1400): यह किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के लिए अनुमादित की गई है. सिंचित अवस्था में बोआई के बाद इस का उत्पादन 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिलता है.
यह मध्यम बौनी किस्म है जो पकने पर गिरती नहीं है. दानों की समानता व पकने के हिसाब से यह किस्म पूसा बासमती 1121 से बहुत अच्छी है. इस का दाना पकने पर एक समान रहता है. इस में बहुत अच्छी खुशबू आती है. इस के पकने की अवधि 150 से 155 दिन होती है.
उन्नत पूसा बासमती-1 (1460): यह किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए ही संस्तुत है. सिंचित अवस्था में उपज 55 से 60 क्विंटल मिलती है. यह किस्म जीवाणु पर्ण झुलसा प्रतिरोधक क्षमता को शामिल कर के एक्स-ए-13 व एक्स-ए-21 जीनों को परिमिडीकरण कर के और पूसा बासमती-1 के साथ गुण सुरक्षित रखते हुए विकसित की गई है. यह किस्म 135 से 140 दिन में पक कर तैयार होती है.
पूसा सुगंध-5 (2411): यह किस्म दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू के लिए संस्तुत है. सिंचित अवस्था में रोपाई पर इस की उपज 55 से 60 क्विंटल तक होती है. यह आधी बौनी ज्यादा उपज देने वाली सुगंधित चावल की किस्म उत्तर भारत में बहुफसलीय पद्धति के लिए अच्छी है इस का दाना अच्छी सुगंध वाला और लंबा होता है. यह गाल मिज, भूरे धब्बे रोग के लिए प्रतिरोधी भी है. पत्ती लपेटक एवं ब्लास्ट के लिए मध्यम प्रतिरोधी है. यह 120 से 125 दिन में पक जाती है.
पूसा बासमती या सुगंध-4 (1121): बासमती धान उगाने वाले सभी इलाकों के लिए यह अच्छी किस्म है. इस की उपज 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आती है. यह तरावड़ी बासमती से एक पखवाड़ा अगेती है. इस का दाना पकने के बाद 20 मिलीमीटर लंबा हो जाता है. इस का विदेशों को सब से ज्यादा निर्यात होता है.
पूसा सुगंध-3: यह दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के लिए है. उपज 60 क्विंटल तक मिलती है. आधी बौनी इस किस्म में बासमती के सभी गुण हैं. दाना खाने में मुलायम, सुगंधित व स्वाद में अच्छा होता है. यह किस्म 125 दिन में पक जाती है.
पूसा सुगंध-2 : यह सिंचित अवस्था में 55 क्विंटल तक पैदावार देती है. यह आधी बौनी अधिक उपज देने वाली किस्म है. मध्यम अगेती यह किस्म 120 से 125 दिन में पकती है.
पूसा बासमती-1 : इस की उपज 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है. यह बासमती धान की मध्यम बौनी किस्म है. बासमती चावल के राष्ट्रीय निर्यात में इस किस्म की 50 फीसदी हिस्सेदारी है. यह 130 से 135 दिन में पकती है.
पूसा-44 : यह किस्म कर्नाटक, केरल, पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में बोई जाती है. यह बगैर सुगंध वाली सिंचित अवस्था में 70 से 80 क्विंटल तक उपज देती है. बौनी प्रजाति की इस किस्म को पकने में 140 से 145 दिन का समय लगता है. यह मशीनों से कटाई व निकासी के दौरान बेहद कम टूटता है.
पीआरएच-10 : यह सकर धान है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बोया जाता है. उपज 65 क्विंटल तक होती है. यह बासमती गुणों वाली विश्व की पहली संकर किस्म है. पकने में 110 से 115 दिन लेती है. यह कम पानी में तैयार हो जाती है.
सरयू-52 : इस का मोटा चावल होता है. 150 दिन में पकने वाली इस किस्म से 60 से 70 मन प्रति एकड़ की उपज मिलती है. नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद की यह किस्म काफी मशहूर है.
नरेंद्र-359 : यह किस्म भी मोटे में है और 140 दिन में पकती है. 90 मन प्रति एकड़ तक उपज मिलती है.
केंद्रीय मृदा लवणता संस्थान करनाल, सीएसआर 32 व 36 किस्में खारे पानी वाले इलाकों और सैलाइन इलाकों के लिए अच्छी हैं. उपज 60 मन प्रति एकड़ तक मिलती है. ये किस्में 130 से 135 दिन में पक कर तैयार होती हैं.
पंत- 10, 12, 14, 16 व 19 : ये ज्यादा पैदावार और मोटे चावल वाली किस्में हैं.
वल्लभ-21 व 22 : सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम, मेरठ की सुगंधित चावल वाली किस्में हैं. ये 140 से 145 दिन में पकती हैं. खरीदार न होने के कारण बाजार नहीं पकड़ पा रही हैं. 55 मन प्रति एकड़ की उपज मिलती है.
सीएसआरआर कटक की वंदना किस्म 80 दिन में पक जाती है और 50 क्विंटल तक देती है.
जल भराव वाले इलाकों में क्रांति व महामाया धान की किस्में बोएं. इन की उत्पादन क्षमता 70 क्विंटल है और ये किस्में तैयार होने में तकरीबन 140 दिन का समय लेती हैं.





