बकरीपालन (Goat Rearing) केंद्र का लिया जायजा, 536 पशुओं का हो रहा पालन

विदिशा : भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने विदिशा प्रवास के दौरान शासकीय योजनाओं से लाभांवित होने वाले हितग्राही के इकाई यूनिट का भ्रमण कर जायजा लिया है. इस दौरान कलक्टर रोशन कुमार सिंह, एसडीएम क्षितिज शर्मा, तहसीलदार डा. अमित सिंह भी साथ मौजूद रहे.

संभागायुक्त संजीव सिंह ने ग्राम अमाछर में राष्ट्रीय पशुधन मिशन (उद्यमिता विकास) योजना से लाभांवित हितग्राही की इकाई का जायजा लिया. लाभांवित हितग्राही अवधेश यादव के द्वारा बकरीपालन इकाई के अंतर्गत 536 पशुओं का पालन किया जा रहा है. उन के द्वारा योजना के अंतर्गत शेड का निर्माण कराया जा चुका है और 500 से अधिक पशुओं का क्रय कर यूनिट का संचालन किया जा रहा है. पशु चिकित्सा विभाग द्वारा अनुदान की पहली किस्त प्रदाय की जा चुकी है.

उन्होंने हितग्राही से संवाद कर बकरीपालन यूनिट के संबंध में जानकारियां प्राप्त की, जिस में मुख्य रूप से बकरियों की देखभाल, चारा और बकरियां कहां से क्रय की गई के संबंध में पूछा है. इस दौरान पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उपसंचालक डा. एमके शुक्ला ने योजना के तहत स्वीकृत प्रोजेक्ट व बैंक द्वारा स्वीकृत लोन के संबंध में जानकारी दी है.

Dairy Farming: भारत की अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का है अहम योगदान

नई दिल्ली: मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने नई दिल्ली के मानेकशा सैंटर में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2024 मनाया गया. इस कार्यक्रम में भारत में श्वेत क्रांति के जनक डा. वर्गीज कुरियन की 103वीं जयंती मनाई गई. उन की विरासत का सम्मान करने के लिए नीति निर्माताओं, किसानों और उद्योग जगत के नेताओं एक मंच पर जुटे थे.

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में और राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल व जार्ज कुरियन सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे.

इस कार्यक्रम में देशभर से पशुधन और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया. समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और जार्ज कुरियन के साथ मिल कर 3 श्रेणियों में विजेताओं को राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान किए.

ये पुरस्कार हैं : स्वदेशी गाय/भैंस की नस्लों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन. पूर्वोत्तर क्षेत्र के विजेताओं को प्रत्येक श्रेणी में नए शुरू किए गए विशेष पुरस्कार भी दिए गए.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया. उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5 फीसदी का योगदान है और इस में 8 करोड़ से अधिक किसानों को सीधे रोजगार मिल रहा है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं.

दूग्ध उत्पादन के मामले में भारत पहले स्थान पर है, जो वैश्विक दूध उत्पादन में 24 फीसदी का योगदान देता है. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि साल 2022-23 में भारत की प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 459 ग्राम प्रतिदिन है, जो साल 2022 में विश्व औसत 323 ग्राम प्रतिदिन से काफी अधिक है.

उन्होंने कहा कि जैसेजैसे देशदुनिया की तीसरी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, इस में डेयरी क्षेत्र का योगदान भी बढ़ता जाएगा. उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि डेयरी क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र को संगठित क्षेत्र के अंतर्गत लाया जाना चाहिए, क्योंकि इस से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने सहकारी समिति के गुजरात मौडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक ऐसा उदाहरण है, जो बिचौलियों को कम कर के अच्छा काम कर रहा है. यह मौडल किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने में सक्षम है. उन्होंने डेयरी फार्मिंग में सैक्स सौर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों को शामिल करने और इस क्षेत्र में कवरेज को मौजूदा 35 फीसदी से बढ़ा कर 70 फीसदी से अधिक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

उन्होंने कहा कि पशुधन डेटा तैयार किया जा रहा है, नस्ल सुधार पर बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है. इस के साथ ही खुरपकामुंहपका रोग और ब्रुसेलोसिस के लिए नि:शुल्क टीके लगाए जा रहे हैं, ताकि साल 2030 तक इन रोगों को खत्म किया जा सके. इन सभी पहलों का उद्देश्य भारत को आने वाले दिनों में दूध निर्यातक बनाना है.

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने अपने संबोधन में भारत के डेयरी क्षेत्र की सफलता में महिलाओं और युवाओं के योगदान की सराहना की.

मंत्री प्रो. एसपी बघेल ने उन्हें इस उद्योग में नेतृत्व की भूमिका निभाने और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए नवीन प्रथाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने वैश्विक दूध उत्पादन में देश को शीर्ष पर बनाए रखने के लिए विभाग और सभी हितधारकों के प्रयासों की भी सराहना की.

उन्होंने उल्लेख किया कि दूध उत्पादन में सालाना वैश्विक वृद्धि दर 2 फीसदी है, जबकि भारत का उत्पादन सालाना 6 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. इस के अलावा उन्होंने प्रतिभागियों से कृत्रिम गर्भाधान (एआई) दर का कवरेज बढ़ाने, सैक्स-सौर्टेड वीर्य और आईवीएफ (इनविट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसी बेहतर प्रजनन तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया. उन्होंने नियमित टीकाकरण के माध्यम से खुरपकामुंहपका रोग के उन्मूलन पर जोर दिया, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी.

