Pickles and Chutneys: भारतीय भोजन में अचार व चटनी का विशेष स्थान है. देश के अलगअलग भागों में अचार व चटनी बनाने के अलगअलग तरीके हैं. फलों जैसे आम, नीबू, कटहल व करौंदा और सब्जियों जैसे गाजर, फूलगोभी, शलजम, टमाटर व मिर्च आदि में नमक, मिर्च, चीनी, मसाले व तेल आदि डाल कर अचार व चटनी बनाई जा सकती है. अमूमन सभी घरों में अचार व चटनी बनाए जाते हैं, लेकिन कई बार बहुत सावधानी बरतने के बाद भी ये पदार्थ खराब हो जाते हैं. इन का रंग बदल जाता है या फफूंदी आदि लग जाती है. इन को खराब होने से बचाने और अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
* अचार या चटनी बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि फल या सब्जी का चुनाव ठीक से किया जाए. कोई भी खराब फल या सब्जी नहीं लेनी चाहिए और काटने से पहले उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए.
* अमूमन नमक कम मात्रा में डालने से अचार खराब हो जाता है, लिहाजा अचार में नमक की मात्रा ठीक होनी चाहिए. खट्टे फलों के लिए 15-20 फीसदी और सब्जियों के लिए 8-10 फीसदी नमक डालना चाहिए.
* कुछ रसायनों का प्रयोग कर के अचार व चटनी को टिकाऊ बनाया जा सकता है. ऐसा ही एक रसायन ग्लेशियल ऐसेटिक एसिड है, जो फफूंदी व कीटाणुनाशक है. अचार तैयार हो जाने पर इसे तेल डालने से पहले अचार में 0.5 फीसदी तक मिला दें. नीबू के अचार में इस की जरूरत नहीं है, क्योंकि नीबू में कुदरती रूप से ही अम्ल की मात्रा ज्यादा होती है. सौस या चटनी में ग्लेशियल ऐसेटिक एसिड (0.5 फीसदी) डाल कर 5 मिनट तक उबालना चाहिए.
* अचार व चटनी वगैरह में 200 मिलीलीटर पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइट या 300 मिलीलीटर सोडियम बेंजोएट प्रति किलोग्राम के हिसाब से थोड़े से पानी में घोल कर मिलाने से भी इन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है.
* अचार में तेल को गरम कर के ठंडा करने के बाद ही मिलाएं.
* अचार व चटनी में पिसे हुए मसालों को हलका सूखा भून कर डालें. इस से भी अचार व चटनी जल्दी खराब नहीं होते. अचार में मसालों को गरम तेल में भून कर भी डाल सकते हैं. इस से इन पदार्थों का रंग व स्वाद ठीक रहेगा और ये जल्दी खराब भी नहीं होंगे.





