Machine : कम दाम में मिल रही मक्का, मूंग, बोआई यंत्र

Machine : आज खेती का काम कृषि यंत्रों पर निर्भर है. यहां हम केवल बोआई की बात कर रहे हैं, क्योंकि अगर खेत में बीज की बोआई ठीक प्रकार से होगी, तो फसल भी अच्छी मिलेगी.

इस के लिए आज बाजार में अनेक तरह के बोआई करने वाले कृषि यंत्र (Machine) उपलब्ध हैं. लेकिन उन की कीमत चुकाना और उन्हें इस्तेमाल करना हर किसान के बस में नहीं है, क्योंकि ऐसे कृषि यंत्र (Machine) ज्यादातर शक्ति चालित/ ट्रैक्टर चालित होते हैं. उन की कीमत भी ज्यादा होती है.

ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों के लिए यहां हम ऐसे कृषि यंत्र (Machine) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सस्ता भी है और उस का रखरखाव भी आसान है और न ही उसे चलाने के लिए किसी खास तकनीक की जरूरत होती है. इस एक ही मशीन से अनेक फसलों के बीजों की बोआई की जा सकती है.

जी हां, यह बोआई मशीन बहुत ही सस्ते दामों पर किसानों को उपलब्ध है.

हाल ही में पंतनगर कृषि मेले में इस सीडर यंत्र (Machine) को देखा गया, जहां इस सीडर यंत्र के निर्माता हाजी जुबैर ने बताया कि हमारी इस मक्का बोआई मशीन से मक्का के अलावा मूंग, चना, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली जैसी अनेक फसलों की बोआई बड़ी ही आसानी से की जाती है. यह एक मल्टीक्रॉप सीडर यंत्र है, जिसे इस्तेमाल करने के लिए न बिजली की जरूरत न ही किसी अन्य स्रोत की जरूरत है. इस सीडर यंत्र से बोआई करने के लिए केवल एक ही व्यक्ति की जरूरत होती है, जो मैनुअल तरीके से मशीन का संचालन करता है.

इस सीडर यंत्र (Machine) में बीज के लिए लगे बौक्स में एक बार में साढ़े 4 किलो तक बीज भरा जा सकता है और एक दिन में 15 से 20 बीघा तक खेत की बोआई की जा सकती है.

अगर हम इस मल्टीक्रॉप सीडर की कीमत की बात करें तो इस मशीन की कीमत मात्र 10,500 रुपए है, लेकिन इस समय यह मशीन खास औफर के तहत मात्र 8,500 रुपए में मिल रही है.

यह सीडर यंत्र संभल, उत्तर प्रदेश में हाजी जुबैर द्वारा बनाया जा रहा है और घर बैठे भी आप इस यंत्र को मंगवा सकते हैं. अगर आप संभल, उत्तर प्रदेश के 50 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं तो आप को मशीन भेजने का अलग से कुछ खर्चा नहीं देना है और केवल 1000 रुपए से मशीन बुक कराई जा सकती है और जब आप को घर पर मशीन की डिलीवरी मिलती है बकाया रकम उसी समय देनी है.

अगर आप 50 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर देश के किसी भी राज्य शहर में रहते हैं और मशीन अपने यहां मंगवाना चाहते हैं तो इस के लिए आपको 1,000 रुपए उस का अतिरिक्त कुरियर का खर्चा देना होगा.

हाजी जुबैर का कहना है एक साल तक मशीन की हम गारंटी देते हैं. वैसे तो इस यंत्र में कोई खराबी आती नहीं है, फिर भी इस यंत्र में किसी तरह की खराबी आ जाए तो हम उसे तुरंत ठीक कर के देते हैं.

हाजी जुबैर ने बताया कि एक बार की बोआई में ही आप मशीन की कीमत वसूल कर लेते है बाकी तो फिर मुनाफा ही मुनाफा है.

अगर आप इस मल्टीक्रॉप सीडर को खरीदना चाहते हैं या कुछ अन्य जानकारी चाहते हैं, तो आप इस मोबाइल नंबर 9358190766/8630938655 पर बात कर सकते हैं.

Self-Propelled Reaper : फसलों की कटाई करे आसान

Self-Propelled Reaper : फसल कटाई की बात आती है तो मन में अनेक विचार आते हैं कि अगर फसल कटाई यंत्र लेंगे तो उस यंत्र को चलाने के लिए ट्रैक्टर भी चाहिए, जबकि हर किसान के पास ट्रैक्टर नहीं होता. ऐसे किसानों के लिए ऐसा रीपर कृषि यंत्र है, जो बिना ट्रैक्टर के और बिना किसी और की मदद लिए अकेले शख्स द्वारा ही चलाया जा सकता है. यह कृषि यंत्र है सैल्फ प्रोपैल्ड रीपर (Self-Propelled Reaper). जैसा नाम वैसा काम. जी हां, इसे चलाने के लिए केवल एक ही शख्स चाहिए, जो मशीन का हैंडल को पकड़ कर मशीन के पीछेपीछे चलता है, इसलिए इस रीपर को सैल्फ प्रोपैल्ड रीपर (Self-Propelled Reaper) वाक बिहाइंड भी कहा जाता है. बीसीएस कंपनी के इस क्रॉप रीपर के 2 मौडल हैं.

इन फसलों की करे कटाई : दोनों ही मौडल किसानों के काम के हैं और इन से धान, गेहूं, सोयाबीन, चना, मटर, ज्वार, तिलहनी और अनेक चारा फसलों की कटाई के साथसाथ लाइनें लगाने का भी काम होता है. इस में 170F का एयरकूल्ड 4 स्ट्रोक पैट्रोल इंजन लगा है और इस यंत्र का इस्तेमाल करते समय एक घंटे में 800 मिलीलिटर के हिसाब से पैट्रोल की खपत होती है.