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जार्ज कुरियन ने भारतीय अर्थव्यवस्था में डेयरी सहकारी समितियों के योगदान और महिला सशक्तीकरण में उन की भूमिका की सराहना की. उन्होंने डेयरी मूल्य श्रंखला में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत बुनियादी ढांचे और पशु चिकित्सा सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.

पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) की सचिव अलका उपाध्याय ने वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से दूध उत्पादकता में सुधार के लिए विभाग के निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया. उन्होंने ग्रामीण डेयरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, बाजार संपर्क को बढ़ावा देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करने के महत्व पर बल दिया.

कार्यक्रम में उत्कृष्ट गायों की पहचान संबंधी ‘सुरभि श्रंखला’ मैनुअल के साथ बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी (बीएएचएस)-2024 जारी किया गया. पशुधन और डेयरी क्षेत्र के रुझानों के बारे में यह महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है. यह मैनुअल देश में राष्ट्रीय दुधारू झुंड की स्थापना के लिए है, जो हमारे किसानों के पास या गौशाला/गौसदन/पिंजरापोल में उपलब्ध श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म की पहचान और स्थान के लिए महत्वपूर्ण है.

इस से पहले समारोह के दौरान राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने मानेकशा सैंटर में अमूल स्वच्छ ईंधन रैली की अगुआनी की, जिस में अमूल के विभिन्न सदस्य संघों और भारत में जीसीएमएमएफ के 25 से अधिक शाखा कार्यालयों के 77 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए.

‘महिलाओं के नेतृत्व में पशुधन और डेयरी क्षेत्र’ और ‘स्थानीय पशु चिकित्सा सहायता के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना’ विषयों पर दो पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिस में विशेषज्ञों ने भारत के डेयरी तंत्र के सतत विकास के बारे में जानकारी साझा की.

इन चर्चाओं में क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में महिलाओं और स्थानीय पशु चिकित्सा पहलों की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला गया. इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव (मवेशी एवं डेयरी विकास) वर्षा जोशी और सलाहकार (सांख्यिकी) जगत हजारिका और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

तुअर और उड़द की खरीद के लिए 10.66 लाख किसान पंजीकृत

पिछले 3 महीनों में मंडी कीमतों में गिरावट के साथ तुअर और उड़द की खुदरा कीमतों में गिरावट आई है या वे स्थिर बनी हुई हैं. उपभोक्ता मामला विभाग दालों की मंडी और खुदरा कीमतों के रुझानों पर विचारविमर्श करने के लिए भारतीय खुदरा विक्रेता संघ (आरएआई) और संगठित खुदरा श्रंखलाओं के साथ नियमित बैठकें कर के यह सुनिश्चित करता है कि खुदरा विक्रेता खुदरा मार्जिन को उचित स्तर पर बनाए रखें.

खुदरा बाजार में सीधे हस्तक्षेप करने के लिए सरकार ने बफर स्टाक से दालों के एक हिस्से को भारत दाल ब्रांड के तहत उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर खुदरा बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया है. इसी तरह, भारत ब्रांड के तहत खुदरा उपभोक्ताओं को रियायती कीमतों पर आटा और चावल वितरित किया जाता है.

थोक बाजारों में उच्च मूल्य वाले उपभोक्ता केंद्रों और खुदरा दुकानों के माध्यम से कीमतों को कम करने के लिए बफर स्टाक से प्याज को एक संतुलित और लक्षित तरीके बाजार में उतारा जाता है. प्रमुख उपभोग केंद्रों में स्थिर खुदरा दुकानों और मोबाइल वैन के माध्यम से खुदरा उपभोक्ताओं के बीच प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से वितरित किया जाता है. इन उपायों से दालों, चावल, आटा और प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुएं उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराने और कीमतों को स्थिर करने में मदद मिली है.

घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए दालों का सुचारु और निर्बाध आयात सुनिश्चित करने के लिए तुअर और उड़द के आयात को 31 मार्च, 2025 तक ‘मुक्त श्रेणी’ में रखा गया है और मसूर के आयात पर 31 मार्च, 2025 तक कोई शुल्क नहीं लगाया गया है. इस के अतिरिक्त सरकार ने घरेलू बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 मार्च, 2025 तक देशी चना के शुल्क मुक्त आयात की भी अनुमति दी है. तुअर, उड़द और मसूर की स्थिर आयात नीति व्यवस्था देश में तुअर और उड़द की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में प्रभावी रही है, क्योंकि आयात का प्रवाह निरंतर बना हुआ है, जिस से दालों की उपलब्धता बनी हुई है और कीमतों में असामान्य वृद्धि पर अंकुश लगा है.

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने किसानों के जागरूकता अभियान, आउटरीच कार्यक्रम, बीज वितरण आदि के लिए एनसीसीएफ और नैफेड को सहायता प्रदान की. सरकार ने नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) और पीएम आशा योजना के मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) घटकों के तहत तुअर और उड़द की सुनिश्चित खरीद के लिए किसानों का पूर्व पंजीकरण लागू किया है. 22 नवंबर, 2024 तक एनसीसीएफ और नैफेड द्वारा कुल 10.66 लाख किसानों को पंजीकृत किया गया है.

