Coconut Cultivation-

आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है. कभी यहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन कई चीनी मिलों के बंद होने और गन्ने की खेती से कम होती आमदनी के कारण किसान अब दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. अब किसानों का रुख नारियल की खेती की ओर बन रहा है. इस के अलावा किसान कोको, औयल पाम और अन्य बागबानी फसलों की खेती भी कर रहे हैं.

चीनी मिलें बंद होने से गन्ने से हुए दूर

एलुरु और आसपास के क्षेत्रों में कई चीनी मिलें अब चालू नहीं हैं. भीमाडोल, ताडुवई, चागल्लू, पोथावरम और तनुकु की चीनी इकाइयां फिलहाल बंद हैं, जबकि वुय्यूर की इकाई अभी संचालित हो रही है. चीनी मिलों की कमी से किसानों के लिए गन्ने की बिक्री और आय का भरोसा कम हुआ है. ऐसे में किसान ऐसी फसलों को चुन रहे हैं जिन से उन्हें अलगअलग तरीकों से कमाई हो सके.

45,000 एकड़ में नारियल की खेती

नारियल अब एलुरु जिले की प्रमुख वैकल्पिक फसलों में शामिल हो गया है. उद्यानिकी विभाग के संयुक्त निदेशक हबीब बाशा के अनुसार, जिले में करीब 15,000 किसान लगभग 45,000 एकड़ जमीन पर नारियल की खेती कर रहे हैं.

पेदावेगी, द्वारका तिरुमला, कामावरापुकोटा, टी. नरसापुरम, लिंगापालेम, चिंतालपुड़ी, जंगारेड्डीगुडेम और डेंडुलुरु मंडल नारियल की खेती के प्रमुख क्षेत्र हैं.

एक फसल से कई तरह की कमाई

नारियल की खासीयत यह है कि किसान इसके अलगअलग हिस्सों से कमाई कर सकते हैं. पके और कच्चे नारियल के अलावा नारियल पानी, तेल, रेशा और खोल भी बाजार में बिकते हैं.

बन रहे अनेक उत्पाद, बढ़ रही आय

नारियल के रेशे से कौयर और कई तरह के महंगे उत्पाद बनाए जाते हैं. पहले जिसे अकसर बेकार समझा जाता था, वही रेशा अब अतिरिक्त आय का साधन बन रहा है. इसी तरह नारियल पानी की बढ़ती मांग ने भी किसानों के लिए बाजार का एक नया अवसर पैदा किया है.

पके नारियल की कीमत बाजार और मांग के अनुसार बदलती रहती है. त्योहारों और अधिक खपत के समय इसकी मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रहती है.

नुकसान के बाद नारियल बना सहारा

नारियल की खेती में किसान को एक ही उत्पाद पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. बाजार में पके नारियल की कीमत कम होने पर कच्चे नारियल, तेल, रेशे और खोल से आय हासिल करने के विकल्प मौजूद रहते हैं.

फसल विविधीकरण से बदल रही खेती

एलुरु में नारियल की खेती का बढ़ना केवल एक फसल का बदलाव नहीं है, बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलाव का संकेत है. गन्ने की खेती और चीनी उद्योग में आई गिरावट के बीच किसान अब जोखिम कम करने के लिए अलगअलग बागबानी फसलों को अपना रहे हैं.

नारियल के साथ कोको, औयल पाम और अन्य बागबानी फसलें भी धीरेधीरे गन्ने की जगह ले रही हैं. इस से एलुरु के किसानों को खेती से आय के नए रास्ते मिल रहे हैं और जिले की कृषि अर्थव्यवस्था भी नई दिशा में आगे बढ़ रही है. Coconut Cultivation

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