इस रीपर में 3 गियर दिए हैं. 2 गियर आगे की तरफ चलने के लिए और 1 गियर पीछे की तरफ चलने के लिए, जिसे हम बैक गियर कहते हैं. सामान्य फसल कटाई की क्षमता 5 एकड़ प्रति घंटा है. अलगअलग फसल के हिसाब से समय घटबढ़ सकता है. यह रीपर यंत्र 120 सैंटीमीटर की चौड़ाई में फसल कटाई करता है.

यंत्र की खासीयतें : इस यंत्र का रखरखाव आसान है और इस पर कोई खर्च नहीं आता है, चलाने में आसान है, कम वजन और पहाड़ी इलाकों के लिए भी उपयोगी है.

यंत्र की अधिक जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 8427822331/8427800753 पर फोन करें या इन की वैबसाइट www.bcs-ferrari.in देखें.

Power Weeder : बागबानी फसलों की निराईगुड़ाई के लिए ग्रेशिया पावर वीडर

Power Weeder : फसल से अच्छी उपज लेने के लिए समय पर निराईगुड़ाई करना बहुत जरूरी है वरना अच्छे खादबीज देने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि अगर समय पर खेत की निराईगुड़ाई नहीं की गई तो खरपतवार खेत में बोई गई फसल पर हावी हो कर फसल की पैदावार पर बुरा असर डालते हैं.

निराईगुड़ाई के लिए समय पर मजदूरों का मिलना भी एक बड़ी समस्या है. ऐसे में कृषि यंत्र ही बड़े काम आते हैं, जो कम समय में अच्छा काम कर किसान की फसल से अच्छी उपज दिलवाने का काम करते हैं.

ग्रेशिया पावर वीडर: निराईगुड़ाई करने वाला यह कृषि यंत्र गन्ना, सब्जी, केला बागबानी और पहाड़ी इलाकों के लिए खास है. बीसीएस कंपनी द्वारा बनाए गए इस यंत्र के लगभग दर्जनभर मौडल उपलब्ध हैं, जिन में से कुछ मौडल पैट्रोल से और कुछ मौडल डीजल से चलते हैं और सामान्य तौर पर सभी मौडलों में 3 गियर दिए गए हैं, जिस में 2 गियर आगे की तरफ चलने के लिए और 1 गियर पीछे की तरफ चलने के लिए होता है. सभी में 1 सिलैंडर है और ईंधन टैंक की क्षमता 3.5 से 5 लिटर तक है. ईंधन की खपत 1 लिटर प्रति घंटा तक है.

इन यंत्रों में लगे रोटावेटरों को फसल के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है. अलगअलग मौडलों के वजन की बात करें तो 60 किलोग्राम से ले कर 140 किलोग्राम तक के ये पावर वीडर (Power Weeder) यंत्र हैं.

यंत्र की खासीयत : इस पावर वीडर (Power Weeder) के सभी मौडलों में कृषि के अनेक तरह के छोटे कृषि यंत्रों को जोड़ कर भी काम लिया जा सकता है. इन अटैचमैंट मशीनों में रीजर, केज व्हील, हल, दोहरा हल और पानी उठाने वाला पंप शामिल हैं. इन सभी यंत्रों को अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार जोड़ कर इस यंत्र से खेती के दूसरे काम भी किए जा सकते हैं.

Field Marshal Super Seeder : तमाम फसलों की करे बोआई

Field Marshal Super Seeder : सितंबर, 2025 के अंतिम सप्ताह में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय कृषि मेले का आयोजन हुआ था, जहां दर्जनों कृषि यंत्र निर्माता अपने प्रोडक्ट्स को ले कर आए हुए थे. उन्हीं कृषि यंत्र निर्माताओं में सब से ज्यादा भीड़ फील्ड मार्शल कृषि यंत्र कंपनी के यहां लगी थी. कारण था फील्ड मार्शल का सुपर सीडर (Field Marshal Super Seeder) कृषि यंत्र. इस सुपर सीडर का डैमो जेपी जाखड़ खुद कर रहे थे और अपने इस यंत्र की अनेक खासीयतों का भी बखान कर रहे थे.

बातचीत में उन्होंने ‘फार्म एन फूड’ के प्रतिनिधि को बताया कि यह एक ऐसी बहुउपयोगी और किफायती मशीन है, जो किसानों का समय और श्रम दोनों की बचत करती है, क्योंकि इस एक ही मशीन से न सिर्फ हर तरह के बीजों की बोआई की जा सकती है, बल्कि इस में लगे 4 तरह के यंत्रों का खेती में अलगअलग इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

उन्होंने आगे बताया कि फील्ड मार्शल सुपर सीडर (Field Marshal Super Seeder) मशीन से हर तरह के बीजों की बोआई कर सकते हैं. मेले में उन्होंने बोआई करने वाले अनेक बीजों को बोतल में भर कर मशीन के ऊपर रख कर प्रदर्शन भी किया था.

जेपी जाखड़ ने बताया कि इस सुपर सीडर यंत्र से हमारे देश में होने वाली हर तरह की फसल के बीजों की बोआई हो सकती है, चाहे वह रबी की फसल हो या खरीफ की फसल हो. गेहूं, मक्का, बाजरा, धान, मूंग, उड़द, चना, मटर आदि के अलावा सब्जियों के बीजों की बोआई भी की जा सकती है. इस के अलावा मसाला फसल जीरा, धनिया आदि की भी बोआई की जाती है. इस फील्ड मार्शल सुपर सीडर (Field Marshal Super Seeder) 813 से छोटे से ले कर बड़े दाने वाली फसल की बोआई सफलतापूर्वक की जाती है.