खरीफ फसलों की स्थिति अच्छी है और मूंग, उड़द जैसी कम अवधि वाले फसलों की कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि तुअर की फसल की कटाई अभी शुरू ही हुई है. फसल के लिए मौसम भी अनुकूल रहा है, जिस से उपभोक्ताओं तक आपूर्ति श्रंखला में अच्छा प्रवाह बना हुआ है और दालों की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री और सार्वजनिक वितरण मंत्री बीएल वर्मा ने पिछले दिनों लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी.

नैनो डीएपी से मिल रही अधिक पैदावार

शिवपुरी : किसान कप्तान धाकड़ ने कृषि वैज्ञानिकों से फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए आवश्यक सलाह ली. सलाह लेने के उपरांत उन्होंने अपने खेत में होने वाली फसलों में नैनो डीएपी का उपयोग करना शुरू किया. परिणामस्वरूप, अब वे नैनो डीएपी के उपयोग से अच्छी पैदावार प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने किसानों को भी सलाह दी है कि वे भी नैनो डीएपी का उपयोग कर सकते हैं.

तहसील शिवपुरी के ग्राम पिपरसमां निवासी कप्तान धाकड़ ने बताया कि उन्होंने नैनो डीएपी का उपयोग बीजोपचार में किया. बीजोपचार के बाद उन्हें इस के अच्छे परिणाम प्राप्त हुए, तो उन्होंने दानेदार खाद्य की मात्रा कम कर दी, जिस से पौधे का अंकुरण सही ढंग से हुआ. अभी वर्तमान में भी वे अपने खेत में नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं, जिस से आज उन की फसल बिलकुल ठीक हुई है. जिस फसल में उन्होंने दानेदार का उपयोग नहीं किया और नैनो डीएपी का उपयोग किया, उस फसल में उन्हें अच्छा फायदा हुआ है. उन्होंने नैनो डीएपी का उपयोग टमाटर में भी किया. टमाटर में भी इस के अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं.

उन्होंने किसानों को यही सलाह दी है कि गेहूं, सोयाबीन, चना आदि के लिए नैनो डीएपी का ही उपयोग करें. क्योंकि इस के उपयोग से बीज में सही अंकुरण होता है. पौधा भी सही रूप से विकसित होता है.

डिजिटल कृषि मिशन के तहत राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली: भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने नई दिल्ली में डिजिटल कृषि मिशन के तहत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) को लागू करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया. सम्मेलन का उद्देश्य कृषि में डिजिटल प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने के लिए केंद्र व राज्य सहयोग की निरंतरता में डीपीआई के कार्यान्वयन पर चर्चा करना है, जो डिजिटल कृषि मिशन के घटकों जैसे एग्री स्टैक, कृषि डीएसएस, मृदा प्रोफाइल मानचित्रण और अन्य के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करता है, ताकि सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया जा सके और कृषि योजनाओं की दक्षता बढ़ाई जा सके.

देश के सभी हिस्सों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन में भाग लिया. यह किसान रजिस्ट्री को लागू करने, विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना निधि का लाभ उठाने और राज्य स्तरीय कार्यान्वयन के साथ राष्ट्रीय प्रयासों के तालमेल के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को संबोधित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच था.

सम्मेलन एक औपचारिक उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ, जहां सचिव (डीए एंड एफडब्ल्यू), देवेश चतुर्वेदी ने डिजिटल कृषि मिशन और विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिस में प्रौद्योगिकी सक्षमता के माध्यम से कृषि में क्रांति लाने के लिए सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया. इस के बाद भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने भूमि सुधारों, किसान रजिस्ट्री और इन सुधारों को लागू करने में राज्यों की भूमिका के बीच तालमेल पर चर्चा की.

किसान रजिस्ट्री कार्यान्वयन के लिए डिजिटल कृषि मिशन और एससीए के दिशानिर्देशों और किसान रजिस्ट्री हैंडबुक का अनावरण डिजिटल कृषि पहल की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भारत सरकार द्वारा राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता का संकेत देता है.

डिजिटल कृषि पहल जैसे किसान रजिस्ट्री कार्यान्वयन, डिजिटल फसल सर्वे आदि के बहुमुखी परिदृश्य पर सार्थक चर्चा के लिए इंटरैक्टिव सत्रों की एक श्रंखला बुलाई गई. इन चर्चाओं ने हितधारकों के लिए दृष्टिकोण, अंतर्दृष्टि और अनुभवों का आदानप्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में काम किया, जो किसान केंद्रित प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम के पोषण में राज्यों के मुद्दों और चुनौतियों पर प्रकाश डालता है. केंद्र और राज्यों ने मुद्दों पर चर्चा की, अपनी शंकाओं को स्पष्ट किया और केंद्र व राज्यों के बीच निर्बाध सहयोग को प्रोत्साहित करने वाले समाधानों पर चर्चा की.

