Sonadi Sheep Project-
भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर, निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने ‘नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन शीप इम्प्रूवमेंट’ के तहत वेटरनरी एवं एनिमल साइंस कॉलेज, उदयपुर में संचालित सोनाड़ी भेड़ परियोजना का दौरा किया. उन्होंने परियोजना की प्रगति, भेड़ों के प्रबंधन और नस्ल सुधार से जुड़े कार्यों का जायजा लिया.
इस दौरान सोनाड़ी भेड़ परियोजना के प्रधान अन्वेषक (PI) डॉ. लोकेश गौतम ने निदेशक को परियोजना में मौजूद भेड़ों की संख्या, उनके रखरखाव, पालन-पोषण और प्रबंधन की जानकारी दी.
उन्होंने परियोजना में अब तक किए गए कार्यों और भेड़ों की वर्तमान स्थिति के बारे में भी बताया.
आंकड़ों में एकरूपता जरूरी
डॉ. अरुण कुमार तोमर ने नेटवर्क प्रोजेक्ट के तहत समय-समय पर दिए गए सुझावों के आधार पर परियोजना में किए गए कार्यों की जानकारी ली. उन्होंने परियोजना के सुझावों को किस तरह लागू किया गया है, इस पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रही भेड़ परियोजनाओं से मिलने वाले आंकड़ों में एकरूपता होना जरूरी है.
उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी आंकड़े नियमित रूप से प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सेल, अविकानगर को भेजने का सुझाव दिया. उनका कहना था कि अगर देश की अलग-अलग भेड़ इकाइयों से एक समान तरीके से आंकड़े मिलेंगे, तो इनका सही तरीके से विश्लेषण किया जा सकेगा. इससे भविष्य में भेड़ों के उत्पादन, प्रजनन और नस्ल सुधार से जुड़ी बेहतर योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी.
सोनाड़ी भेड़ के शारीरिक भार पर संतोष
निदेशक डॉ. तोमर ने परियोजना में मौजूद सोनाड़ी भेड़ों के शारीरिक भार और उनकी स्थिति पर संतोष जताया. उन्होंने सोनाड़ी भेड़ की आनुवंशिक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने अच्छे गुणों वाले मेढ़ों का चयन करने और उनका सही तरीके से प्रजनन में इस्तेमाल करने से जुड़े जरूरी सुझाव भी दिए.
उन्होंने कहा कि नस्ल सुधार के लिए बेहतर प्रजनन व्यवस्था अपनाने से आने वाली पीढ़ियों में अच्छे उत्पादन गुण विकसित किए जा सकते हैं. इससे सोनाड़ी भेड़ की उत्पादकता और किसानों को मिलने वाले लाभ को बढ़ाने में मदद मिलेगी.
भेड़पालक किसानों को मिलेंगे उन्नत मेढ़े
डॉ. अरुण कुमार तोमर ने क्षेत्र में सोनाड़ी भेड़ पालने वाले किसानों की पहचान करने का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि किसानों की जरूरत के अनुसार उन्हें उन्नत नस्ल के मेढ़े उपलब्ध कराए जा सकते हैं. इसके लिए बीकानेर स्थित मरुक्षेत्रीय परिसर और अविकानगर संस्थान की टीएसपी उपयोजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता का उपयोग किया जा सकता है.
इस पहल से स्थानीय भेड़पालकों को अच्छे गुणों वाले मेढ़े उपलब्ध होंगे. इससे सोनाड़ी भेड़ के नस्ल सुधार में मदद मिलने के साथ किसानों के भेड़ पालन व्यवसाय को भी बेहतर बनाया जा सकेगा. साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से उपलब्ध कराए गए वित्तीय सहयोग का समय पर और सही तरीके से उपयोग किया जा सकेगा.
वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
दौरे के दौरान निदेशक ने परियोजना में भेड़ों के प्रबंधन और प्रजनन से जुड़े कार्यों को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि परियोजना से मिलने वाले आंकड़े और अनुभव केवल संबंधित इकाई के लिए ही नहीं, बल्कि देश में भेड़ सुधार से जुड़े अन्य केंद्रों के लिए भी उपयोगी हैं. इसलिए आंकड़ों का नियमित और व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना जरूरी है.
डॉ. तोमर के दौरे के अवसर पर मरुक्षेत्रीय परिसर, बीकानेर के डॉ. आशीष चोपड़ा, डॉ. अमरसिंह मीना सहित सोनाड़ी भेड़ परियोजना के सभी कर्मचारी और संविदाकर्मी मौजूद रहे. Sonadi Sheep Project