4 इन 1 है यह सुपर सीडर : इस सुपर सीडर की खासीयत है कि इस में लगी अन्य मशीनों को जब चाहे अलग किया जा सकता है. जब बोआई का का काम खत्म हो जाए, तो सीडर मशीन को अलग किया जा सकता है. इसी तरह रोटावेटर, हैरो और डिस्क ड्रिल को अलग कर के अपनी सुविधानुसार उन से काम लिया जा सकता है. ये सभी यंत्र ट्रैक्टर चालित हैं.

Field Marshal Super Seeder

बिजाई की प्रक्रिया : इस मशीन में बोआई के लिए फसल के बीजों के अनुसार प्लेट लगी हुई हैं, जिस में बने छिद्रों से बीज उचित गहराई और तय दूरी पर खेत में गिरता है. इस के अलावा मशीन में खादबीज के लिए टैंक भी लगे हैं. इस फील्ड मार्शल 813 यंत्र को इस्तेमाल करने के लिए 50 से 55 हौर्स पावर वाले ट्रैक्टर की जरूरत होगी.

इस यंत्र से बोआई करने पर अगर बीज खराब नहीं है, तो सौ फीसदी तक बीज का अंकुरण होता है, जिस से किसानों को अपनी फसल से बेहतर पैदावार मिलती है.

यंत्र की खासीयतें : इस यंत्र से बीजों की समान गहराई और तय दूरी पर बोआई की जाती है. बोआई के लिए यह एक आधुनिक मशीन है, जो जीरो टिलेज तकनीक (बिना जुताई) विधि से बोआई करती है. यह मशीन फसल अवशेषों (पराली) को बिना हटाए, बिना खेत तैयार करे अगली फसल की बोआई करती है.

इस यंत्र में लगा रोटर खेत के फसल अवशेषों को काट कर बारीक कर देता है और उन्हें मिट्टी में मिला देता है, जिस से वे खाद बन जाते हैं. इस कृषि यंत्र पर भारत सरकार से सब्सिडी भी मिलती है.
इस सुपर सीडर यंत्र के अलावा यह कंपनी अन्य कृषि यंत्र भी बनाती है, जिन में जीरो ड्रिल, स्ट्रा रीपर, स्प्रे पंप, पावर वीडर, रोटावेटर, हैरो, लेजर लैंड लैवलर और बीटी कौटन आदि शामिल हैं.

अगर कोई किसान इन यंत्रों को खरीदना चाहता है या कुछ अन्य जानकारी चाहता है, तो आप मोबाइल नंबर 9896782070 / 8059582070 पर बात कर सकते हैं.

Machines : खेत को बिना तैयार करे इन यंत्रों से करे सीधी बोआई

Machines : ऐसे कई कृषि यंत्र (Machines) हैं जो खेत को तैयार करे बिना सीधी बोआई का काम करते हैं. इससे समय और लागत दोनों की बचत होती है.

सुपर सीडर यंत्र : सुपर सीडर यंत्र खेत को बिना जोते फसल की सीधी बोआई कर सकता है. इस यंत्र के इस्तेमाल से किसान का खेत तैयार करने में लगने वाला पैसा भी बचता है और समय भी कम लगता है. पिछली फसल कटाई के बाद खेत में अकसर नमी होती है और इसी नमी के रहते खेत में सुपर सीडर यंत्र से सीधी बोआई की जा सकती है.

हैपी सीडर यंत्र : इस यंत्र से भी सीधे बोनी की जा सकती है खासकर धान कटने के बाद उस मे गेहूं की सीधी बोआई कर दी जाती है.

Machines

जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल : यह यंत्र भी पहले बताए गए यंत्रों से मिलताजुलता यंत्र है. इस यंत्र से भी नरवाई की अवस्था में भी बोआई हो सकती है.

जिन फसलों की कटाई रीपर या रीपर कम बाइंडर से की जाती है, उस में फसल की कटाई पौधे की जड़ से ही की जाती है, इसलिए ऐसे खेतों में भी उपरोक्त कृषि यंत्र द्वारा सीधी बोआई की जा सकती है.

कृषि यंत्रों पर मिलती है सब्सिडी : सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी भी मिलती है, जो अलगअलग राज्यों में अलगअलग हो सकती है. वैसे सामान्यतः इन कृषि यंत्रों पर अनुजाति/जनजाति, लघु सीमांत और महिला किसानों को कुल कीमत का 50 फीसदी और दूसरे किसानों को कुल कीमत का 40 फीसदी तक सब्सिडी देने का प्रावधान है.

Agricultural Fair : कृषि मेले में पहले दिन ही पहुंचे 72,000 किसान

Agricultural Fair : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में 2 दिन का कृषि आयोजित किया गया. इस कृषि मेले (Agricultural Fair) में पहले दिन तकरीबन 72,000 से अधिक किसानों ने प्रदर्शनी का लाभ लिया.

किसानों ने मेले में उन्नत किस्म के बीजों, कृषि विधियों, सिंचाई यंत्रों, कृषि मशीनरी आदि की जानकारी भी हासिल की और मेले में आगामी रबी फसलों के बीजों के लिए किसानों में भारी उत्साह देखा गया, जहां किसानों ने गेहूं, जौ, सरसों, चना, मेथी, मसूर, बरसीम तथा जई व उन्नत किस्मों के तकरीबन 1 करोड़, 14 लाख रुपए के बीज खरीदे.