इस सत्र में डा. प्रमोद कुमार मेहरदा, अतिरिक्‍त सचिव (डिजिटल), डीओए एंड एफडब्ल्यू ने किसान रजिस्ट्री कार्यान्वयन पर राज्यों को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और एससीए योजना निधि को लागू करने पर एक व्यावहारिक प्रस्तुति दी गई.

वर्षा जोशी, अतिरिक्त सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग ने लाइव स्टैक (पशुधन और पशुपालन क्षेत्र के लिए डीपीआई) को लागू करने के बारे में बात की, जबकि सागर मेहरा, संयुक्त सचिव (मत्स्यपालन) ने एक्वा स्टैक (मत्स्यपालन क्षेत्र के लिए डीपीआई) और मत्स्यपालन में एकीकृत डिजिटल समाधान के लिए एक दृष्टिकोण प्रदान किया.

दूसरे सत्र में राजीव चावला, मुख्य ज्ञान अधिकारी और सलाहकार, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने इस विषय से संबंधित प्रस्तुति दी.

पहली पैनल चर्चा कृषि स्टैक के हिस्से के रूप में राज्य किसान रजिस्ट्री कार्यान्वयन पर थी, जिस की अध्यक्षता देवेश चतुर्वेदी, सचिव (डीए एंड एफडब्ल्यू) ने की, जिस में वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य अधिकारियों की भागीदारी थी.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव डा. प्रमोद कुमार मेहरदा ने राज्यों के साथ दूसरी पैनल चर्चा की अध्यक्षता की. सत्र में किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वे और उन्नत सेवा वितरण, डेटा सटीकता और मौजूदा प्रणालियों में अंतराल को संबोधित करने के लिए रजिस्ट्रियों का समर्थन करने में चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की गई.

दूसरे सत्र में रुचिका गुप्ता, सलाहकार (डीए), कृषि विभाग द्वारा समर्थन रजिस्टरों को अपनाने पर एक संदर्भ सेटिंग शामिल थी.

तीसरी चर्चा सीकेओएंडए और सलाहकार (डीए) द्वारा लिए गए डिजिटल फसल सर्वे (डीसीएस) को लागू करने के मुद्दों पर केंद्रित थी. मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और राज्यों को समाधान प्रस्तुत किए गए.

यह कार्यक्रम एग्री स्टैक टैक्निकल टीम के नेतृत्व में तकनीकी चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ, जिस में कृषि मूल्य श्रंखला में डीपीआई को आगे बढ़ाने के लिए परिचालन विवरण और भविष्य के रोडमैप पर जोर दिया गया.

सम्मेलन ने न केवल डिजिटल प्रौद्योगिकियों की क्षमता पर गहन विचारविमर्श की सुविधा प्रदान की, बल्कि डिजिटल इंडिया मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को भी रेखांकित किया. रवि रंजन सिंह, निदेशक (डीए) ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

फास्फेटिक और पोटैशिक उर्वरकों (fertilizers) पर भी सब्सिडी मिलेगी

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी फसल सत्र 2024 (1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक) के लिए फास्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों (fertilizers)पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरें तय करने के उद्देश्य से रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस संबंध में रबी फसल सत्र 2024 के लिए अस्थायी बजटीय आवश्यकता लगभग 24,475.53 करोड़ रुपए होगी.

निर्णय से होने वाले लाभ

इस पहल से किसानों को रियायती, किफायती और उचित मूल्य पर उर्वरकों (fertilizers) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. उर्वरकों और निविष्टियों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में हालिया रुझानों को देखते हुए फास्फेटिक और पोटैशिक उर्वरकों पर सब्सिडी को तर्कसंगत बनाया जाएगा.

किसानों को सस्ती कीमतों पर इन उर्वरकों (fertilizers) की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लक्ष्य के साथ रबी सत्र 2024 के लिए अनुमोदित दरों (1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक लागू) के आधार पर फास्फेटिक और पोटैशिक उर्वरकों पर सब्सिडी दी जाएगी.

सरकार उर्वरक निर्माताओं/आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती दरों पर 28 ग्रेड के फास्फेटिक और पोटैशिक  उर्वरक उपलब्ध करा रही है. ऐसे पीएंडके उर्वरकों (fertilizers) पर सब्सिडी 1 अप्रैल, 2010 से पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना द्वारा नियंत्रित होती है. सरकार अपने किसान हितैषी दृष्टिकोण के अनुरूप देश के किसानों को किफायती मूल्यों पर पीएंडके उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

सरकार ने उर्वरकों (fertilizers) और निविष्टियों यानी यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में हालिया रुझानों को देखते हुए, रबी 2024 के लिए फास्फेटिक और पोटैशिक (पीएंडके) उर्वरकों (fertilizers) पर 1 अक्तूबर, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक प्रभावी पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना दरों को मंजूरी देने का फैसला किया है. उर्वरक कंपनियों को अनुमोदित और अधिसूचित दरों के अनुसार सब्सिडी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को सस्ते दामों पर उर्वरक उपलब्ध कराई जा सके.

मत्स्यपालन विभाग में विशेष अभियान

नई दिल्ली : मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) की पहल विशेष अभियान 4.0 की तैयारियों में है. 2 अक्तूबर से 31 अक्तूबर, 2024 तक चलाए जाने वाले इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना और सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों में कमी लाना है. विशेष अभियान 4.0 को 2 चरणों में चलाया जाएगा, जिन में 16 सितंबर से 30 सितंबर, 2024 तक प्रारंभिक चरण और 2 अक्तूबर से 31 अक्तूबर, 2024 तक कार्यान्वयन चरण शामिल है.

