Mango Processing: आम की ज्यादा पैदावार के मामले में हमारा देश दुनियाभर में पहले नंबर पर है. देश के 160 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा रकबे में फैले बागों में करीब 1,08,000 टन से भी ज्यादा आम पैदा होते हैं, लेकिन आम की प्रति हेक्टेयर पैदावार को बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि इस में हमारा देश आज भी काफी पीछे है.
प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ने से आम की लागत में कमी आएगी. साथ ही आम की प्रोसेसिंग से उसे उगाने वाले बागबानों का मुनाफा बढ़ेगा.
यदि सूझभूझ से काम लिया जाए तो आम बागबानों को अमीर बना सकता है. आमों के बागों के मालिक अपनी जमीन पर आम के उत्पाद बनाने की इकाई लगा कर ज्यादा कमा सकते हैं.
कई गुना कमाएं: उगाओ, प्रोसेस करो व ज्यादा कमाओ. खेतीबागबानी से खुशहाली का यही गुर है. मसलन आंधीतूफान की मार से काफी सारे आम पकने से पहले ही गिर जाते हैं. उन्हें सीघे ही बाजार में बेच दिया जाता है.
बाग वालों के मुकाबले कच्चे आम फुटकर बेचने वाले कहीं ज्यादा कमाते हैं, क्योंकि अचारचटनी बनाने वाले ग्राहक उन्हीं आमों को महंगी कीमत पर खरीद कर ले जाते हैं. लिहाजा कच्चे आमों को मिट्टी के मोल बेचने से बेहतर है कि उन को सुखा कर उन का अमचूर बना कर बेचा जाए.सुखाने के बाद 1 क्विंटल आम से करीब 25 किलोग्राम अमचूर बनता है. Mango Processing
मुश्किल नहीं है शुरुआत: कच्चे आमों से अमचूर बनाने में किसी खास तकनीक, मशीन या कैमिकल की जरूरत नहीं पड़ती. आमों को धोएं, पोछें, छीलें, काटें व नमक के पानी में 1 रात भिगोने के बाद 3-4 दिनों तक तेज घूप में सुखाएं.
जब फांकें सूख कर करारी हो जाएं व आलू चिप्स की तरह टूटने लगें तो समझ लें कि अमचूर तैयार है.
सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ पोस्ट हार्वेस्ट टैक्नेलाजी, सीफैट, लुधियाना, पंजाब में आम पर एक खास परियोजना चल रही है. वहां के माहिरों ने कम वक्त में बेहतर ढंग से फल सुखाने के उम्दा ड्रायर भी बनाए हैं. बड़े पैमाने पर अमचूर सुखाने के लिए उन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह तो सिर्फ एक उदाहरण है.अमचूर के अलावा आम का अचार, चटनी, मुरब्बा, शरबत, आमपापड़, जूस, आइसक्रीम, जैम, जैली, मैंगोशेक व आमपना वगैरह बहुत सी चीजें बनाई व बेची जा सकती हैं.
यहां लें मदद: सरकार राष्ट्रीय बागबानी मिशन व राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड की स्कीमों के तहत माली इमदाद
देती है. आम पर खास खोजबीन के लिए लखनऊ में मलीहाबाद के पास रहमानखेड़ा काकोरी में केंद्र सरकार का एक आम अनुसंधान संस्थान था. अब इस का नाम बदल कर केंद्रीय उपोष्ण बागबानी संस्थान हो गया है. केंद्र व राज्यों के खेती, बागबानी व फल प्रसंस्करण के महकमे आम जैसे फलों से तरहतरह के उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग देते हैं. Mango Processing
लिहाजा उन्हें बनाने की तकनीक सीख कर बागबान खुद अपनी इकाई लगा सकते हैं और पुरानी लीक छोड़ कर बागों से कहीं ज्यादा कमा सकते हैं. Mango Processing





