हकृवि और प्राग के अनुबंध से मिलेगी मजबूती

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के बीच अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध को अगले 5 साल के लिए बढ़ाया गया. इस अनुबंध के अनुसार दोनों संस्थान शिक्षा व कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख अनुसंधानों में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेंगे.

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. बीआर कंबोज, जबकि चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग की ओर से प्रो. थामस सुब्रत अधिष्ठाता, फैकल्टी औफ इकोनोमिक्स एंड मैनेजमेंट ने इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.

इस अवसर पर चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के डा. यान हुको, डा. शेल्वी कोबजेव, इंजीनियर सुकुमार और विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी व वैज्ञानिक उपस्थित रहे.

दोनों विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को होगा फायदा

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि इस प्रकार के समझौता ज्ञापनों के तहत हम आपसी हित के क्षेत्रों की पहचान और सुदृढ़ कर रहे हैं. इस अनुबंध के पश्चात मिल कर अनुसंधान कार्य करने के अतिरिक्त दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के आदानप्रदान, वैज्ञानिक संगोष्ठियों व शैक्षणिक बैठकों में भाग लेने, शैक्षणिक सूचनाओं के लेनदेन आदि को बढ़ाया जाएगा.

इस एमओयू से हकृवि के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग की अनुसंधान व प्रौद्योगिकी को जानने व शिक्षा ग्रहण करने को बढ़ावा मिलेगा. इस अनुबंध के तहत दोनों विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपनी शोध को नई तकनीकों के साथ दोनों संस्थानों में निपुणता के साथ पूरा करने में एकदूसरे का सहयोग करेंगे, जिस से शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.

इंटरेक्शन मीट का आयोजन

विश्वविद्यालय की इंटरनेशनल अफेयर सेल ने चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज के विदेशी प्रतिनिधियों के साथ एक इंटरेक्शन मीट का आयोजन किया गया, जिस में यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के वैज्ञानिक डा. थामस सुब्रत, डा. यान हुको, डा. शेल्वी कोबजेव और इंजीनियर सुकुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों के साथ शोध और शैक्षणिक विषयों के बारे में चर्चा की. डा. थामस ने यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के विभिन्न पाठ्यक्रमों और शोध तकनीकियों के बारे में विस्तार से बताया.

उन्होंने भारतीय छात्रों को दी जाने वाली यूरोपीय संघ के इरास्मस मुंडस फेलोशिप के बारे में बताया. उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के माध्यम से छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सहयोग की दिशा में प्रोत्साहित किया. उन्होंने इन फेलोशिप द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता जैसे यात्रा भत्ते, अनुसंधान अनुदान और ट्यूशन छूट पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान की.

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के छात्र शैक्षणिक गुणवत्ता के क्षेत्र में प्राग विश्वविद्यालय में अपने अध्ययन को पूरा कर सकते हैं. ज्ञात रहे कि इस अनुबंध के अंतर्गत गत वर्षों में विश्वविद्यालय के 61 विद्यार्थी चेक यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं.

स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डा. केडी शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का स्वागत किया. अंतर्राष्ट्रीय मामलों की प्रभारी डा. आशा क्वात्रा ने उन का आभार व्यक्त किया और मीटिंग के उद्देश्य के बारे में संक्षेप में बताया. अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संयोजक डा. अनुज राणा ने यूनिवर्सिटी औफ लाइफ साइंसेज, प्राग के वैज्ञानिकों का परिचय करवाया. इस अवसर पर मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डा. मंजु महता, सयुंक्त निदेशक डा. जंयती टोकस, आईडीपी के लाइज़न अफसर डा. मुकेश सैनी व डा. गणेश भी उपस्थित रहे.

ड्रोन तकनीक खेती के लिए खास

हिसार : बदलते समय के साथसाथ अगर हमें कृषि क्षेत्र में कृषि क्रियाओं को समयानुसार क्रियान्वित करने से जुड़ी चुनौतियों व श्रमिकों की कमी को देखते हुए ड्रोन तकनीक को अपनाना होगा. इस तकनीक को अपनाने से कृषि लागत को कम करने के साथसाथ संसाधनों की भी बचत की जा सकती है.

यह विचार चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने व्यक्त किया. वे विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कृषि मेला (खरीफ) के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे.

मेले में विशिष्ट अतिथि के रूप में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई मौजूद रहे.

