केले का तना (Banana Stems) भी बना कमाई का साधन, जूस से अचार और आटे तक तैयार हो रहे कई उत्पाद. कच्चे केले, फूल, तने और छिलके का हो रहा इस्तेमाल. वेस्ट से भी बनाए जा रहे उपयोगी सामान. आइए जानते हैं केले के तने की क्या है खासीयतें…

गरमी हो या सर्दी या हो बरसात का मौसम, केला बाजारों में सालोंसाल नजर आता है. बागबानों के लिए केले की खेती अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है. इस का फल निकालने के बाद पौधे का तना, फूल, छिलका और दूसरे हिस्से अकसर बेकार समझे जाते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में केले के इन्हीं हिस्सों को कमाई का जरीया बनाया जा रहा है.

बेकार नहीं, बड़े काम का केले का तना

केले का तना जिसे आमतौर पर खेत में ही छोड़ दिया जाता है. लेकिन अब केले के फल, तने और फूल से खाद्य उत्पाद तैयार करने के बाद बचने वाले हिस्सों का भी उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है. केले के रेशों से फाइबर आधारित उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इस से किसान और छोटे उद्यमी केवल फल बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि प्रसंस्करण के जरीए केले से अधिक आमदनी ले रहे हैं.

बन रहे अनेक उत्पाद:

यहां केले के अलगअलग हिस्सों से जूस, आटा, अचार, चिप्स और सेवई जैसे कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.

तने से बन रहा जूस : जानकारी के मुताबिक, कुशीनगर में तैयार होने वाले केले के तने से जूस भी बन रहा है. इसे सामान्य और शुगरफ्री दोनों तरह से तैयार किया जा रहा है.

कच्चे केले से आटा और चिप्स : कच्चे केले को सुखा कर उस का आटा तैयार किया जाता है. इस आटे का इस्तेमाल अलगअलग खाद्य पदार्थ बनाने में किया जा सकता है. कुशीनगर में केले से मीठे और चटपटे चिप्स के साथ सेवई जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं.

कच्चे केले के उत्पाद किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस से केवल ताजा फल बेचने के बजाय केले को लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाले उत्पाद में बदला जा सकता है.

फूल से अचार और सब्जी : केले का फूल भी अब खाद्य पदार्थ तैयार करने में काम आ रहा है. इस से अचार तैयार किया जा रहा है, जबकि फूल और उस के अंदर के हिस्से से सब्जी भी बनाई जा सकती है. केले के फूल का अचार बाजार में अनेक स्थानों पर भी बिकता है.

तने का भी बनता है अचार : केले के तने से केवल जूस ही नहीं, बल्कि अचार भी तैयार किया जा रहा है.

एक ही फसल से आमदनी के कई रास्ते

केले के बढ़ते कारोबार को देख कर देश के अनेक राज्यों में भी इस मौडल को अपनाया जा रहा है. किसान, महिला स्वयं सहायता समूह और एफपीओ मिल कर केले के तने (Banana Stems) का जूस, कच्चे केले का आटा, चिप्स, फूल का अचार, तने का अचार और दूसरे उत्पाद तैयार कर सकते हैं, जिस से किसानों की आमदनी बढ़ने का भी रास्ता खुल रहा है.

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...