Unseasonal Rain: पिछले कई सप्ताह से बेमौसम बारिश ने देश-भर के किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. अभी अनेक किसानों की गेहूं कि फसल खेत में तैयार खड़ी है, लेकिन बारिश (Unseasonal Rain) है कि आए-दिन अपना कहर बरपा रही है. तेज आंधी-बरसात और तेज हवाओं के चलने से गेहूं के खेत की फसल बुरी तरह से खेतों में गिर गई है, जिससे किसान बेबस अपनी फसल को देखकर खून के आंसू रो रहा है. महीनों की मेहनत पानी में बहती नजर आ रही है. ऐसे मैं किसान क्या करे?
फसल बीमा है इसका उपाय
जी हां, किसानों की फसल पूरे साल खुले में पड़ी रहती है और जब उसकी आमदनी का समय आता है तो कई बार प्राकृतिक आपदा से फसल बरबाद हो जाती है. ऐसे समय में फसल बीमा योजना काम आती है, जो फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देती है.
कब-कब मिलता है बीमा का फायदा
सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, तूफान, कीट और बीमारियों से फसल खराब होने पर किसानों को बीमा क्लेम मिलता है. खास बात यह है कि अगर खराब मौसम के कारण बोआई नहीं हो पाती या खड़ी फसल नष्ट हो जाती है, तब भी मुआवजे का प्रावधान है.
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए यह सुविधा दी है कि कटाई के बाद खेतों में सूखने के लिए रखी फसल अगर 14 दिनों की भीतर बारिश या दूसरी प्राकृतिक कारणों से खराब हो जाती है, तो बीमा कवर लागू होता है. इससे उन किसानों को भी मदद मिलती है, जिनकी फसल काटने के बाद खराब हो जाती है.
कौन-कौन किसान ले सकता है इस योजना का लाभ
इस योजना देश के सभी किसानों के लिए बनाई गई है. इस का लाभ में वे सभी किसान ले सकते हैं जो अधिसूचित फसलें उगाते हैं. चाहे किसान अपनी जमीन पर खेती करता हो या बंटाई पर खेती हो. अगर किसान ने फसल के लिए बैंक से लोन लिया है तो बीमा अपने-आप जुड़ जाता है. इसके अलावा सामान्य तौर पर किसान खुद भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.
कम प्रीमियम, अधिक फायदा, किसान बेफिक्र
फसल का बीमा कराने के लिए इस योजना के तहत किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है. खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और बागबानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है. बाकी प्रीमियम का भुगतान सरकार को करना होता है. इससे किसान को चिंता नहीं रहती, फिर चाहे आंधी आए या तूफान और किसान सोता है चैन की नींद.
कैसे मिलेगा मुआवजा
अगर किसी प्राकृतिक आपदा से किसान की फसल को नुकसान होता है तो लाभार्थी किसान को 72 घंटे के अंदर ख़राब फसल होने की जानकारी देनी होती है. जानकारी या सूचना बीमा कंपनी, बैंक, सीएससी सेंटर या कृषि विभाग के माध्यम से दी जाती है. इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर भी जानकारी दी जा सकती है. इसके बाद संबंधित अधिकारी आपकी खराब हुई फसल की मौके पर जाकर हुए नुकसान का आकलन करते हैं.
इसके बाद आपकी फसल के हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाती है. इसके आधार पर बीमा क्लेम मंजूर होता है और मुआवजे की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
करें ऑनलाइन आवेदन
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को ऑनलाइन आवेदन करना होता है. इसके लिए ऑफिशियल पोर्टल pmfby.gov.in या नजदीकी सीएससी सेंटर की मदद ली जा सकती है.
फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है, जिससे किसान को प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर चिंता नहीं करनी होती है. Unseasonal Rain