इस बार मेले का मुख्य विषय खेती में ड्रोन का महत्व है. मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने आह्वान किया कि किसान समुदाय को नईनई तकनीकों व प्रौद्योगिकियों के बारे में समयानुसार अपडेट करते रहना समय की मांग है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि खेती में ड्रोन तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है, क्योंकि आज के दौर में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण को संरक्षित रखना मुख्य चुनौतियां हैं. साथ ही, किसानों द्वारा फसलों में कीटनाशक दवाओं का अधिक प्रयोग करने से इनसान अनेक बीमारियों की चपेट में भी आ रहा है. हमें उपरोक्त चुनौतियों से निबटना है तो किसानों को ड्रोन तकनीक को अपनाना होगा, क्योंकि ड्रोन के द्वारा कम समय में जल विलय उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवारनाशक का छिडक़ाव समान तरीके से व सिफारिश के अनुसार आसानी से किया जा सकता है, जिस से कम लागत होने के साथसाथ संसाधनों की भी बचत होगी.

मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने कृषि मेला खरीफ में महिलाओं की अधिक भागीदारी पर खुशी जताई. साथ ही कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र के अंदर महिलाओं की भूमिका दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है.

प्रो. बीआर कंबोज ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे विभिन्न फसलों की उन्नत 44 किस्में अनुमोदित व विकसित कर किसान समुदाय को माली मजबूती देने का काम कर रहे हैं, जिस की बदौलत हमारा विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में अनूठी पहचान बना रहा है.

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा ईजाद की गई अधिक पैदावार देने वाली किस्म, जिन में सरसों की रोग प्रतिरोधी व पाले के प्रति सहनशील किस्म आरएच 725, गेहूं की अधिक उत्पादकता देने वाली किस्म डब्ल्यूएच 1270 का जिक्र करते हुए खरीफ फसलों में चारे वाली ज्वार की अधिक पैदावार देने वाली सीएसवी 53 एफ व एचजे 1514, बाजरे की जिंक व लौह तत्व से भरपूर बायोफोर्टीफाइड किस्म एचएचबी 299 व एचएचबी 311 एवं मूंग की एमएच 421 किस्म के बारे में भी बताया.

महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने बताया कि हरियाणा का किसान प्रगतिशील किसान है. अपने प्रयासों की बदौलत वह अन्य राज्यों के किसानों, प्रौद्योगिकियों व नवाचारों के मुकाबले में सब से आगे हैं. इसलिए किसान खाद्य सुरक्षा, खाद्य भंडारण, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण संरक्षण जैसी अनेक चुनौतियों का हल निकालने में अपनी अहम भूमिका अदा कर सकता है. तिलहनी व दलहनी फसलों की मांग के मुकाबले उत्पादन कम है, जिस के कारण आयात करना पड़ता है. इस मांग को पूरा करने के लिए हमें खरीफ एवं रबी सीजन के अलावा रबी सीजन के तुरंत बाद आने वाली गरमी के मौसम में एक कम अवधि वाली फसल ले कर खेती को लाभदायक बनाने के बारे में भी प्रेरित किया. हकृवि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में शिक्षा, विस्तार के क्षेत्र सराहनीय काम कर रहा है.

गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि फसलों की अधिक पैदावार लेने के लिए पर्यावरण का अनुकूल होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हमें फसलों के अवशेष जैसे धान की पराली को नहीं जलाना चाहिए, क्योंकि पराली जलाने से एक ओर भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है, वहीं दूसरी ओर मित्र कीट एवं लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं. यदि फसल के अवशेष जलाने के बजाय किसान उन्हें खेत में ही समायोजित करें, तो भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहेगी व पर्यावरण संरक्षण होगा.

मुख्यातिथि सहित अन्य अधिकारियों ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी को सराहा
कृषि मेला खरीफ में विश्वविद्यालय के समस्त महाविद्यालयों की ओर से विभिन्न विषयों पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी लगाई गई, जिस में विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में सहित आधुनिक तकनीकों व कृषि यंत्र शामिल रहे. मुख्यातिथि सहित अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया. साथ ही, वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों के प्रयासों को सराहा.drone-taknik2

इस प्रदर्शनी में कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए किसानवैज्ञानिक संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया, जिस में किसानों ने फसलों से संबंधित समस्याओं के हल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से जाने.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया. इस के अलावा उन्होंने 2 पुस्तकों का विमोचन करते हुए संबंधित विभागों के वैज्ञानिकों को बधाई दी.

