Chilli Farming: हरी मिर्च की खेती साल भर की जाती है. यह जायद व खरीफ में अलग अलग समय में रोपी जाती है.
अगर किसान व्यावसायिक लेबल पर हरी मिर्च की खेती करें तो सब्जियों की अन्य फसलों के मुकाबले कम लागत में ज्यादा मुनाफा ले सकते हैं.
नर्सरी की तैयारी व रोपाई1 हेक्टेयर खेत में हरी मिर्च की रोपाई के लिए डेढ़ किलोग्राम बीज की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है. इस की नर्सरी साल में 2 बार डाली जाती है.
जायद के लिए फरवरीमार्च व खरीफ के लिए मई से जुलाई का समय सही होता है. हरी मिर्च की नर्सरी डालने के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी को भुरभुरी बना कर उस में सड़े हुए गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिला देना चाहिए. इस के बाद उठी हुई या समतल क्यारियां बना लें, जिन की चौड़ाई 0.60 मीटर व लंबाई सुविधानुसार रखी जाती है. वैसे 3 मीटर लंबी क्यारियां नर्सरी डालने के लिए ज्यादा प्रयोग में लाई जाती हैं.
1 हेक्टेयर खेत में मिर्च की रोपाई के लिए 10-15 क्यारियां बनानी चाहिए. इन तैयार क्यारियों में बीज डालने के बाद उन में पानी का छिड़काव कर नमी बनाए रखें. गरमी में बीज को धूप से बचाने के लिए ढकना जरूरी होता है.
नर्सरी में जब पौधे डेढ़ महीने यानी 4-6 इंच के हो जाएं तो उन की रोपाई कर देनी चाहिए.रोपाई की विधिहरी मिर्च के पौधों को खेत में रोपने से पहले जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी बना लें. इस के बाद खेत में प्रति हेक्टेयर 25-30 टन गोबर की खाद मिला देनी चाहिए.
फिर उठी हुई नालियों की क्यारियां बना कर 50-60 सेंटीमीटर की दूरी पर पौधों की रोपाई करें. पौधों की रोपाई के तुरंत बाद हलकी सिंचाई कर देनी चाहिए. मिर्च के पौधों को खेत में रोपते समय ही प्रति हेक्टेयर की दर से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस व 60 किलोग्राम पोटाश का इस्तेमाल करें.
खरपतवार नियंत्रण: रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करने के बाद 8-10 दिनों के अंतराल से सिंचाई करते रहना चाहिए. इस दौरान खेत से खरपतवारों को निकाल कर रोपाई के 10 दिनों के भीतर ही पौधों के चारों तरफ मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए. इस से पौधों के गिरने का डर नहीं होता है और जड़ों में पानी भी नहीं लगता है.
कीटबीमारियों से हिफाजत: मिर्च की फसल में कभी कभी थिरप्सनाय नाम के छोटे कीड़े का प्रकोप देखा गया है. इस से बचाव के लिए 10 फीसदी मिश्रण युक्त बीएचएससी धूल का भुरकाव 25-30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए. मिर्च में लगने वाली सब से खतरनाक बीमारी पत्तियों में सिकुड़न यानी लीफ कर्ल है. इस से पूरा पौधा सूख जाता है.
इस के अलावा उकठा रोग से भी पौधे सूखने लगते हैं. मिर्च में उकठा रोग की हालत में रोगग्रस्त पौधे को उखाड़ कर जला देना चाहिए और उस खेत में 5 सालों तक कोई फसल नहीं लेनी चाहिए. इन दोनों रोगों से बचाव के लिए रोगरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए. इस के अलावा इस रोग का लक्षण दिखाई दे तो 2 फीसदी डाइथेन एम का छिड़काव करना चाहिए.
मिर्च की तोड़ाईमिर्च की खेती हरी मिर्च व लाल मिर्च के लिए की जाती है. अगर हरी मिर्च के लिए फसल ले रहे हैं, तो बढ़वार होने पर नियमित अंतराल पर मिर्चों की तोड़ाई करते रहें.लाल सूखी मिर्च के लिए जब फलियां पक कर लाल हो जाएं तब तोड़ाई करें.
हरी मिर्च की खेती (Chilli Farming) के लिए मिट्टी का चयन खास होता है. इस की खेती दोमट व बलुई दोमट में ज्यादा मुफीद होती है. इस के खेतों में से पानी निकासी का सही इंतजाम होना चाहिए. क्योंकि इस की जड़ों में पानी रुकने से फसल के सूखने का डर बना रहता है.