मेले में 44,750 रुपए के कृषि साहित्य की बिक्री हुई. सब्जी व बागबानी फसलों के बीजों की 1 लाख, 60 हजार रुपए की बिक्री हुई. किसानों ने मेले (Agricultural Fair) में मिट्टी व पानी जांच सेवा का लाभ उठाते हुए मिट्टी तथा पानी के 246 नमूनों की जांच करवाई. टिश्यू कल्चर तकनीक द्वारा विकसित पौध की बिक्री 22,000 व जैव उर्वरक के टीके की बिक्री 93,000 रुपए की हुई.

Agricultural Fair

किसानों ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान फार्म पर वैज्ञानिकों द्वारा उगाई गई फसलें भी देखीं और उन में प्रयोग की गई प्रौद्योगिकी के साथसाथ जैविक खेती के बारे जानकारी हासिल की.

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित इस मेले (Agricultural Fair) में किसानों का जमावड़ा सुबह से ही शुरू हो गया था और देश के अनेक हिस्सों से किसानों ने भाग लिया.

‘फार्म एन फूड’ के प्रतिनिधि ने वहां पहुंच कर अनेक किसानों से बात की. बस्ती, उत्तर प्रदेश से आए प्रगतिशील किसानों की टीम भी वहां मिली जिन में राममूर्ति मिश्रा, अरविंद सिंह, आज्ञाराम वर्मा आदि मौजूद थे. उन्होंने बताया कि में इस मेले में उन्हें बहुत नईनई जानकारियां मिलीं.

मेले (Agricultural Fair) में लगभग 2 दर्जन से अधिक कृषि यंत्र निर्माता अपने अनेक आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ पहुंचे हुए थे. इस के अलावा खादबीज, कीटनाशक, फूड प्रोसैसिंग के अलावा पौधशाला वाले भी मौजूद थे.

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हकृवि में विभिन्न परियोजनाओं का किया उद्घाटन :

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में छात्राओं को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए नवनिर्मित कल्पना चावला और देवी अहिल्याबाई होल्कर गर्ल्स होस्टल का उद्घाटन किया. इन होस्टलों में 327 छात्राओं के रहने के लिए आधुनिक स्तर की मूलभूत सुविधाएं सुलभ करवाई गई हैं. महिला छात्रावासों के निर्माण पर 14.56 लाख रुपए की धनराशि खर्च की गई है. इन छात्रावासों में डाइनिंग हाल, किचन, स्टोर, रीडिंग रूम, जिम और कौमन हाल आदि का निर्माण किया गया है.

Agricultural Fair

इस के अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी कृषि उद्यमिता स्थल (मेला ग्राउंड) का भी उद्घाटन किया. ग्रीन ग्रास कारपेट एवं सभी प्रकार की सुविधाओं से सुसज्जित इस मेला ग्राउंड के निर्माण कार्य पर एक करोड़, 10 लाख रुपए की धनराशि खर्च की गई है.

इस अवसर पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा, नलवा से विधायक रणधीर सिंह पनिहार, हिसार से विधायक सावित्री जिंदल, हांसी से विधायक विनोद भ्याना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री कमल गुप्ता सहित हिसार के मेयर प्रवीण पोपली, भाजपा जिला अध्यक्ष आशा खेदड़ और अशोक सैनी भी उपस्थित रहे.

Mechanization : यंत्रीकरण से पाई उन्नति की राह

Mechanization : बस्ती जिले के विकास खंड बहादुरपुर के गांव भेलवल के रहने वाले युवा किसान अरविंद सिंह कुछ सालों पहले खेती में बढ़ती लागत और बढ़ती मजदूरी की वजह से लगातार घाटे में चल रहे थे. उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वे घाटे में चल रही खेती को मुनाफे की तरफ कैसे मोड़ें, इसलिए वे अपनी खेती को छोड़ कर कोई दूसरा कामधंधा अपनाने की सोच रहे थे.

उन्होंने एक दिन अपने मन की बात एक प्रगतिशील किसान को बताई, तो उस किसान ने बताया कि अगर खेती को मुनाफे का सौदा बनाना है, तो इस के लिए उन्हें खेती में उन्नत तकनीक को अपनाते हुए उन्नतशील बीज, खाद, उर्वरक व यंत्रीकरण (Mechanization) का सहारा लेना होगा. वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों से खेती को फायदेमंद बनाने के तरीके जान सकते हैं.

इस युवा किसान अरविंद ने अपनी खेती की डूबती नैया को पार लगाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र का सहारा लेने का मन बनाया और एक दिन अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क कर के अपनी घाटे से जूझ रही खेती को उबारने की सलाह मांगी.

वैज्ञानिकों ने उन्हें सलाह दी कि वे अपनी खेती की लागत में कमी लाने व समय प्रबंधन के लिए यंत्रीकरण (Mechanization) को बढ़ावा दें. इस से न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि जोखिम घटने के साथसाथ उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी. कृषि वैज्ञानिकों ने अरविंद को यह यकीन दिलाया कि खेती में किसी भी तरह की परेशानी आने पर वे खुद खेत में आ कर उस का समाधान बताएंगे.

अरविंद सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों के बताए अनुसार अपनी खेती को फिर से नए तरीके से करने की कोशिश करनी शुरू कर दी. इस के लिए उन्हें जरूरत थी फसलों के अच्छे बीज और जुताई व मड़ाई के यंत्रों की. इस के लिए उन के पास पूंजी की कमी आड़े आ रही थी. उन्होंने फिर से कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क किया, तो कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि सरकार व बैंकों द्वारा खेती व कृषि यंत्रों की खरीदारी (Mechanization) के लिए सब्सिडी के साथ कर्ज दिया जाता है, जिस के लिए वे आवेदन कर सकते हैं.

