Food Technology  : साइंस व उद्योग से जुड़ी संस्था वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, सीएसआईआर ने किसानों के लिए भी बहुत सी उम्दा तकनीकें व मशीनें निकाली हैं.

इसी संस्था ने साल 1967 में पहला देसी ट्रैक्टर स्वराज निकाला था. साथ ही चंद हफ्तों में ही बांस पर फूल खिलाने की तरकीब निकाली, जबकि बांस पर कुदरती फूल 20 साल बाद आते हैं.

सीएसआईआर ने मैसूर में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान सीएफटीआरआई खोल रखा है. इस संस्थान ने किसानों व कारोबारियों के लिए किफायती तकनीकें व बहुत से नए तरीके खोजे हैं. उन्हें अपना कर किसान खेती की उपज से खाने का सामान बना कर बेच सकते हैं और कामयाब कारोबारी बन सकते हैं.

सीएफटीआरआई ने अनाज, फल, सब्जी व मसालों की प्रोसेसिंग व बेहतर पैकिंग के 300 तरीके निकाले हैं. साथ ही गन्ना, हलदी, टमाटर, नारियल, आम व केले से तैयार होने वाले नए उत्पाद बनाने की तकनीक व मशीनें ईजाद की हैं. इन में से बहुत सी तकनीकों को अपना कर कई इलाकों में किसान खेती से ज्यादा कमाने में कामयाब रहे हैं.

दाल करेगी मालामाल

कई दालें बाजार में 100 रुपए किलोग्राम से ऊपर निकल गई हैं. दाल के कारोबारी खूब पैसा कमा रहे हैं. लेकिन दाल उगाने वाले किसान अपनी लागत के साथसाथ अपनी जान गंवा रहे हैं. उड़दमूंग हो या अरहरचना किसान दलहनी उपज को साबुत बेचने की बजाय उस की दाल बना कर बेचें. इस से किसानों को ज्यादा कीमत हासिल हो सकती है.

साझेदारी में है फायदा

मामूली किसान अपनी निजी दाल मिल नहीं लगा सकते, लेकिन यदि वे आपस में मिल जाएं तो सहकारी संस्था या सांझेदारी में दालमिल लगा भी सकते हैं. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान, मैसूर के माहिरों ने बड़ी ही कामयाब मिनी दालमिल बनाई है. यह 1 फेस की बिजली पर 1 हार्स पावर की मोटर से प्रति घंटा 150 किलोग्राम तक दाल दलती है.

फायदे ही फायदे

मिनी मिल से दाल बनाने में दाल से निकला छिलका किसान पशुओं को चारे में खिला सकते हैं. दाल बनाने में 1-2 फीसदी दाल टूट जाती है. उस से डोसा पाउडर, सांभर बेस, बडि़यां व पापड़ बनाए जा सकते हैं.

ठंडा गन्ने का रस

सीएफटीआरआई ने कोल्ड ड्रिंक की तरह गन्ने के ताजे रस को कारबोनेशन तकनीक के जरीए बोतलबंद करने का नायाब व कामयाब तरीका निकाला है. इस में गन्ने का रस 3 से 4 महीने तक पीने लायक बना रहता है, जबकि सादा रस कुछ घंटों बाद ही खराब होने लगता है.

अमीर करे हलदी

बहुत से किसान प्रोसेसिंग न कर पाने की वजह से हलदी नहीं उगाते. सीएफटीआरआई की किफायती तकनीक अपना कर मैसूर व उस के आसपास में हलदी उगाने वाले किसान बहुत सुकून से हैं. अब उन्हें भटकना नहीं पड़ता. यानी अब हलदी की प्रोसेसिंग भी आसान है.

मौके मौजूद

कई तरह के खमीर उत्पाद, डब्बा बंद फल, फोजन फ्रूट्स, स्क्वैश, कैचप, सास, अचार, चटनी, सीरप, गाजर का रस व फलों के जूस जैसे पेय, जैम, जैली, मार्मलेड, कैंडी व फलों के पाउडर, सूखी व कटी पैक्ड सब्जियां, बेकरी के तमाम उत्पाद और अदरक के उत्पाद बनाने के लिए फूड प्रोसेसिंग की 40 तरह की किफायती मशीनें सीएफटीआरआई ने बनाई हैं, जो खेतिहरों व कारोबारियों के मतलब की हैं.

किसान व कारोबारी ज्यादा जानकारी के लिए नीचे दिए गए पते व फोन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं:

प्रभारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं बिजनेस विकास विभाग, सीएफटीआरआई, मैसूर : 570020. फोन :0821-2514534.

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