Farmer ID: जी हां, जिन किसानों ने अभी तक अपनी फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, वे तुरंत करें यह काम वरना नहीं मिलेगी खाद. सरकार का यह कदम किसानों के हित के लिए उठाया गया है. इससे कालाबाजारी पर लगेगी लगाम और किसानों को सही दाम पर मिलेगी खाद.
इसके लिए सरकार ने 41,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी राशि का प्रावधान किया है, जिससे खाद की कीमत स्थिर बनी रहें.
रुकेगी खाद की कालाबाजारी
सरकार की नई व्यवस्था के तहत किसानों को यूरिया और अन्य खाद अब फार्मर आईडी के आधार पर उपलब्ध होगी. अभी तक देशभर में करीब 9 करोड़, 30 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 13 करोड़ तक पहुंचाने का है.
कई राज्यों में लागू है योजना
मध्य प्रदेश और हरियाणा राज्य में इस योजना को सफलतापूर्वक अपनाया जा चूका है. सरकार का मानना है कि इस कदम से यूरिया का गलत इस्तेमाल काफी हद तक रोका जा सकेगा. साथ ही इससे जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद मिल पाएगी, जिससे खेती की उत्पादकता में भी सुधार होने की उम्मीद है. फर्टिलाइजर व्यवस्था पर सरकार ने कहा कि कच्चे माल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद यह फैसला किया गया है
किसानों पर नहीं बढ़ेगा भार
किसानों को यूरिया की बोरी 266 रुपए और डीएपी की बोरी 1,350 रुपए में ही मिलेगी. इसके लिए हाल ही में कैबिनेट ने 41,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त व्यवस्था की है, ताकि बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ सरकार उठाए और किसान पर भार न पड़े. इसका लाभ लेने के लिए किसान को फार्मर आईडी का होना बहुत जरूरी है.
फार्मर आईडी से किसानों को मिलेगी पूरी खाद
किसानो को खाद की मात्रा फार्मर आईडी के आधार पर यह तय होगी कि कितनी जमीन और कौन–सी फसल के लिए कितना खाद जरूरी है, जिससे किसान को खाद की कमी न हो. किसानों को खाद उपलब्ध कराने का यह मॉडल मध्य प्रदेश और हरियाणा में सफल रहा है इसलिए अब इसे देशभर में लागू करने पर काम हो रहा है.
इसके अलावा सरकार देश में टिकाऊ और सुरक्षित कृषि को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती पर लगातार जोर दे रही है. इसका उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके मिट्टी की सेहत सुधारना, किसानों की लागत घटाना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना है.
भारत सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) प्रमुख है. इस योजना के तहत किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और प्रमाणन की सुविधा दी जाती है.