मत्स्यपालन विभाग स्वच्छता को बढ़ावा देने, लंबित संदर्भों के निबटान में तेजी लाने और अभिलेखों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित बनाने से संबंधित इस राष्ट्रव्यापी पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह अभियान कार्यालय में जगह के बेहतर प्रबंधन और परिचालन दक्षता के माध्यम से शासन में सुधार लाने के सरकार के व्यापक विजन के अनुरूप है.

विशेष अभियान 4.0 की तैयारी के लिए मत्स्यपालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने मत्स्यपालन विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सागर मेहरा और विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ एक तैयारी बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में विभागीय स्तर पर और साथ ही सभी फील्ड कार्यालयों/इकाइयों में अभियान के दौरान गतिविधियों और अभियान की योजना और क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया.

इस के अतिरिक्त मत्स्यपालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई), केंद्रीय मत्स्यपालन तटीय इंजीनियरिंग संस्थान (सीआईसीईएफ), राष्ट्रीय मत्स्यपालन पोस्टहार्वेस्ट प्रौद्योगिकी एवं प्रशिक्षण संस्थान (एनआईपीएचएटीटी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), केंद्रीय मत्स्य नौचालन एवं इंजीनियरी प्रशिक्षण संस्थान (सिफनेट), तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण (सीएए) सहित विभाग की क्षेत्रीय इकाइयों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में इन संस्थानों में विशेष अभियान के लिए चल रही तैयारियों का आकलन किया गया.

Fisheries

कार्यान्वयन चरण के दौरान विभाग लंबित संदर्भों के निबटान के लिए विशेष अभियान चलाएगा, जिस में निम्‍नलिखित पर विशेष ध्यान दिया जाएगा :

-मंत्रियों, संसद सदस्यों, राज्य सरकारों, अंतरमंत्रालयी संचार, पीएमओ संदर्भ, लोक शिकायत और संसदीय आश्वासनों से लंबित संदर्भों का निपटान.

-केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया मैनुअल (सीएसएमओपी) और सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अनुपालन में भौतिक फाइलों/अभिलेख की समीक्षा, अभिलेखन और छंटाई.

-कार्यालय में स्थान खाली करने के लिए अनुपयोगी स्टोर और कार्यालय उपकरणों को अलग करना और उन का निबटान करना, कार्यालय आवास और परिसरों में स्वच्छता को बढ़ावा देना, अव्यवस्था में कमी लाना और कामकाज के लिए सुव्‍यवस्थित और उपयोगी वातावरण सुनिश्चित करना.

अभियान की तैयारी के लिए सचिव (मत्स्यपालन) ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नई दिल्ली में कृषि भवन और चंद्रलोक भवन में विभाग के कार्यालयों का निरीक्षण किया. निरीक्षण में विभिन्न अनुभागों/इकाइयों में पुरानी फाइल/अभिलेख, अनुपयोगी स्टोर और पुरानी पत्रिकाओं/अख़बारों का ढेर पाया गया. अभिलेख प्रबंधन में सुधार और कार्यालय स्थान के कुशल उपयोग के लिए पुराने अभिलेख /फाइलों और स्टोर को समय पर अलग करने और निबटान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए.

विशेष अभियान 4.0 कार्यालय के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता और लंबित मामलों के त्वरित समाधान के माध्यम से शासन में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है. मत्स्यपालन विभाग स्वच्छता को अपनी संगठनात्मक संस्कृति का स्थायी हिस्सा बनाने के लिए है और एक स्वच्छ और अधिक कुशल कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होना जारी रखेगा.

राष्ट्रीय मत्स्य विकास कार्यक्रम पोर्टल का शुभारंभ

नई दिल्ली: केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की चौथी वर्षगांठ पर मत्स्यपालन के क्षेत्र में बदलाव लाने और भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई पहलों और परियोजनाओं का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जौर्ज कुरियन भी उपस्थित थे. मत्स्यपालन विभाग के सचिव डा. अभिलक्ष लिखी, संयुक्त सचिव (आईएफ) सागर मेहरा और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्यपालन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और फ्रांस, रूस, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, नार्वे और चिली के दूतावासों के प्रतिनिधिमंडल ने इस कार्यक्रम में भाग लिया.

मत्स्यपालन विभाग (भारत सरकार), राष्ट्रीय मत्स्यपालन विकास बोर्ड, आईसीएआर संस्थानों और संबद्ध विभागों और मंत्रालयों के अधिकारियों, पीएमएमएसवाई लाभार्थियों, मछुआरों, मछली किसानों, एफएफपीओ, उद्यमियों, स्टार्टअप, कौमन सर्विस सैंटर (सीएससी) और देशभर के अन्य प्रमुख हितधारकों ने हाइब्रिड मोड में इस कार्यक्रम में भाग लिया.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इस अवसर पर एनएफडीपी (राष्ट्रीय मत्स्य विकास कार्यक्रम) पोर्टल लौंच किया, जो मत्स्यपालन के हितधारकों की रजिस्ट्री, सूचना, सेवाओं और मत्स्यपालन से संबंधित सहायता के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा.