अरविंद ने पहली बार बैंक से कर्ज ले कर ट्रैक्टर व जुताई के यंत्रों की खरीदारी कर के खेती की शुरुआत की. इस से उन की खेती में कुछ हद तक लागत की कमी तो आई, लेकिन फसल की मड़ाई व रोपाई में अब भी लागत ज्यादा आ रही थी. उन्होंने फिर से कृषि वैज्ञानिकों से गेहूं, आलू वगैरह की बोआई के लिए काम आने वाले यंत्रों की जानकारी हासिल की और उस के बाद उन्होंने पहली बार कृषि विभाग से अनुदान पर जीरोटिल सीडड्रिल को खरीद कर लाइन से लाइन की बोआई की. इस से न केवल खाद, उर्वरक व बीज की मात्रा में कमी आई, बल्कि उन्हें कई बार की जुताई पर होने वाले खर्च से भी छुटकारा मिल गया.

Mechanization

अरविंद को अब पता चल चुका था कि उन्नत बीज व उन्नत कृषि यंत्रों का इस्तेमाल (Mechanization) कर के न केवल लागत में कमी लाई जा सकती है, बल्कि समय के साथसाथ उच्च उत्पादन भी हासिल किया जा सकता है. इस से खेती से होने वाला मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है.

अरविंद सिंह को यह पता चल चुका था कि खेती में कृषि यंत्रों का इस्तेमाल खेती के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इसलिए उन्होंने खरीफ व रबी की फसलों में लगने वाले मजदूरों में कमी लाने के लिए कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया. उन्हें पता चला कि उन के द्वारा ली जाने वाली आलू की फसल की बोआई व खुदाई पर आने वाले समय व पैसे के खर्च में कमी लाने के लिए पोटैटो प्लांटर व पोटैटो डिगर आसानी से इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं. उन्होंने अपने नजदीकी बैंक से इन कृषि यंत्रों के खरीदारी के लिए कर्ज लिया. उन्होंने इस से पहले ट्रैक्टर के कर्ज को समय से चुकता कर दिया था, जिस की वजह से उन्हें नई मशीनों की खरीदारी के लिए बैंकों द्वारा आसानी से कर्ज दे दिया गया. अरविंद के द्वारा खेती में अपनाई जाने वाली मशीनें इस प्रकार हैं:

धान पैडी प्लांटर: अरविंद सिंह धान की रोपाई पर होने वाले खर्च व मजदूरी की अधिकता के चलते धान की खेती में कम लागत के उपाय अपनाते रहे हैं. इसी के तहत वे स्वचालित धान रोपाई यंत्र यानी धान पैडी प्लांटर (जिसे उन्होंने केरल से 4 लाख, 10 हजार रुपए में मंगाया) से रोपाई का काम करते हैं. इस स्वचालित धान रोपाई मशीन के इस्तेमाल से बीजों की मात्रा में 30 फीसदी की कमी आई, वहीं लागत व समय में 70 फीसदी की कमी आई.

सीड ड्रिल व जीरो सीड ड्रिल : गेहूं की बोआई के लिए अरविंद ने सीड ड्रिल का इस्तेमाल कर के बीज, जुताई, उर्वरक व सिंचाई वगैरह की लागत में कमी लाने में सफलता पाई. जीरो सीड ड्रिल से गेहूं की बोआई में जहां खेत की जुताई नहीं करनी पड़ती, वहीं खाद, उर्वरक व बीज की मात्रा भी कम लगती है.

पोटैटो प्लांटर व पोटैटो डिगर : अरविंद ने आलू की बोआई पर आने वाली लागत में कमी लाने के लिए पोटैटो प्लांटर मशीन की खरीदारी कर के उस का इस्तेमाल करना शुरू किया, जिस में मात्र 3 लोगों की जरूरत पड़ती है. वहीं पोटैटो डिगर से आलू की खुदाई के नुकसान में 95 फीसदी तक की कमी आई.

दलहन बोआई मशीन : अरविंद ने दलहनी फसलों की लाइन से लाइन की बोआई के लिए स्वयं एक बोआई मशीन का निर्माण किया है, जो ट्रैक्टर के पीछे लगा कर चलाई जाती है. इस के द्वारा वे अरहर, मटर, चना, मसूर, मूंग वगैरह फसलों की बोआई करते हैं, जिस से फसल में बीज की मात्रा और जुताई, बोआई, सिंचाई वगैरह की लागत में 50 फीसदी तक की कमी लाने में सफल रहे हैं.

पावर ट्रिलर व पावर बीडर : सब्जियों व अन्य फसलों की निराईगुड़ाई के लिए अरविंद पावर ट्रिलर व पावर बीडर का इस्तेमाल करते हैं. इस से कम समय में अधिक रकबे में खेत की निराई व गुड़ाई हो जाती है.

लेजर लैंड लेवरर : जमीन को समतल बनाने के लिए उन्होंने तकरीबन 4 लाख रुपए की लागत से लेजर लैंड लेवरर की खरीदारी की. इस के द्वारा वे अपने ऊबड़खाबड़ खेतों को समतल बनाने में कामयाब रहे हैं. लेजर लैंड लेवरर के द्वारा वे खेत की सिंचाई में होने वाले पानी के खर्च व लागत में भी बचत करने में कामयाब रहे हैं.

मजदूरी में कमी, सिंचाई की लागत में कमी, खादबीज व उर्वरक की मात्रा में कमी लाने वाले यंत्रों के साथसाथ अरविंद तमाम आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल अपनी खेती में करते हैं, जिस से न केवल उन के उत्पादन में इजाफा हुआ है, बल्कि लागत में 50 फीसदी तक की कमी आई है. इन यंत्रों के अलावा उन के पास जैरोवेटर, पावर स्प्रेयर, ड्रम सीडर, बैट्री चालित स्प्रेयर व सोलर पंप वगैरह तमाम यंत्र हैं, जिन के द्वारा वे लगातार कृषि लागत में कमी लाने में कामयाबी हासिल करते जा रहे हैं.

