Paddy Drum Seeder. अच्छी उपज के लिए समय पर धान की रोपाई बहुत जरूरी है. पारंपरिक विधि और श्री विधि से धान की खेती में नर्सरी उगाना, उखाड़ना और हाथ से रोपाई करने में मजदूरों की जरूरत होती है, जिस में समय व पैसा भी अधिक लगता है.
इस समस्या के समाधान के लिए धान की सीधी बोआई तकनीक अपनाई जा सकती है. इस में यंत्र द्वारा अंकुरित बीजों की लाइनों में बोआई की जाती है.
आजकल कई तरह के धान बीज बोआई यंत्र हैं, परंतु 8 लाइनों वाला प्लास्टिक पैडी ड्रम सीडर ज्यादा मशहूर हो रहा है. इस तकनीक से धान की खेती के लिए वैरायटी का चुनाव खेत की स्थिति के अनुसार ही करना चाहिए.
धान बोआई यंत्र
पैडी ड्रम सीडर से कदवा यानी कीचड़ किए हुए खेत में अंकुरित बीज की लाइनों में सीधी बोआई की जाती है. इसलिए धान का बिचड़ा उगाने की जरूरत नहीं होती है. सीधा धान बोआई यंत्र 4, 8 व 12 लाइनों वाले आते हैं, जो एक आदमी द्वारा आसानी से चलाया जा सकता है. यह प्लास्टिक का बना होता है. इस तकनीक से बोआई कर के किसान बिचड़ा उगाने, उखाड़ने व धान रोपने पर आने वाले खर्च व समय की काफी बचत कर सकता है और मजदूर की किल्लत से भी निबट सकता है.
यंत्र की बनावट
यह बहुत सरल यंत्र है. इस की बनावट में ज्यादा तामझाम नहीं है.
बीज बौक्स: इस यंत्र में प्लास्टिक का बना हुआ डमरू की तरह का बौक्स होता है, जिस में अंकुरित बीज रखा जाता है. हर बीज बौक्स में डेढ़ से 2 किलोग्राम बीज रखने की जगह होती है. 8 लाइनों वाले यंत्र में 4 बीज बौक्स होते हैं, जो एक वर्गाकार शाफ्ट पर कसे हुए होते हैं.
साइड पहिए: यंत्र के दोनों किनारों पर प्लास्टिक के पहिए लगे होते हैं, जो कीचड़ किए हुए खेत में यंत्र को आसानी से चलने में मदद करते हैं.
हैंडल: यंत्र को आसानी से खींचने के लिए इस में एक हैंडल लगा रहता है.
सीधी बोआई के फायदे
– धान की सीधी बोआई से बिचड़ा उगाने, उखाड़ने और रोपनी की जरूरत नहीं होती है. साथ ही इन कामों पर आने वाले खर्च व समय की भी बचत होती है.
– इस से एकसमान लाइनों में बोआई होती है, जिस से खरपतवार की रोकथाम में बहुत आसानी होती है.
– इस तकनीक से 2 मजदूरों द्वारा दिनभर में एक हेक्टेयर खेत में बोआई की जा सकती है. एक आदमी यंत्र खींचता है और दूसरा बीज भरने व खेत के मोड़ पर यंत्र को उठाने में मदद करता है.
– पारंपरिक रोपाई वाले धान की तुलना में सीधी बोआई तकनीक वाली फसल एक हफ्ते पहले पकती है और पैदावार ज्यादा मिलती है.
– मानसून में देरी होने पर भी इस तकनीक से किसान किसी भी समय धान की खेती कर सकते हैं.
– यंत्र हलका होने के कारण चलाने में काफी आसान होता है. 4 व 8 लाइनों वाले सीधी धान बोआई यंत्र को एक महिला भी चला सकती है.
– इस विधि में पानी की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती है, क्योंकि शुरुआत में खेत में गीलासूखा विधि से जल प्रबंधन किया जाता है, जबकि गाभा की अवस्था से फसल कटनी के 10 दिन पहले तक खेत में 2-3 सेंटीमीटर खड़ा पानी रखा जाता है.
बीज तैयार करना: इस तकनीक से बोआई करने के लिए 10-12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की जरूरत होती है. बोआई से पहले बीज को 10-12 घंटे पानी में भिगो दें. तैरने वाले खराब बीजों को बाहर निकाल लें, फिर बीजों को उपचारित करें. उन्हें 24 घंटे जूट के बोरों में रखें और बोआई से पहले आधा घंटा छाया में रखें.





