Ethanol  : पेट्रोल में E20 एथेनॉल मिश्रण के बाद अब सरकार एथेनॉल को घरेलू खाना पकाने के ईंधन के रूप में अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है और आने वाले समय में एथेनॉल से चलने वाले चूल्हे रसोई में LPG का विकल्प बन सकते हैं. इस नई व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है.

सितंबर तक आ सकती है नई नीति

जानकारी के अनुसार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल नीति तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य एलपीजी पर देश की निर्भरता कम करना, आयात बिल घटाना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है.

एथेनॉल चूल्हों का हो चुका है परीक्षण

सरकार के निर्देश पर एथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव का परीक्षण भी किया जा चुका है. इन चूल्हों को घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर काम चल रहा है. यदि परीक्षण सफल रहते हैं, तो इन्हें आम लोगों तक पहुंचाने का काम शुरू किया जा सकता है.

मिलेगी सब्सिडी, बढ़ेगा इस्तेमाल

सरकार एथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम को तेजी से अपनाने के लिए सब्सिडी योजना भी शुरू कर सकती है. इससे एथेनॉल स्टोव और ईंधन आम परिवारों के लिए अधिक किफायती हो सकते हैं. हालांकि, सब्सिडी को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. लेकिन इथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए सरकार यह कदम उठा सकती है.

इथेनॉल का बढ़ रहा उत्पादन

भारत में एथेनॉल का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. इस समय देश की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर से अधिक हो चुकी है और चालू वित्त वर्ष में इसमें करीब 4 अरब लीटर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने की संभावना है.

देश में E20 पेट्रोल मिश्रण के लिए हर वर्ष लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होती है. वहीं शराब, दवा और रसायन उद्योग मिलकर करीब 3 से 3.5 अरब लीटर एथेनॉल का उपयोग करते हैं. इसके बावजूद करीब 7 अरब लीटर उत्पादन क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है. ऐसे में घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में इसका इस्तेमाल एक बड़ा विकल्प बन सकता है.

निर्यात के भी खुल सकते हैं नए रास्ते

यदि घरेलू मांग बढ़ती है तो एथेनॉल उद्योग को मजबूती मिलेगी. साथ ही भारत नेपाल, बंगलादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों में एथेनॉल निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रहा है, जहां एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तो है, लेकिन पर्याप्त घरेलू उत्पादन नहीं है.

तेल कंपनियां भी कर रही हैं तैयारी

तेल कंपनियां भी इस नई पहल का हिस्सा बनने को तैयार हैं. वे एथेनॉल आधारित कुकिंग तकनीक पर रिसर्च कर रही हैं और इस क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास, साझेदारी तथा संभावित निवेश के विकल्पों पर काम कर रही हैं.

यदि सरकार की यह योजना लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में एथेनॉल न केवल वाहनों बल्कि रसोई का भी प्रमुख ईंधन बन सकता है. इससे एलपीजी पर निर्भरता घटेगी, स्वदेशी जैव ईंधन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों से जुड़े एथेनॉल उद्योग को भी नई रफ्तार मिल सकती है. Ethanol

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