उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के सदर ब्लौक क्षेत्र के चितरगढ़िया गांव के प्रगतिशील किसान राम पूरन चौधरी ने इंटिग्रेटेड फार्मिंग (Integrated Farming) के जरीए छोटे व मझोले किसानों के लिए खेती की वह नजीर पेश की है जो खेती को घाटे से उबार कर मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. 8 साल पहले तक करीब 7 एकड़ जमीन में खेती करने वाले किसान राम पूरन चौधरी लगातार खेती के घाटे से दोचार हो रहे थे. वे जितनी लागत लगाते उतना उत्पादन मिल पाना नामुकिन हो जा रहा था. इसी दौरान एक ट्रेनिंग कार्यक्रम में उन्हें इंटिग्रेटेड फार्मिंग के बारे में पता चला जिस में फसलों को उगाने के साथसाथ एकदूसरे पर निर्भर बागबानी व पशुपालन जैसे अन्य व्यवसायों को अपनाने की सलाह दी गई.
लीज के तालाब से मछलीपालन
ट्रेनिंग से वापस आने के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि वे नए सिरे से इंटिग्रेटेड फार्मिंग को अपना कर खेती करेंगे. उन्होंने ट्रेनिंग में बताई गई विधि के अनुसार सब से पहले अपने गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर एक एकड़ तालाब लीज पर ली और उस में पंगेसियस, पापलेट, इंडियन मेजरकार्प, कौमन कौर्प्स, सिल्वर कौर्प्स व ब्रास कौर्प्स प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया. वे मछलियों के ऊपर आने वाले आहार के खर्चे को कम करने के लिए आसपास के पोल्ट्रीफार्म से बहुत ही सस्ते में मुरगी के बीट खरीदते हैं और उस का इस्तेमाल वे मछलियों के चारे के लिए करते हैं. इस से वे मछलियों के चारे पर आने वाले खर्च में कमी लाने में कामयाब रहे हैं.
किसान राम पूरन चौधरी ने बताया कि वे एक एकड़ खेत में पंगेशियस यानी बेकरी प्रजाति की मछली के पालन में दवा चूना, पानी भरना, मछली के बच्चे, नर्सरी से मछली के बच्चों की दूसरे तालाब में शिफ्टिंग, मोटर, बोरिंग, दाने, मजदूरी, बिजली के बिल पर लगभग 61,3200 रुपए का खर्च आता है जिस से लगभग 105 क्विंटल मछली का उत्पादन मिलता है. वे 25 क्विंटल मछली 10,000 रुपए क्विंटल के भाव से बेच कर ढाई लाख रुपए व 80 क्विंटल मछली को 13,000 रुपए क्विंटल के भाव से बेच कर 10 लाख, 40,000 रुपए की आमदनी प्राप्त करते हैं.
इस तरह उन्हें एक एकड़ खेत से कुल 12 लाख, 90,000 रुपए की आमदनी होती है. इस में से अगर लागत 6 लाख, 13,200 रुपए लागत को अलग कर दिया जाए तो भी इन्हें एक एकड़ से 6 लाख, 76,800 रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है.
पशुपालन से खर्च में आई कमी
किसान राम पूरन चौधरी का कहना है कि अगर किसान एकीकृत खेती प्रणाली के तहत खेती और पशुपालन एक साथ करें तो लागत में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है, क्योंकि पशुओं का गोबर जहां खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, वहीं फसल अवशेषों को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर इस का समन्वित उपयोग कर लागत को कम कर अधिक लाभ लिया जा सकता है. इंटिग्रेटेड फार्मिंग में एकदूसरे के ऊपर फसल, पशुपालन व बागबानी की निर्भरता होती है.
किसान राम पूरन चौधरी इसी मौडल पर पशुपालन का काम कर रहे हैं. उन्होंने खेती में जैविक कंपोस्ट खाद के निर्माण के लिए पशुपालन का व्यवसाय भी शुरू किया है. इस के लिए उन के द्वारा 4 गायों और 3 भैंसों के डेयरी शुरू की गई.
इस डेयरी के शुरू करने से उन्हें भरपूर मात्रा में दूध के साथसाथ खेती के लिए गोबर की उपलब्धता हो गई जिस का उपयोग वे कंपोस्ट खाद के निर्माण के लिए करते हैं और इसी कंपोस्ट खाद का उपयोग अपनी खेती में फसल उगाने के लिए करते हैं.
