World Water Day: हमारी पृथ्वी का लगभग 70 फीसदी फीसदी हिस्सा जल से भरा है, जिसमें 97 फीसदी पानी खारा है. मात्र 3 फीसदी पानी ही मीठा जल है अर्थात इस्तेमाल करने लायक या पीने लायक है. यही कारण है कि आज के दौर में जल संरक्षण आज अत्यंत आवश्यक हो गया है. इसी उद्देश्य को धयान में रखकर दुनिया-भर में 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ (World Water Day) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य स्वच्छ जल की पहुंच हर जने तक सुनिश्चित करना है.
‘विश्व जल दिवस’ कल, आज और कल
22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ (World Water Day) मनाने की यह पहल संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित एक वैश्विक पहल है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1993 से हुई थी, जिसे आज दुनिया भर में मनाया जाता है. इस साल यानी कि वर्ष 2026 की थीम ‘जल और लैंगिक समानता’ रखी गई है, जिसका नारा है कि जहां जल बहता है, वहीं समानता बढ़ती है. इस थीम इस तथ्य को उजागर करती है कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और लड़कियों पर पड़ता है, क्योंकि विश्व में जल लाने की 80 फीसदी जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है. जिन क्षेत्रों में स्वच्छ जल उपलब्ध होता है, वहां लड़कियों की शिक्षा दर में लगभग 15 फीसदी वृद्धि देखी गई है.
8 से 22 मार्च तक ‘जल महोत्सव’- ‘गांव का उत्सव, देश का महोत्सव’
भारत में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत 8 से 22 मार्च तक ‘जल महोत्सव 2026’ मनाया गया, जिसकी टैगलाइन ‘गांव का उत्सव, देश का महोत्सव’ थी. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी इसमें शामिल हुईं और महोत्सव को संबोधित किया. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में जल केवल एक आधारभूत सुविधा का विषय नहीं रहा है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं, आजीविका और सामुदायिक जीवन से जुड़ा हुआ है.
वर्षों से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को पीने का पानी बहुत दूर से लाना पड़ता था. स्वच्छ जल उपलब्ध कराना केवल सुविधा का प्रश्न नहीं था. यह समय, स्वास्थ्य और गरिमा का विषय था. इन चुनौतियों का निराकरण करने के लिए भारत सरकार ने ‘जल जीवन मिशन’ का शुभारंभ किया. जिन ग्रामीणों को कभी पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, आज उनके घरों में स्वच्छ और सुरक्षित जल उपलब्ध है.
जल सरक्षण है जल संकट का समाधान
जानकारी के अनुसार एक कप कॉफी के उत्पादन में लगभग 140 लीटर पानी खर्च होता है. यह पानी उसके उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग तक पर खर्च होता है और एक स्मार्टफोन के निर्माण में लगभग 12,000 लीटर पानी खर्च होता है. सुनने में यह अजूबा लग सकता है लेकिन यह सच्चाई है, इसीलिए
आज के समय में जल संरक्षण बहुत जरुरी है. छोटे-छोटे प्रयासों से, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण कर हम हजारों-लाखों लीटर पानी बचा सकते हैं.
खेती में कैसे करें जल सरक्षण
-गिरते भूजल स्तर को सुधारना और किसानों को वर्षा-आधारित टिकाऊ खेती के लिए सशक्त बनाना.
-फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के तहत किसानों को धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के बजाय कम पानी वाली फसलों (जैसे- बाजरा, दलहन) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना.
-सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation), ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा देना, ताकि कम पानी में खेती की जा सके.
-‘जल संचयन जन भागीदारी’ के तहत तालाबों की सफाई, चेक डैम निर्माण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना.
इसके अलावा सरकार द्वारा ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop) के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है.
विश्व जल दिवस किसानों को न केवल अपनी फसल के लिए, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी बचाने के लिए सचेत करता है. यह स्पष्ट है कि जल के बिना न तो जीवन संभव है, न ही सतत विकास. यदि समय रहते हम जल संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट और गहरा होगा, इसलिए यह बहुत ही आवश्यक व जरूरी है कि हम जल को संरक्षित करें, इसे प्रदूषित होने से बचाएं.