मशीनरी बैंक से छोटे किसानों को सस्ते में मुहैया कराते हैं कृषि यंत्र : अरविंद सिंह खुद तो खेती में यंत्रीकरण (Mechanization) को बढ़ावा दे ही रहे हैं, इस के साथ ही वे छोटे व मझोले किसानों को भी खेती में यंत्रीकरण (Mechanization) अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं. इस के लिए उन्होंने कृषि विभाग के सहयोग से मशीनरी बैंक बनाया है, जहां से किसानों को समय से सस्ती दर पर ट्रैक्टर, जुताई यंत्र, स्प्रेयर, ट्रांसप्लांटर, ड्रम सीडर वगैरह मशीनें मिल जाती हैं. ऐसे में किसान समय से फसल की जुताई, बोआई, सिंचाई करने में सफल रहते हैं. फसल मड़ाई यंत्रों की वजह से दूसरे किसान भी मौसम से होने वाले नुकसान से बच जाते हैं.

Mechanization

व्यावसायिक खेती को बढ़ावा : अरविंद व्यावसायिक व नकदी फसलों की खेती करते हैं. उन का मानना है कि किसानों को ऐसी फसलों की खेती करनी चाहिए, जिन से लागत के मुकाबले 4 से 5 गुना ज्यादा लाभ हासिल हो. उन के अनुसार नकदी फसलों की मार्केटिंग में किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है, वहीं नकदी फसलों को कम समय में उगा कर 1 साल में कई फसलें ली जा सकती हैं.

नकदी फसलों की खेती में वे आलू, सुगंधित धान, मसालों व जड़ीबूटियों की खेती पर जोर देते हैं. इस से उन्हें अच्छी आमदनी हासिल होती है. बस्ती जिले में वे अकेले ऐसे किसान हैं, जो सोयाबीन की खेती करते हैं, इसलिए स्थानीय दुकानदारों द्वारा उन्हें अच्छा दाम मिल जाता है.

बागबानी फसलों से ज्यादा मुनाफा : वे नकदी फसलों के साथसाथ बागबानी फसलों की भी खेती करते हैं, जिन में केला व आम खास हैं. वे स्थानीय मंडी में इन फसलों को बेच कर ज्यादा लाभ कमा लेते हैं.

अरविंद ने खेती में तकनीकी व उन्नत जानकारी का इस्तेमाल कर के यह साबित कर दिया है कि खेती में घाटे का रोना रोने वाले किसान अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो न केवल खेती लाभ का सौदा साबित होगी, बल्कि इस से दूसरों को भी रोजगार मिलने में आसानी होगी.

जहां एक तरफ किसान दलहनी व तिलहनी फसलों से दूरी बना रहे हैं, वहीं अरविंद ने तिल, अरहर, मटर, चना, मसूर, सोयाबीन, मूंग, उड़द वगैरह फसलों की खेती कर के यह साबित कर दिया है कि हालात कैसे भी हों, अगर किसान फसलों को उगाने की ठान ले तो किसी तरह की फसल उगाना कठिन नहीं होता.

अरविंद सिंह धान की मामूली प्रजातियों से हट कर ऊंचे दामों पर बिकने वाली काला नमक जैसी प्रजातियों की खेती करते हैं. वे सुगंधित फसलों की भी खेती करते हैं. सभी सुगंधित फसलें कम समय व कम लागत में तैयार होती हैं, जिस से वे ज्यादा मुनाफा ले पाते हैं.

खेती में यंत्रीकरण (Mechanization) व तकनीकी जानकारी के लिए अरविंद सिंह के मोबाइल व वाट्सअप नंबर 9838669367 पर संपर्क किया जा सकता है.

Rotavator : अंतर्राष्ट्रीय तकनीक से बना टिलमेट रोटावेटर

Rotavator : खेत तैयार करने में मददगार रोटावेटर एक खास कृषि यंत्र है.  टिलमेट रोटावेटर (Rotavator) ट्रैक्टर चालित यंत्र है जो छोटे ट्रैक्टर से ले कर बड़े ट्रैक्टर तक के अनुसार बनाया जाता है और जिसे किसान अपनी सुविधानुसार खरीद सकता है.

यहां हम टिलमेट रोटावेटर (Rotavator) ब्रांड के बारे में कुछ खास जानकारी के बारे में बता रहे हैं.

यह रोटावेटर खेत की सूखी और गीली, कठोर हर तरह की जमीन में काम करता है और बिजाई के लिए खेत को जल्दी तैयार करता है. खेती में होने वाले खर्च में तकरीबन 35 फीसदी की कमी लाता है और समय में भी 60 फीसदी की कमी करता है.

खेत में पिछली फसल के बचे अवशेषों को, जड़ों को खेत में मिला कर उन से खाद बनाने का काम करता है. यह रोटावेटर गेहूं, धान, गन्ना, केला, कपास, और सब्जियों की खेती में बहुत लाभदायक है.

यंत्र की खासीयतें

कंपनी का कहना है कि इस में अच्छी गुणवत्ता वाले बोरोन स्टील के ब्लेड लगाए गए हैं.

विशेष तकनीक से तैयार हैवी ड्यूटी गियर बौक्स लगा है. गियर ड्राइव होने के कारण यह बहुत सरलता से लंबे समय तक चलता है.

ट्रेलिंग बोर्ड को एडजस्ट करने के लिए आटोमैटिक स्प्रिंग लगे हैं.

बेयरिंग पर लगी सील इसे नमी और कीचड़ से बचाती है.