उन्होंने पीएम-एमकेएसएसवाई परिचालन दिशानिर्देश भी जारी किए. एनएफडीपी को प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सहयोजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत बनाया गया है, जो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत एक उपयोजना है. इस योजना से देशभर में मत्स्यपालन में लगे मछली श्रमिकों और उद्यमों की एक रजिस्ट्री बना कर विभिन्न हितधारकों को डिजिटल पहचान मिलेगी. एनएफडीपी के माध्यम से संस्थागत ऋण, प्रदर्शन अनुदान, जलीय कृषि बीमा आदि जैसे विभिन्न लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं.

मंत्री राजीव रंजन सिंह ने एनएफडीपी पर पंजीकृत लाभार्थियों को पंजीकरण प्रमाणपत्र वितरित किए, जिन में अंकुश प्रकाश थली, रायगढ़, महाराष्ट्र, घनश्याम और प्रसन्न कुमार जेना, पुरी, ओडिशा, प्रदीप कुमार, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश, सुखपाल सिंह, फाजिल्का, पंजाब, रंजन कुमार मोहंती, बालासोर, ओडिशा, आनंद मैथ्यू, पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय, रजनीश कुमार, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, कोक्किलिगड्डा गुंटूर, आंध्र प्रदेश, मीरा देवी, मुंगेर, बिहार, राजेश मंडल, बांका, बिहार, ग्याति रिन्यो, लोअर सुबनसिरी, अरुणाचल प्रदेश, बयाना सतीश, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश, हरेंद्र नाथ रबा, तामुलपुर, असम और अभिलाष केसी, अलाप्पुझा, केरल शामिल थे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मत्स्यपालन क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टरों पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की. उन्होंने मोती की खेती, सजावटी मत्स्यपालन और समुद्री शैवाल की खेती के लिए समर्पित 3 विशेष मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टरों की स्थापना की घोषणा की. इन क्लस्टरों का उद्देश्य इन विशिष्ट क्षेत्रों में सामूहिकता, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिस से उत्पादन और बाजार पहुंच दोनों में वृद्धि होगी.

उन्होंने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 तटीय गांवों को जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांवों (सीआरसीएफवी) में विकसित करने के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए. इस के लिए 200 करोड़ रुपए किए गए हैं. यह पहल बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए खाद्य सुरक्षा और सामाजिकआर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के साथसाथ बुनियादी ढांचे में सुधार और जलवायु स्मार्ट आजीविका पर ध्यान केंद्रित करेगी.

केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) द्वारा मछली परिवहन के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग पर एक पायलट परियोजना का भी अनावरण किया गया. यह मत्स्यपालन में प्रौद्योगिकी को शामिल करने की दिशा में एक कदम है. इस अध्ययन का उद्देश्य अंतर्देशीय मत्स्यपालन की निगरानी और प्रबंधन में ड्रोन की क्षमता का पता लगाना, दक्षता और स्थिरता में सुधार करना है.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री शैवाल की खेती और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) के मंडपम क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए अधिसूचनाओं का अनावरण किया. उत्कृष्टता केंद्र समुद्री शैवाल की खेती में नवाचार और विकास के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में काम करेगा, जो खेती की तकनीकों को परिष्कृत करने, बीज बैंक की स्थापना और नई प्रणालियों को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.

इस के अलावा माली रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों के आनुवंशिक संवर्द्धन के माध्यम से बीज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए समुद्री और अंतर्देशीय दोनों प्रजातियों के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग सैंटर की स्थापना का भी अनावरण किया गया.

मत्स्य विभाग, भारत सरकार ने ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित आईसीएआर-केंद्रीय मीठा जल जलीय कृषि संस्थान (आईसीएआर-सीआईएफए) को मीठे पानी की प्रजातियों के लिए एनबीसी की स्थापना के लिए नोडल संस्थान और तमिलनाडु के मंडपम में स्थित आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) के क्षेत्रीय केंद्र को समुद्री मछली प्रजातियों पर केंद्रित एनबीसी के लिए नोडल संस्थान के रूप में नामित किया है. लगभग 100 मत्स्यपालन स्टार्टअप, सहकारी समितियों, एफपीओ और एसएचजी को बढ़ावा देने के लिए 3 इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना को भी अधिसूचित किया गया.

यह केंद्र हैदराबाद में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज), मुंबई में आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई) और कोच्चि में आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईएफटी) जैसे प्रमुख संस्थानों में स्थापित किए जाएंगे.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने ‘स्वदेशी प्रजातियों को बढ़ावा देने’ और ‘राज्य मछली के संरक्षण’ पर पुस्तिका का विमोचन किया. 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 ने या तो राज्य मछली को अपनाया है या घोषित किया है, वहीं 3 राज्यों ने राज्य जलीय पशु घोषित किया है और केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह ने अपने राज्य पशु घोषित किए हैं, जो समुद्री प्रजातियां हैं.

