Nationwide Strike : देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले खेतिहर मजदूर और मनरेगा श्रमिक अपनी कई पुरानी मांगों को लेकर एक बड़ी हड़ताल का ऐलान किया है. मजदूर संगठनों का मानना हैं कि, महंगाई बढ़ने, कम मजदूरी मिलने और रोजगार की कमी की वजह से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है. संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है, जिससे यह आंदोलन और मजबूत हो गया है और अब यह एक बड़ा किसान-मजदूर एकता आंदोलन बन गया है.

मनरेगा और मजदूरों की समस्याएं

मजदूर संगठनों का कहना हैं कि, मनरेगा योजना के तहत श्रमिकों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है और कई जगहों पर मजदूरी देने में भी बहुत देर हो रही हैं. इसके अलावा, नई तकनीकी प्रक्रियाओं और नियमों की वजह से श्रमिकों को काम मिलने में भी मुश्किलें आ रही हैं। संगठनों का आरोप है कि, सरकार मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर कर रही है, जिसका सीधा असर गरीब और जमीन से वंचित परिवारों पर पड़ रहा है.

मजदूरों की महत्वपूर्ण मांगे

हड़ताल कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं. इनमें मनरेगा के तहत साल में 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना, दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर ₹700 करना और समय पर भुगतान की गारंटी शामिल हैं. मजदूर नेताओं का कहना है कि, मौजूदा मजदूरी दर बढ़ती महंगाई के मुकाबले बहुत कम हैं, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया हैं. ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं.

SKM का खुला समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस आंदोलन को किसानों और मजदूरों की साझा लड़ाई बताया हैं. मोर्चा के नेताओं ने कहा कि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था किसानों और खेतिहर मजदूरों दोनों पर निर्भर करती हैं, इसलिए मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने किसानों से अपील की है कि, वे हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों में शामिल होकर मजदूरों का समर्थन करें.

आगामी विरोध कार्यक्रम

संगठनों के अनुसार, हड़ताल के दौरान कई राज्यों में धरने, प्रदर्शन, रैलियां और जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. मजदूर नेताओं का कहना है कि, अगर सरकार भविष्य में
उनकी मांगों पर गंभीरता से नहीं सोचती तो आंदोलन को और जोरदार बनाया जाएगा.

यह हड़ताल ग्रामीण रोजगार, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बढ़ते असंतोष को दर्शाती हैं.

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