Potato Digger : पोटैटो डिगर से करें आलुओं की खुदाई

Potato Digger : आलू की फसल तैयार होने के बाद आलू की खुदाई करने का काम भी काफी मशक्कत वाला होता है, क्योंकि खेतिहर मजदूरों की कमी हर तरफ हो रही है. अगर मजदूर मिलते भी हैं, तो उन में ज्यादातर अकुशल होते हैं. अकुशल मजदूर आलू की खुदाई ठीक से नहीं कर पाते, जिस से काफी आलू कट जाते हैं और मंडी में आलू की कीमत अच्छी नहीं मिलती .

इसी काम को अगर आलू खोदने वाली मशीन (Potato Digger) से किया जाए तो कम समय और कम खर्च में, अधिक जमीन से आलू की खुदाई कर सकते हैं. मशीन के द्वारा आलू खुदाई करने पर आलू साफसुथरा भी निकलता है. उस के बाद आने वाली फसल की बोआई भी समय पर कर सकते हैं. आलू खुदाई यंत्र को पोटैटो डिगर भी कहते हैं.

जब किसान को लगे कि आलू की फसल खुदाई करने लायक हो गई है, तो आलू के पौधों को ऊपर से काट दें या उस तैयार आलू फसल पर खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव कर दें, ताकि पौधों के पत्ते सूख जाएं और फसल खुदाई करने लायक हो जाए.

Potato Digger

आलू खुदाई यंत्र

केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा तैयार आलू खुदाई यंत्र (Potato Digger)  एक साथ 2 लाइनों की खुदाई करता है. यंत्र में 2 तवेदार फाल लगे होते हैं, जो मिट्टी को काटते हैं. इस में नीचे एक जालीदार यंत्र भी लगा होता हैं, जो मिट्टी में घुस कर आलू को मिट्टी के अंदर से निकाल कर बाहर करता है. इस के साथ ही इस यंत्र पर एक बेड लगा होता है, जिस पर आलू जाल के घेरे से निकल कर गिरते हैं. यह बेड लगातार हिलता रहता है. इस बेड के हिलने से मिट्टी के ढेले टूट कर गिरते रहते हैं और साफ आलू खेत में मिट्टी की सतह पर गिरते हुए निकलते हैं. इस के बाद मजदूरों की सहायता से आलुओं को बीन कर खेत में जगहजगह इकट्ठा कर लिया जाता है और आखिर में सभी ढेरों से आलू इकट्ठा कर के एक जगह बड़ा ढेर बना लिया जाता है.

संस्थान द्वारा निर्मित पोटैटो डिगर (Potato Digger) की कीमत तकरीबन 40,000 रुपए है, जिस पर सरकार द्वारा 25 फीसदी तक का अनुदान भी मिलता है. इस के बाद यह यंत्र मात्र 30,000 रुपए में पड़ता है. इस यंत्र को 35 हार्स पावर के ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है. 1 हेक्टेयर जमीन की आलू खुदाई में 3 घंटे का समय लगता है और 12 लीटर डीजल की खपत होती है. इस यंत्र की अधिक जानकारी के लिए आप केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, नवी बाग भोपाल से संपर्क कर सकते हैं या अपने नजदीकी कृषि विभाग से भी आलू खुदाई यंत्र के बारे में जानकारी ले सकते हैं. अनेक अन्य कृषि यंत्र निर्माता भी यह मशीन बना रहे हैं. इस बारे में अपने इलाके में पता किया जा सकता है.

प्रकाश पोटैटो डिगर

नवभारत इंडस्ट्रीज की प्रकाश आलू खुदाई मशीन (Potato Digger) भी भारत की श्रेष्ठ मशीन है.

यह मशीन सभी प्रकार के आलुओं की खुदाई के लिए उत्तम है. यह 1 बार में 2 मेड़ों की ही खुदाई करती है. इसे 35 एचपी या उस से अधिक शक्ति वाले ट्रैक्टर के साथ चलाया जाता है. मशीन में डबल जाल लगा होने के कारण आलू भी साफ निकलते हैं.

प्रकाश आलू खुदाई यंत्र के सभी कलपुर्जे सीएनसी द्वारा बने होने के कारण लंबे समय तक चलते हैं और मशीन पर उत्तम क्वालिटी का पेंट भी किया होता है.

यंत्र की कीमत तकरीबन 65,000 रुपए है. नवभारत इंडस्ट्रीज के प्रकाश ब्रांड के कृषि यंत्र आज कृषि के क्षेत्र में अच्छी पकड़ बना रहे हैं.

आप भी अगर इन के यंत्र खरीदना चाहते हैं, तो इन के मोबाइल नंबर 09897591803 या कंपनी के फोन नंबर 0562-4042153 पर बात कर सकते हैं.

Potato Digger

स्वान एग्रो का पोटैटो डिगर

स्वान एग्रो का भी पोटैटो डिगर बाजार में मौजूद है,  इस कंपनी से जुड़े सुनील राठी ने हमें बताया कि इस मशीन में 56 इंच और 42 इंच के बैड लगे होते हैं. इस से 2 लाइनों में आलुओं की खुदाई होती है. इस यंत्र को 45 एचपी के ट्रैक्टर से जोड़ कर चलाया जा सकता है. इस यंत्र की कीमत 85,000 रुपए है.

इस यंत्र के बारे में आप कंपनी के फोन नंबरों 91-161-2533186, 4346000-10 या सुनील राठी के मोबाइल नंबर 09050137100 पर फोन कर के जानकारी ले सकते हैं.

महेश एग्रो वर्क्स, झज्जर से महेश कुमार ने बताया कि यह पोटैटो डिगर उन के पास भी मौजूद है. वे ठेके पर भी आलू की खुदाई करते हैं.