721.63 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली प्राथमिकता परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिस में समग्र जलीय कृषि विकास का समर्थन करने के लिए असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड राज्यों में 5 एकीकृत एक्वा पार्कों का विकास, बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए अरुणाचल प्रदेश और असम राज्यों में 2 विश्व स्तरीय मछली बाजारों की स्थापना, कटाई के बाद प्रबंधन में सुधार के लिए गुजरात, पुडुचेरी और दमन और दीव राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 3 स्मार्ट और एकीकृत मछली पकड़ने के बंदरगाहों का विकास, और जलीय कृषि और एकीकृत मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, पंजाब राज्यों में 800 हेक्टेयर खारे क्षेत्र और एकीकृत मछलीपालन शामिल हैं.

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पीएमएमएसवाई योजना के परिवर्तनकारी प्रभाव पर जोर दिया, जो भारत के मत्स्यपालन क्षेत्र में अब तक का सब से बड़ा निवेश है. उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अब तक मत्स्यपालन के क्षेत्र में प्राप्त परिणाम पहले के बुनियादी ढांचे के विकास का परिणाम हैं, इसलिए हमें विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ना होगा.

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने जोर दे कर कहा कि सरकार 3 करोड़ मत्स्य हितधारकों के विकास और कल्याण की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सामाजिकआर्थिक कल्याण के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना (जीएआईएस), और पोत संचार और सहायता प्रणाली के लिए मछली पकड़ने वाले जहाजों पर ट्रांसपोंडर, क्षेत्र के औपचारिकीकरण और क्षेत्र में समान विकास के लिए एनएफडीपी, निर्यात के लिए मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने जैसी विभिन्न पहल विभाग द्वारा की गई हैं.

मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य विभागों को आगे आ कर आवंटित पैसों का उपयोग करने, एनएफडीपी पर मछली श्रमिकों के पंजीकरण आदि के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता भी व्यक्त की.
वहीं जौर्ज कुरियन ने क्षेत्रीय अंतराल को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उपलब्धियों की सराहना की और बुनियादी ढांचे व प्रजाति विविधीकरण परियोजनाओं सहित प्रमुख पहलों को रेखांकित किया. उन्होंने इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की और इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की.

डा. अभिलक्ष लिखी ने भारत के मत्स्यपालन क्षेत्र में बदलाव लाने में पिछले 4 सालों में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला. उन्होंने स्मार्ट और एकीकृत मछली पकड़ने के बंदरगाहों, ड्रोन प्रौद्योगिकियों के उपयोग, एनएफडीपी, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार आदि जैसी नई पहलों पर जोर दिया, जो हमें मत्स्यपालन के क्षेत्र को और आगे बढ़ाने में मदद करेंगी.

सागर मेहरा ने सभा का स्वागत किया और कार्यक्रम के लिए संदर्भ निर्धारित करते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) से भारत के मत्स्यपालन क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास और स्थिरता आई है. मई, 2020 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य मछली उत्पादन, इस के बाद के बुनियादी ढांचे, पता लगाने की क्षमता और सभी मछुआरों के कल्याण में कमियों को दूर करना है.

पीएमएमएसवाई योजना मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र में 20,050 करोड़ रुपए का अब तक का सब से बड़ा निवेश है. पिछले कुछ वर्षों में, पीएमएमएसवाई मत्स्यपालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए विकसित और विस्तारित हुई है.

30 अगस्त, 2024 को पालघर (महाराष्ट्र) में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई पोत संचार और सहायता प्रणाली मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मत्स्यपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है. मछली पकड़ने वाले जहाजों पर 364 करोड़ रुपए की लागत से एक लाख ट्रांसपोंडर निःशुल्क लगाए जाएंगे, ताकि वे दोतरफा संचार कर सकें, संभावित मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों के बारे में जानकारी प्रदान कर सकें, जिस से प्रयासों और संसाधनों की बचत हो सके और किसी भी आपात स्थिति में और चक्रवात के दौरान मछुआरों को सचेत किया जा सके. यह तकनीक मछुआरों को समुद्र में रहते हुए उन के परिवारों और मत्स्य विभाग के अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ रखेगी.

इस कार्यक्रम में मत्स्यपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया गया और इस के परिणामस्वरूप आजीविका के अवसरों में वृद्धि हुई और “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप सतत विकास हुआ.

पशुपालन पर औनलाइन संगोष्ठी

हिसार : लाला लाजपत राय विश्वविद्यालय, पशु चिकित्सा और पशुपालन विज्ञान (लुवास), हिसार, हरियाणा ने भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी, हैदराबाद के सहयोग से “पशु चिकित्सा और डेयरी विज्ञान में उद्यमिता विकास” पर एक औनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को लुवास के टैक्नोलौजी इनक्यूबेशन सैंटर और इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल के साथसाथ नार्म के एग्रीकल्चर में उद्यमिता के विकास एसोसिएशन ने समर्थन प्रदान किया.

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. गुलशन नारंग ने पशु चिकित्सा व्यवसायी की नवोन्मेषक और उद्योग अनुभवी के रूप में परिवर्तनीय संभावनाओं को उजागर किया. उन के भाषण ने पशु चिकित्सा और डेयरी उद्योगों की बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्यमिता की सोच की आवश्यकता को सुदृढ़ किया.

भाकृअनुप-नार्म निदेशक डा. चिरुकमल्ली श्रीनिवास राव और टैक्नोलौजी इनक्यूबेशन सैंटर के अध्यक्ष एवं मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशक डा. राजेश खुराना ने भविष्य के पशु चिकित्सा व्यवसायियों में उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया. उन के नेतृत्व और दृष्टिकोण ने भारतीय दुग्ध व्यवसाय और पशु चिकित्सा उद्यमिता की दिशा को आकार दिया है.

अतिरिक्त सीईओ, ए-आईडिया डा. विजय अविनाशिलिंगम और प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं प्रमुख, मानव संसाधन प्रबंधन डा. बी. गणेश कुमार द्वारा दिए गए योगदानों के साथसाथ सफल उद्यमियों की अंतर्दृष्टियों ने पशु चिकित्सा और डेयरी क्षेत्रों में उद्यमों को बनाने और बढ़ाने के लिए व्यावहारिकरण नीतियां प्रदान की.

यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा, जिस में लुवास के छात्रों को इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार के लिए उद्यमिता को एक उत्प्रेरक के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. संगोष्ठी ने यह स्पष्ट किया कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण समाधानों को बनाने के बारे में है, जो पशु कल्याण को बढ़ाते हैं, संचालन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करते हैं और सतत विकास में योगदान करते है.

यह संगोष्ठी लुवास के छात्रों को नवाचार में नेतृत्व करने और पशु चिकित्सा और डेयरी विज्ञान में सतत विकास को प्रेरित करने के लिए आवश्यक उपकरण और प्रेरणा प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है.

उद्यमिता (Entrepreneurship) के माध्यम से देश बनेगा सशक्त

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय स्थित कृषि महाविद्यालय के सभागार में विश्व उद्यमी दिवस के अवसर पर छात्र कल्याण निदेशालय द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन किया गया. ‘भारत @-2047 समृद्ध एवं महान भारत’ विषय पर आयोजित इस गोष्ठी में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि मुख्य वक्ता के तौर पर प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ सतीश कुमार उपस्थित रहे.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा कि उद्यमिता के माध्यम से हम देश को सशक्त व महान बना सकते हैं. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र की प्रगति एवं समृद्धि के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम करें, ताकि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जा सके. समृद्ध एवं महान भारत बनाने के लिए युवाओं को दृढ़ संकल्प के साथ दिनरात मेहनत करनी होगी.

उन्होंने युवाओं को मार्गदर्शक की भूमिका निभाने के लिए आगे आने का भी आह्वान किया. विद्यार्थियों को उच्च आदर्शों एवं संस्कारों से परिपूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए देश में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की कोई कमीं नहीं है. सभी व्यक्तियों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकती हैं, इसलिए स्वावलंबी भारत अभियान के तहत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और समृद्ध एवं खुशहाल भारत के निमार्ण के लिए ग्रामीण स्तर पर लघु औद्योगिक इकाइयां स्थापित करनी होंगी. किसानों की माली स्थिति को मजबूत करने के लिए गेहूं को गेहूं के तौर पर नहीं, बल्कि इस के उत्पाद बना कर बेचने होंगे. विकसित भारत के लिए आर्थिक समृद्धि भी अत्यंत महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना भी विकसित भारत की महत्वपूर्ण चुनौती है. उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है. इस के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम और पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है. कार्यक्रम में कुलपति व मुख्य वक्ता ने एक पुस्तक का विमोचन किया और कृषि महाविद्यालय के परिसर में पौधारोपण भी किया.

भारत को महान बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्य वक्ता सतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि समृद्ध एवं महान भारत बनाने के लिए स्वावलंबी भारत अभियान योजनबद्ध ढंग से समूचे देश में चलाया जा रहा है. युवा पीढ़ी को विकसित भारत बनाने के लिए काम करना होगा. इस के लिए उन्होंने 8 स्तंभ का भी उल्लेख किया, जिन में वाइब्रेंट डेमोक्रेसी, पूर्ण रोजगारयुक्त भारत, वैश्विक सर्वोच्च अर्थव्यवस्था, अभेद सुरक्षा तंत्र वाला भारत, विज्ञान एवं तकनीकी में अग्रणी भारत, पर्यावरण हितैषी भारत, विश्व बंधुत्व वाला भारत व उच्च जीवन मूल्यों से युक्त भारत शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए पहली बार कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय का भी गठन किया गया है. उद्यमिता की ओर राष्ट्र तीव्र गति के साथ आगे बढ़ रहा है. उद्यमिता के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत सफलता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है, बल्कि इस से समाज में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं.

एचएयू की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को उद्यमी बनाने में लगातार प्रशिक्षण प्रदान करने का अग्रणी काम कर रहा है.

हकृवि के रिटायर्ड प्रोफेसर डा. वीपी लोहाच ने बताया कि स्वावलंबी भारत अभियान के 4 पिलर बताए, जिन में स्वदेशी, विकेंद्रीकरण, उद्यमिता और सहकारिता शामिल है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप पूनियां ने अपने संबोधन में कहा कि वे संकल्प ले कर जाएं कि नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनूंगा.

छात्र कल्याण निदेशक डा. मदन खीचड़ ने गोष्ठी में आए हुए सभी लोगों का स्वागत किया और कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसके पाहुजा ने धन्यवाद किया. मंच का संचालन छात्रा अन्नु ने किया. इस अवसर पर सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, शिक्षक, गैरशिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे.