Pulse Crop: मोठ सूखे इलाकों में खरीफ मौसम की बारानी खेती के रूप में उगाई जाने वाली खास दलहनी फसल (Pulse Crop) है. यह ज्यादातर कम वर्षा वाले इलाकों में कमजोर व रेतीली जमीन पर उगाई जाती है. अगर सही तरीके से की जाए तो किसानों की कसौटी पर हमेशा फायदे का सौदा साबित होती है.

खेत का चुनाव

Pulse Crop मोठ की खेती सभी प्रकार की जमीन में की जा सकती है, लेकिन अच्छे जल निकास वाली बलुई से बलुई दोमट जमीन इसकी खेती के लिए बेहतर है. क्षारीय व जल भराव वाली जमीन इसकी खेती के लिए सही नहीं है.

खेत की तैयारी

गर्मियों में खेत की डिस्क द्वारा गहरी जुताई करके खुला छोड़ दें व मानसून की पहली बारिश के बाद कल्टीवेटर व हैरो से जुताई करके खेत को भुरभुरा व खरपतवार रहित बना लें और पाटा लगा दें.

मोठ की उन्नत किस्में

आरएमओ 40, आरएमओ 257, आरएमओ 435, आरएमओ 225, आरएमओ 423, आरएमबी 25, काजरी मोठ 2, काजरी मोठ 3 ये मोठ की उन्नत किस्में है.

बोआई
Pulse Crop मोठ की बोआई 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से ले.

कर सीडड्रिल द्वारा 30 सेंटीमीटर की दूरी पर कतारों में करें और पौधे से पौधे की दूरी 12 सेंटीमीटर रखें.

बीजों को एग्रीमाईसीन 250 पीपीएम या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 200 पीपीएम के घोल में 3 घंटे भिगोने के बाद बोआई करें.

मोठ की बोआई अच्छी बारिश के बाद जुलाई महीने में करें.

उर्वरक

बोआई के समय खेत में 10 किलोग्राम नाइट्रोजन व 20 किलोग्राम फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से डालें. खड़ी फसल में फूल से फली बनने की अवस्था पर 1 फीसदी घुलनशील एनपीके का छिड़काव करने से अच्छी उपज हासिल होती है.

निराई-गुड़ाई व खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण व नमी संरक्षण के लिए बोआई के 20-25 दिनों बाद कुदाली से निराई-गुड़ाई करें. यदि जरूरत हो तो 10-12 दिनों बाद एक बार फिर से निराई-गुड़ाई कर दें. निराई-गुड़ाई से मिट्टी में हवा अच्छी तरह आताजाती रहती है.

रोगों व कीटों की रोकथाम

Pulse Crop मोठ में रोगों व कीटों की रोकथाम के लिए निम्न उपाय अपनाएं-

सूखा जड़ गलन रोग की रोकथाम के लिए कार्बंडाजिम या थायोफिनेट मिथाइल 70 डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीजोपचार करें. इस बीमारी के जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीजोपचार करें व 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा को 100 किलोग्राम नमीयुक्त गोबर की खाद में मिलाकर छाया में रखने के बाद खेत में मिलाएं.

चित्ती जीवाणु रोग की रोकथाम के लिए एग्रीमाइसिन 200 ग्राम या तांबायुक्त फफूंदनाशी कॉपर आक्सी क्लोराइड का 0.2 से 0.3 फीसदी घोल बनाकर बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही छिड़काव करें.

पीला मोजेक व क्रिंकल रोग की रोकथाम के लिए डाई मिथोएट 30 ईसी 1.2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

छाछ्या रोग की रोकथाम के लिए गंधक का चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकें या डाइनोकेप एल.सी. का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही छिड़काव करें.

लीफ वीविल और ब्ल्यू बीटल (फली बीटल) की रोकथाम के लिए 24 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिथाइल पैराथियान 2 फीसदी चूर्ण का बुरकाव करें.

फलीछेदक कीट की रोकथाम के लिए मोनो क्रोटोफास 36 डब्ल्यूएससी या क्यूनालफास 25 ईसी 1.2 लीटर या कार्बोरिल 50 फीसदी घुलनशील चूर्ण 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से फूल व फली आते ही छिड़काव करें.

कातरा कीट की रोकथाम के लिए मिथाइल पैराथियान 2 फीसदी या क्यूनालफास 1.5 फीसदी था फोसेलोन 4 फीसदी या कार्बोरिल 5 फीसदी धूल का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें. जहां पानी उपलब्ध हो वहां क्यूनालफास 25 ईसी या क्लोरपायरफास 20 ईसी का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

मोयला, सफेद मक्खी, हरा तैला कीटों की रोकथाम के लिए बोआई के 30 दिनों बाद मोनोक्रोटोफास 36 एसएल 1.0 लीटर या ट्राईजोफास 40 ईसी 1.5 लीटर या मिथाइल डेमोटोन 25 ईसी 1 लीटर या डाइमेथोएट 30 ईसी 1 या इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. जरूरत पड़ने पर 15 दिनों बाद फिर से छिड़काव करें.

एकीकृत कीट व रोग प्रबंधन विधि में बीजों को कार्बेंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करके जैव उर्वरक (राइजोबियम व पीएसबी कल्चर) मिलाकर बोआई करें. बोआई के 30 दिनों के बाद अजेडिरेक्टिन 3 एम.एल. प्रति लीटर का छिड़काव करें. इसके 15 दिनों बाद ट्राइजोफास 1.50 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिड़कें.

कटाई गहाई व भंडारण

सितंबर के अंतिम हफ्ते में फसल पककर तैयार हो जाती है. पकी फसल को काटकर सुखाएं व साफ-सुथरे खलिहान में थ्रेशर से गहाई करें.

उपज
समय पर बोने व अच्छी तरह देखभाल करने से मुनासिब हालात में Pulse Crop मोठ की 6 से 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिलती है और करीब 7-8 क्विंटल तक सूखा चारा भी हासिल होता है.

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