कृषि मेला खरीफ में पहले दिन हरियाणा व अन्य राज्यों से तकरीबन 40 हजार किसानों ने भाग लिया. मंच का संचालन हरियाणा कला परिषद, हिसार मंडल के अतिरिक्त निदेशक रामनिवास शर्मा ने किया. मेले में उपस्थित किसानों के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया.

किसानों को दिया गया जैविक खेती (Organic Farming) पर प्रशिक्षण

उदयपुर: 29 फरवरी, 2024. प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में विषय विशेषज्ञों द्वारा जैविक खेती के संदर्भ में आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया. साथ ही, जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशियों आदि जैविक उत्पादों का किसानों द्वारा स्वयं अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के उपयोग से तैयार कर उपयोग करने के संबंध में सजीव प्रदर्शन के साथ जानकारी प्रदान की गई.

वर्तमान में कृषि में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, कवकनाशियों और दूसरे रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से इनसान, दूसरे जीवजंतुओं एवं मृदा स्वास्थ्य पर हानिकारक व विपरीत प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उक्त रसायनों के संतुलित उपयोग के साथ ही जिला सलूंबर में जैविक खेती के बेहतर विकल्प को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आदर्श किसान तैयार कर इन किसानों के जरीए जिले में दूसरे किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित कर के जैविक खेती में आदर्श और अग्रणी बनाए जाने की जरूरत को महसूस किया गया.

अतः उक्त अवधारणा को जिला कलक्टर, सलूंबर की पहल पर नवाचार कार्यकम के तौर पर ले कर क्रियान्वित करने के लिए जिले के प्रत्येक ब्लौक से 5-5 किसानों को चुना गया. किसानों को विश्वविद्यालय परिसर में ही केवल जैविक उत्पादों के उपयोग से बेहतरीन बढ़वार के साथ तैयार गेहूं, चना, मैथी आदि फसलों का मुआयना भी करवाया गया.

उक्त कार्यकम संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), गौस मोहम्मद, सलूंबर द्वारा क्रियान्वित एवं हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, जावर माइंस, अभिमन्यु सिंह (जनसंपर्क अधिकारी) के सहयोग से संपादित किया गया.
उक्त प्रशिक्षक में जिला कलक्टर जसमित सिंह संधु स्वयं प्रशिक्षण में उपस्थित हो कर विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों का अवलोकन किया और किसानों से गोष्ठी में सवांद स्थापित किया एवं जैविक खेती अपनाने पर बल दिया.

डा. आरए कौशिक, निदेशक प्रसार, शिक्षा निदेशालय, डा. आरएस राठौड़, समन्वयक कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र, पुरुषोत्तम लाल भट्ट, उपनिदेशक, उद्यान सलूंबर, अभिमन्यु सिंह, नेहा दिवान (सीएसआर) इत्यादि ने इस गोष्ठी में भाग लिया.

डा. रविकांत शर्मा, परियोजना प्रभारी, अखिल भारतीय नैटर्वक, श्रवण कुमार यादव एवं रवि जैन, जैविक अनुसंधान परियोजना इकाई का अवलोकन कराया व इस की उपयोगिता बताई.

भारत और सस्केचेवान के बीच कृषि व्यापार संबंध मजबूत होंगे

नई दिल्ली: कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के प्रधानमंत्री स्कौट मो के बीच कृषि भवन, नई दिल्ली में बैठक संपन्न हुई.

इस बैठक का एजेंडा दालों, पोटाश, कृषि प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान साझेदारी के सुसंगत और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत के साथ सस्केचेवान के बीच जारी व्यापार संबंधों के बारे में चर्चा करना था.

राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने भारत की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए भारत और सस्केचेवान के बीच व्यापार संबंधों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सस्केचेवान यूरेनियम, पोटाश, दालों, मटर, चना और अर्धरासायनिक लकड़ी के गूदे के उत्पादों और वस्तुओं का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है और भारत में दालों के आयात के सब से बड़े स्रोतों में से एक है.

उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, कृषि तकनीक और अपशिष्ट जल उपचार के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने पर जोर दिया. भारत और सस्केचेवान के बीच नियमित तकनीकी समूह की बैठकों के माध्यम से टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में जानकारी के आदानप्रदान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को मजबूत बनाने का प्रस्ताव रखा.

