RBI Report. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का हमेशा से बहुत बड़ा योगदान रहा है. हाल के वर्षों में, कई राज्यों ने खेती में नए तरीके अपनाए हैं और किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 से 2024-25 तक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश कृषि और संबंधित क्षेत्रों में सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्य रहे हैं. यह सफलता इस बात का संकेत है कि इन राज्यों ने खेती के उत्पादन, दक्षता और किसानों के कल्याण में महत्वपूर्ण सुधार किया है.
तमिलनाडु ने कृषि विकास में बनाया नया रिकॉर्ड
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच तमिलनाडु की औसत कृषि विकास दर 5.99 प्रतिशत रही, जो देश में सबसे अधिक है. तमिलनाडु ने खेती के क्षेत्रफल, फसल उत्पादकता, बागवानी, पशुपालन और कृषि ऋण वितरण जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है.
तमिलनाडु के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, खेती का कुल रकबा 2016-17 में राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल के 43.31 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 47.58 प्रतिशत हो गया. यह दर्शाता है कि तमिलनाडु में कृषि गतिविधियों का विस्तार लगातार हो रहा है.
उत्पादकता और कृषि से सम्बंधित योजनाओं का मिला लाभ
तमिलनाडु ने वर्ष 2024-25 में कृषि के क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. रागी और गन्ने की उत्पादकता में तमिलनाडु देश में पहले स्थान पर रहा, तिलहन उत्पादन में दूसरे और मूंगफली उत्पादन में तीसरे स्थान पर रहा. केले की बागवानी में भी राज्य ने बहुत अच्छा काम किया और इसकी सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया.
किसानों को मिलने वाले कृषि ऋण में भी बहुत वृद्धि हुई है. वर्ष 2019-20 में कृषि ऋण का वितरण 2.23 ट्रिलियन रुपये था, लेकिन 2023-24 में यह बढ़कर 4.52 ट्रिलियन रुपये हो गया. सबसे अच्छी बात यह है कि कुल ऋण का लगभग 78 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों को दिया गया.
मत्स्य पालन, और पशुपालन ने बढ़ाई कृषि आय
तमिलनाडु ने खेती के साथ-साथ पशुपालन और मछली पालन में भी अच्छी प्रगति की है. वर्ष 2001-02 में राज्य में 3.93 अरब अंडे पैदा हुए थे, जो 2023-24 तक बढ़कर 22 अरब हो गए. मछली पालन क्षेत्र ने राज्य की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा कमाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हालाँकि, आर्थिक सर्वेक्षण में भूजल स्तर में गिरावट और जलवायु परिवर्तन को भविष्य की बड़ी चुनौतियों के रूप में भी बताया गया है.
उत्तर प्रदेश ने उत्पादन और बजट दोनों में दर्ज किया नया रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश ने कृषि विकास में बहुत अच्छा काम किया है. यहाँ की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है, जो कुल किसानों का लगभग 93 प्रतिशत हैं. सरकार की विभिन्न योजनाओं और निवेश से इन्हीं किसानों को सीधा लाभ मिला है.
उत्तर प्रदेश में गेहूं और धान का उत्पादन भी बहुत बढ़ गया है. वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच गेहूं का उत्पादन 42 प्रतिशत और धान का उत्पादन 66 प्रतिशत बढ़ गया. इसके अलावा, कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत बढ़कर 63.84 मिलियन टन तक पहुंच गया. यह वृद्धि उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रही है.
दलहन, तिलहन और गन्ना उत्पादन में हुई ऐतिहासिक वृद्धि
राज्य में दलहन का उत्पादन 127 प्रतिशत और तिलहन का उत्पादन 258 प्रतिशत बढ़ा. इसी समय, गन्ने का उत्पादन भी 52 प्रतिशत बढ़कर 221 मिलियन टन हो गया. यह बढ़ा हुआ उत्पादन किसानों की आय में बहुत बड़ा योगदान दे रहा है.
कृषि बजट और सब्सिडी योजनाओं ने बदली किसानो की किस्मत
उत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही है. वर्ष 2016-17 में कृषि बजट 1,517 करोड़ रुपये था, लेकिन 2026-27 तक यह बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. सरकार किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं चला रही है. इनमें प्रमाणित बीजों पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी, मुफ्त मिनीकिट, तालाब बनाने पर 50 प्रतिशत की मदद, निजी नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली और फसल ऋण जैसी सुविधाएं शामिल हैं. सरकार ने गेहूं, धान और बाजरा की सरकारी खरीद को बढ़ावा दिया है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधा आर्थिक लाभ हुआ है.
कृषि विकास में दूसरे राज्यों का योगदान
कुछ पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों ने भी कृषि विकास में अच्छा काम किया है. असम, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्यों ने अपनी कृषि विकास दर से अच्छा प्रदर्शन दिखाया है. हालांकि इन राज्यों में कृषि क्षेत्र छोटा है, लेकिन इन्होंने अच्छी प्रगति की है.