उन्हें अपने दुधारू पशुओं के चारे पर अधिक खर्च इसलिए नहीं करना पड़ता क्योंकि उन के द्वारा उगाई जाने वाली फसलों से हरे सूखे चारे के साथ ही दानों और खली की पूर्ति हो जाती है. इस से पशुओं के चारे की आवश्यकता पूरी हो जाती है. वे पशुपालन के जरीए साल में करीब एक से डेढ़ लाख रुपए की शुद्ध आमदनी प्राप्त कर लेते हैं.

कई तरह की फसलों की खेती
राम पूरन द्वारा खेती से कई तरह की फसलें ली जाती हैं, जिस में धान, गेहूं, चना, अरहर, सरसों, मसूर, बरसीम, अलसी, मटर, लहसुन, प्याज और कई तरह की सब्जियों की खेती शामिल है. वे मिश्रित खेती के जरीए खेती में मौसम की मार और जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल रहे हैं.
आधुनिक कृषि यंत्रों से खेती आसान
इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए जरूरी कृषि यंत्रों का होना काम को न केवल आसान बनाता है बल्कि धन, श्रम और समय की भी बचत होती है. उन्होंने कृषि विभाग से अनुदान से ट्रैक्टर और फसल बोआई से ले कर हर तरह के यंत्रों की उपलब्धता कर ली है, जिस के जरीए वे खेती के साथसाथ खेती से जुड़े दूसरे काम भी निबटाते हैं.
रंगीन सब्जियों से होती है बंपर कमाई
जहां इंटिग्रेटेड फार्मिंग नें उन की लागत में कमी लाने और आमदनी में इजाफा करने का काम किया है वहीं विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती से आसपास के सब्जी की खेती करने वाले किसानों के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं.
किसान राम पूरन चौधरी करीब एक एकड़ खेत में 15 तरह की विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती करते हैं, जिस में लागत 60,000 से 70,000 रुपए को छोड़ दिया जाए तो भी वे एक सीजन में करीब ढाई से 3 लाख रुपए की आय आसानी से अर्जित कर लेते है.
उन्होंने बताया कि वे रंगीन सब्जियों के कुछ बीज पूसा संस्थान, नई दिल्ली से तो कुछ बीज उत्तराखंड के पंतनगर विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले से क्रय करते हैं. इस के अलावा विदेशी सब्जियों के बीज वे औनलाइन क्रय करते है और खुद ही नर्सरी तैयार कर पौधों की रोपाई अपने खेतों में करने के साथ ही अन्य किसानों को भी मुहैया कराते हैं.
वे अक्तूबर से मार्च के बीच 5 रंगों की गोभी के साथसाथ पार्सले, ब्रुसल्स स्प्राउट, ब्रोकली, लैट्यूस (सलाद पत्ता), स्विस चार्ड, लीक, पार्सनिप और लाल पत्तागोभी जैसी विदेशी सब्जियों का उत्पादन करते हैं. उन के द्वारा इन सब्जियों की नियमित आपूर्ति अयोध्या के होटलों में की जा जाती है, जहां उन्हें अच्छी कीमत मिलती है.
इस के अलावा वे महज 40,000 रुपए की लागत में 3 महीने में टमाटर की उन्नत खेती से करीब ढाई से 3 लाख रुपए की आमदनी आसानी से कर लेते हैं.
राम पूरन का कहना है यदि किसान सही तकनीक और बाजार की मांग को समझ लें तो खेती सब से सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय है.
राम पूरन चौधरी का कहना है कि विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती आसान नहीं है. उपयुक्त जलवायु, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी, गुणवत्तापूर्ण बीज और बाजार तक सीधी पहुंच ये सभी जरूरी तत्व हैं. शुरुआत में जोखिम और चुनौतियां थीं, लेकिन प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सलाह ने उन का मार्ग प्रशस्त किया.
कृषि विशेषज्ञ मंगला प्रसाद मौर्य बताते हैं कि इन विदेशी सब्जियों में विटामिन ए, सी, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन की मांग लगातार बढ़ रही है.
ये सब्जियां न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और गंभीर बीमारियों से बचाव में भी सहायक मानी जाती हैं. इसी कारण बाजार में इन की कीमत सामान्य सब्जियों से अधिक मिलती है, जिस से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो रही है.
राम पूरन चौधरी नें इंटिग्रेटेड फार्मिंग और रंगीन सब्जियों की खेती के जरीए यह साबित कर दिया है कि यदि किसान बदलते समय के साथ नई तकनीक अपनाएं और बाजार की मांग को समझ कर फसल का चयन करें, तो खेती केवल जीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है.