Agricultural Trade Relations

सस्केचेवान के प्रधानमंत्री स्कौट मो ने इस बात का उल्लेख किया कि भारतसस्केचेवान संबंध मजबूत हुए हैं और सस्केचेवान भागीदार देशों को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा हासिल करने में मदद कर रहा है.

उन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि खाद्य उत्पादन प्रणाली को आगे बढ़ाने, टिकाऊ कृषि, खाद्य उत्पादों, नवाचार को साझा करने और प्राकृतिक संसाधनों को विकसित करने के महत्व को भी रेखांकित किया.

इस के अलावा उन्होंने टिकाऊ कृषि, कैनोला और गेहूं जैसी फसलों के कार्बन फुटप्रिंट के बारे में तुलनात्मक विश्लेषण और बेंचमार्क अध्ययन के लिए ग्लोबल इंस्टीट्यूट फौर फूड सिक्योरिटी (जीआईएफएस) के महत्व पर जोर दिया और भारत के साथ प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई.

प्रधानमंत्री स्कौट मो ने तकनीकी समूह की बैठकों के माध्यम से भारत और सस्केचेवान के बीच सहयोग के क्षेत्रों, जानकारी के आदानप्रदान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बारे में चर्चा करने और संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति प्रकट की. दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को मजबूत बनाने के लिए चर्चा में निरंतरता और नियमित संवाद का समर्थन किया.

कृषि प्रौद्योगिकी में भारत का खास प्रदर्शन

नई दिल्ली: 6 दिसंबर 2023. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व सूरीनाम के विदेश मामले, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री अल्बर्ट आर. रामदीन के बीच पिछले दिनों कृषि भवन, नई दिल्ली में बैठक हुई. बैठक में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत ड्रोन और एग्रीस्टैक जैसी कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और हमें सूरीनाम के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करने में खुशी होगी.

उन्होंने सूरीनाम के मंत्री अल्बर्ट आर. रामदीन व उन के साथ आए प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इस बात पर प्रसन्नता जताई कि कृषि व संबद्ध क्षेत्रों पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक 15 नवंबर, 2023 को आयोजित की गई. यह देखना उत्साहजनक है कि हम वर्ष 2023 से 2027 की अवधि के लिए कार्ययोजना के कार्यान्वयन के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान शुरू किए “खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए डेक्कन उच्चस्तरीय सिद्धांत” और “मिलेटस (श्रीअन्न) और अन्य प्राचीन अनाज अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान पहल (महर्षि)” जैसे प्रयास खाद्य असुरक्षा, भूख और कुपोषण से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

उन्होंने सूरीनाम को महर्षि, जिस का सचिवालय भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद में स्थित है, का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि भारत सूरीनाम दुनिया में मिलेट्स (श्रीअन्न) को लोकप्रिय बनाने के लिए मिल कर काम कर सकते हैं.

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारतसूरीनाम द्विपक्षीय संबंध विकास की साझा आकांक्षाओं पर आधारित हैं और हमारे बीच एमओयू और लगातार उच्चस्तरीय बातचीत होती है. उन्होंने श्रीअन्न की खेती और आयुर्वेद के क्षेत्र में सूरीनाम के प्रयासों की सराहना की.

मंत्री अल्बर्ट आर. रामदीन ने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त करेगी. उन्होंने इस पर जोर दिया कि खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे निकट भविष्य में प्रमुख चिंता के रूप में उभरेंगे, दोनों देशों के पास इन क्षेत्रों में सहयोग करने की पर्याप्त गुंजाइश है.

सूरीनाम ने मिलेट्स की खेती के लिए परियोजना शुरू की गई है और महर्षि पहल का हिस्सा बनने में रुचि जताई. उन्होंने कहा कि दोनों देश प्रशिक्षण और अध्ययन दौरों, तकनीकी सहायता, जलवायु परिवर्तन से संबंधित क्षेत्रों में ज्ञान साझा करने, जर्मप्लाज्म विनिमय व खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. सूरीनाम आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित कर रहा है और औषधीय पौधे उगाने में भारत के सहयोग की आशा की.

किसान बदलाव को गले लगाएं, टैक्नोलौजी अपनाएं

जोधपुर/भोपाल/नई दिल्ली : 6 अक्तूबर, 2023. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर में किसानों व वैज्ञानिकों से संवाद किया. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम से वर्चुअल जुड़े, वहीं उपराष्ट्रपति की पत्नी डा. सुदेश धनखड़, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी व सांसद राजेंद्र गेहलोत विशेष रूप से उपस्थित थे.

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि किसानों के बिना देश में बदलाव संभव नहीं है. वे अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बदलाव किसानों को लाना है और उस के अनुरूप बदलना भी है.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कृषि उत्पाद आज सब से बड़ा व्यापार है. उन्होंने आह्वान किया कि युवाओं को कृषि व्यापार में लगाया जाए, जो किसानों का एरिया है, लेकिन इस पर उन का ध्यान केंद्रित नहीं हुआ. आज कई उच्च शिक्षित युवा उन कृषि उत्पादों का व्यापार कर रहे हैं, जो किसानों की कड़ी मेहनत से उपजते हैं. किसानों द्वारा कृषि उत्पादों के व्यापार को अपने दायरे में लेने पर बहुत बड़ा बदलाव आएगा.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि किसान परिवारों के लिए जरूरी है, वह है एक आर्थिक कारिडोर- भारत, मिडिल र्ईस्ट और यूरोप. हजारों साल पहले यह कारिडोर था, जिस की दोबारा शुरुआत हो रही है. किसान बदलाव को गले लगाएं, टैक्नोलौजी अपनाएं. किसान अपने उत्पादों को सीधे न दे कर उस में कुछ न कुछ वैल्यू एडिशन करें, तो इस से क्रांतिकारी बदलाव आएगा. यह आसान है, संभव भी है, क्योंकि सरकार की नीतियां सकारात्मक हैं व दूरगामी परिणाम देने वाली हैं. इस से किसानों की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर होगी. निर्यात के लिए भी किसानों के बेटेबेटियां आगे आएं, क्योंकि वे ही इसे पैदा करते हैं. दूर की सोच कर अपनी भागीदारी निभाएं. कृषि के साथ कृषि व्यापार एवं कृषि निर्यात भी किसानों द्वारा करने से बड़ा अवसर कोई हो नहीं सकता.

किसानों की कड़ी मेहनत के कारण आज शुष्क क्षेत्र में भी अनार, खजूर, अंजीर, जीरा जैसे उत्पाद उगाए जा रहे हैं, जिस का और ज्यादा फायदा किसानों को स्वयं व्यापार व निर्यात करने से मिलेगा.

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने स्तर पर किसानों के लिए हर सकारात्मक सहयोग का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने में हमारे किसानों का बहुत बड़ा योगदान होगा.

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र हमारे देश के लिए आज बहुत महत्वपूर्ण है. यह कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जैसे जल ही जीवन है, वैसे कृषि ही जीवन है.

उन्होंने आगे कहा कि काजरी संस्थान के कार्यों को देख कर गौरव का अनुभव होता है, जहां के वैज्ञानिकों ने इस पूरे रेतीले इलाके में कृषि क्षेत्र में खास काम किया है, वहीं आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने खाद्यान्न, बागबानी, पशुपालन व मत्स्यपालन की दृष्टि से जो बेहतर काम किया है, उस के कारण हमारा देश आज अग्रणी अवस्था में खड़ा हुआ है.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज हमारे सामने चुनौतियां भी हैं कि खेती में लागत कैसे कम करें, इस के लिए टैक्नोलौजी का उपयोग करें एवं स्वाइल हेल्थ कार्ड का उपयोग किसानों की आदत में आएं. सामूहिक रूप से पोषक तत्व, कीट प्रबंधन आदि से खेती की लागत कम होगी एवं फसलों की गुणवत्ता भी बढ़ेगी.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जैविक व प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता बनती जा रही है, जिसे बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने अनेक उपाय किए हैं, योजनाएं बनाई हैं, जिन्हें हमारे किसानों को अपनाना चाहिए और इस खेती को प्रोत्साहित करना चाहिए.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती हो रही है. श्री अन्न का उपयोग बढ़े, इस के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोया है, जैसेजैसे इस का उपभोग बढ़ेगा, तो मांग वृद्धि के साथ छोटे किसानों की उपयोगिता व इन की आय भी बढ़ेगी. इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान असरकारक हो रहा है, पूरी दूनिया के देश मिलेट्स मांग रहे हैं, जिस के लिए हिंदुस्तान के किसानों को उत्पादन भी बढ़ाना पड़ेगा, उन्हें इस दिशा में प्रवृत्त होना पड़ेगा.

कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने भी संबोधित किया. काजरी के निदेशक डा. ओपी यादव ने संस्थान की गतिविधियों एवं उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम में कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जोधपुर के निदेशक डा. जेएस मिश्रा, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के किसान, वैज्ञानिक व अधिकारी उपस्थित थे

उत्तर प्रदेश में कृषि कुंभ- 2.0 की तैयारियां शुरू

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में कृषि कुंभ का आयोजन किया गया था, जिस की देशभर में सराहना हुई. इसी प्रकार प्रदेश में कृषि कुंभ 2.0 को वैश्विक समारोह बनाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. यह आयोजन बीज बाजार तक और दुनियाभर में कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही तकनीक से ले कर नवाचार तक की जानकारी देने वाला होगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह विचार अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.0 की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान व्यक्त किया.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.0 में प्रदेश के प्रत्येक जनपद के साथसाथ देश के हर राज्य की भागीदारी कराई जानी चाहिए. हर राज्य में कृषि क्षेत्र में हो रहे बेस्ट प्रैक्टिस को यहां प्रदर्शित किया जाए. इस से हमारे किसान तकनीकी दृष्टि से और अधिक संपन्न हो सकेंगे.

उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.0 का आयोजन इस वर्ष दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में सम्भावित है, जिस का मुख्य कार्यक्रम भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में होगा. इस से पहले नई दिल्ली में कर्टेन रेजर इवेंट भी आयोजित किया जाएगा.

उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.0 में 2 लाख से अधिक किसानों की प्रतिभागिता कराई जाए. भारत सरकार के मंत्री, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कृषि व उस से जुड़े सैक्टरों की ख्यातिप्राप्त कंपनियों/ संस्थाओं, सभी कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, प्रगतिशील किसानों को आमंत्रित किया जाए.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन के वैश्विक स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि जापान, इजरायल, क्रोएशिया, पोलैंड, पेरु, जर्मनी, यूएसए, फिलीपींस, साउथ कोरिया, इंडोनेशिया जैसे देशों में खेतीकिसानी को ले कर अनेक अभिनव कार्य हो रहे हैं. यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 की तर्ज पर संबंधित देशों में भारतीय दूतावासों / उच्चायोग से संपर्क कर इन देशों को उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.0 में कंट्री पार्टनर के रूप में सहभागी बनाने के प्रयास किए जाएं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश कृषि कुंभ 2.,0 के विभिन्न आयामों के बारे में विमर्श करते हुए कहा कि सम्मेलन के दौरान गौ आधारित प्राकृतिक खेती, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने की तैयारियों, श्री अन्न के प्रोत्साहन, एफपीओ आधारित व्यवसाय, खेती की लागत को कम करने, पराली प्रबंधन के साथसाथ 01 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था बनने वाले राज्य में कृषि सैक्टर के योगदान को बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा कराई जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों/संस्थाओं द्वारा कृषि प्रदर्शनी, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, ड्रोन के उपयोग, औद्यानिक क्षेत्र की उपलब्धियों, गोवंश संरक्षण, रेशम उद्योग की प्रगति, एग्रो फौरेस्ट्री, फूलों की खेती कृषि उद्यमिता कृषि विविधीकरण एबी स्टार्टअप, डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे विषयों पर विचारविमर्श विशेषज्ञों के व्याख्यान, प्रदर्शनियां आदि आयोजित की जाएं.

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया गया कि बाजरा, ज्वार, महुआ, सांवा, कोदो, काकुन, कुटकी, चैना, कुट्टू और रामदाना जैसे स्वाद और पोषणयुक्त श्री अन्न (मिलेट्स) की विशिष्टताओं से परिचय कराने के लिए आगामी अक्तूबर माह में राज्य स्तरीय कार्यशाला लखनऊ में आयोजित की जाएगी.

उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में मिलेट्स के विभिन्न उत्पादों/पकवानों का प्रदर्शन किया जाएगा.

जनप्रतिनिधियों के साथसाथ होटल एसोसिएशन/शेफ, स्कूली बच्चों, एफपीओ इत्यादि को आमंत्रित किया जाएगा. मिलेट्स पर काम करने वाले एफपीओ, उद्यमियों, किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा.