Mann Ki Baat-

किसान की मेहनत जब खेतों से निकलकर देश तक पहुंचती है, तो उसकी पहचान भी दूर तक बनती है. मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले के सदोलपारा गांव के किसान कमल चेकजिंग संगमा की कहानी कुछ ऐसी ही है. मिलेट यानी मोटे अनाज की खेती और अपनी पारंपरिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 139वें एपिसोड में किया. इसके बाद 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने संगमा से फोन पर बात की. एक किसान के लिए यह बातचीत उसकी मेहनत और प्रयासों को मिली खास पहचान की तरह है.

खेत में किए प्रयासों ने बनाई पहचान

कमल चेकजिंग संगमा मेघालय के उस इलाके से आते हैं, जहां खेती लोगों की आजीविका के साथ उनकी परंपराओं से भी जुड़ी हुई है. मिलेट की खेती को आगे बढ़ाने के लिए उनके प्रयासों ने स्थानीय स्तर पर इस फसल के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की है. खेती में आधुनिक तरीकों को अपनाने और पारंपरिक अनाज को महत्व देने से किसानों के सामने नए अवसर खुल सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में संगमा के काम का उल्लेख कर यह संदेश दिया कि गांवों में खेती करने वाले किसान भी अपने काम के दम पर बड़ी पहचान बना सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि किसान अपने अनुभवों से सीखें, खेती में नए तरीकों को अपनाएं और अपनी जमीन व स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसलों पर ध्यान दें.

खेती के साथ संस्कृति को भी सहेज रहे हैं

प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान संगमा ने आचिक समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री के विचार गांव के लोगों को अपनी पारंपरिक खेती जारी रखने और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं.

संगमा के लिए खेती केवल अनाज उगाने का काम नहीं है. यह अपने समुदाय की परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ने का माध्यम भी है. अपने खेतों में उगाए गए अनाज को भोजन में शामिल करना और स्थानीय फसलों को महत्व देना इस सोच का हिस्सा है.

दूसरे किसानों के लिए भी है सीख

कमल चेकजिंग संगमा की कहानी बताती है कि किसान की पहचान केवल उसकी जमीन या उत्पादन तक सीमित नहीं होती. अपने काम के प्रति लगन, स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग और नई संभावनाओं को अपनाने की कोशिश भी उसे आगे बढ़ा सकती है.

उनकी उपलब्धि दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा है कि वे अपनी पारंपरिक फसलों और खेती के अनुभवों को कमतर न समझें. सही दिशा में किए गए प्रयासों से स्थानीय खेती को नई पहचान मिल सकती है. संगमा का उदाहरण यह भी दिखाता है कि गांव में रहकर, खेतों में मेहनत करते हुए भी किसान राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना सकता है. Mann Ki Baat

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