अगर कोई उन से मशीन खरीदना चाहे या आलू खुदवाना चाहे तो उन के मोबाइल नंबरों 08901534610 या 9991534610 पर संपर्क कर सकता है.

आलू के पौधों पर मिट्टी चढ़ाने वाली मशीन

(डोरा या कुल्पा मशीन)

अगर आलू के पौधों पर मिट्टी चढ़ाने का समय है, तो इस काम को भी आप मशीन से कर सकते हैं.

इंदौर के श्री बजरंग मशीन शाप के ऋषभ चौहान ने बताया कि वे आलू की फसल पर मिट्टी चढ़ाने वाली मशीन पिछले कई सालों से बना रहे हैं, जिसे 6 हार्स पावर के जर्मन इंजन के साथ करीब 70,000 रुपए में बेचते हैं. इस कीमत में 35,000 रुपए तो इंजन की कीमत के ही शामिल हैं. बिना इंजन के यह मशीन 45,000 में मिलती है. कीमत में उतारचढ़ाव भी हो सकता है. इंजन में 1 घंटे में तकरीबन 3 लीटर तेल की खपत होती है. अधिक जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 08817073746 पर बात कर सकते हैं.

potato

ग्रेडिंग मशीन से करें आलू छंटाई

* आलुओं के अलगअलग साइजों की छंटाई कर के उन्हें अलग कर लें. बीज के लिए भी आलू अलग छांट लें. आलुओं को शुगर फ्री चैंबर में भंडारित करें. शुगर फ्री आलू का बाजार मूल्य अधिक मिलता है.

* आलुओं की छंटाई का काम आप ग्रेडिंग मशीन से भी कर सकते हैं. महावीर जांगड़ा ने एक ग्रेडिंग मशीन बनाई है, जो आलू के अलावा किन्नू व संतरा जैसे फलों की भी ग्रेडिंग करती है. गे्रडिंग मशीन की जानकारी के लिए महावीर जांगड़ा के मोबाइल नंबर 09896822103 पर भी संपर्क कर सकते हैं.

Reaper : डीजल इंजन और ट्रैक्टर से चलने वाले रीपर

Reaper : आज फसल कटाई के लिए अनेक तरह के कृषि यंत्र बाजार में मौजूद हैं, लेकिन रीपर यंत्र सब से ज्यादा प्रचलन में है, इस से गेहूं, धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, जई, दलहनी, तिलहनी आदि फसलों की कटाई बड़ी आसानी से की जाती है.

यह मशीन कुछ ही समय में कटाई का काम पूरा कर देती है और खड़ी फसल को उस की जड़ के पास से काटती है. रीपर (Reaper) मशीन के कई मौडल आते हैं. इस में एक स्वचालित यानी आटोमैटिक रीपर मशीन भी है. रीपर (Reaper) यंत्र को पावर टिलर के साथ भी चलाया जाता है और ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलने वाला भी फसल कटाई यंत्र आता है.

Reaper

वर्धमान मल्टीक्रौप पावर रीपर (मौडल ३स्नष्ठ)

वर्धमान पावर वीडर एक ऐसा कृषि यंत्र है जो लगभग 2 फुट से 9 फुट तक खड़ी फसल को काटने का काम करता है. यह फसल अनाज, दलहरी, तिलहनी, चारा फसल भी हो सकती है. जैसे गेहूं, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, जई आदि.

यह पावर वीडर 5 हौर्सपावर के डीजल इंजन द्वारा चालित है और 1 घंटे में 1 से 2 एकड़ फसल की कटाई कर सकता है. कटाई क्षमता फसल पर भी निर्भर है कि कुछ फसलें बहुत ही आसानी से कम समय में कट जाती है तो कुछ फसलों की कटाई में कुछ ज्यादा समय लगता है. फसल कटाई यह लगभग 4 इंच की ऊंचाई पर करता है.

इस रीपर के कटर बार की चौड़ाई 1.5 मीटर होती है. इस के कटिंग ब्लेड 4 लाइन में होते हैं और इस में लगे डीजल टैंक की क्षमता 5 लिटर है. फसल कटाई के समय डीजल की खपत 1 लिटर तक हो सकती है.

इस यंत्र का कुल वजन 210 किलोग्राम और यह फसल कटाई के समय 5 मिलीलिटर प्रति घंटे की गति तक चल सकता है. इस यंत्र की अनुमानित कीमत 1,30,000 रुपए तक हो सकती है.

इस यंत्र को चलाने के लिए केवल एक ही व्यक्ति की जरूरी होती है. फसल कटने के बाद एक तरफ कट कर गिरती जाती है, जिस के बाद में बंडल बना लिए जाते है.

Reaper

एग्रोमास्टर  रीपर बाइंडर क्चक्च 140

यह रीपर बाइंडर ट्रैक्टर द्वारा संचालित होता है और हाइड्रोलिक सिस्टम से काम करता है. और इसे ट्रैक्टर के साथ 3 जगह से जोड़ा जाता है जो बड़ी आसानी से जुड़ जाता है. यह एक बहुत ही उपयोगी और व्यावहारिक मशीन है, जिसे बहुत कम रखरखाव की आवश्यकता होती है. यह स्वचालित रीपर गेहूं, जौ, जई, राई जैसी फसलों की कटाई कर उन के बंडल बांधने का काम भी करता है .

हाइड्रोलिक द्वारा समायोजित की जाने वाली इस मशीन से कटिंग की ऊंचाई, स्प्रिंग की सहायता से, असमानता के अनुसार अपने स्तर को स्वचालित रूप से बनाए रखती है.

इस यंत्र को 35 से 45 हौर्सपावर के ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है.