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लखनऊ के पास मलिहाबाद के रहने वाले दिनेश कुमार पाल ने कृषि विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई की थी.उस के घर के हालात ठीक नहीं थे. ऐसे में वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सका. दिनेश के घर में आम के 40 पेड़ों का एक बाग था. बाग की आय से ही घर का खर्च चलता था. दिनेश ने कुछ दिन अपने बाग में काम करना शुरू किया. उस से उस की आय बढ़ी पर इतना नहीं कि वह संतुष्ट हो पाता.
लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में आम के काफी बाग हैं. इस के अलावा अब सब्जी की खेती भी बढ़ रही है. कई लोग धान और गेहूं की खेती भी करने लगे हैं. ऐसे में बीज और कीटनाशक दवाओं की तमाम दुकानें वहां खुल चुकी थीं. दिनेश को लगा कि वह भी ऐसी दुकान खोल कर बीज बेचने का कारोबार कर सकता है. दिनेश ने कृषि विज्ञान में पढ़ाई की थी इस कारण उसे यह काम सरल लगने लगा था. वह दूसरे दुकानदारों के मुकाबले किसानों को बेहतर ढंग से बीजों के बारे में समझा लेता था.
ऐसे में उस पर किसानों का भरोसा बढ़ जाता था. वह अपनी दुकान में अच्छी कंपनियों के बीजरखता था. किसानों को कैसा बीज बोना चाहिए, यह भी बता देता था. 3 साल की मेहनत में वह सब से अच्छा दुकानदार बन गया.
वह कहता है, ‘कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद जब कहीं नौकरी नहीं मिली तो मुझे दुख हुआ. बीज बेचने की दुकान खोलने का मन हुआ. ज्यादा पैसा नहीं था. मुझे लगा यही वह काम है जिस में मैं अपनी पढ़ाई का सही इस्तेमाल कर सकता हूं. मुझे इस काम में मजा आने लगा और मुझे लगता है कि अगर मैं ने कृषि विषय से पढ़ाई नहीं की होती तो शायद मैं कभी सफल नहीं हो पाता.’
बीज की दुकान खोलने के लिए ज्यादा लागत की जरूरत नहीं होती है. दुकान का इंतजाम होने के बाद 50-60 हजार की पूंजी से इस की शुरुआत की जा सकती है. ज्यादातर बीज कंपनियां उधार पर अपने बीज भी उपलब्ध करा देती हैं. बीज बेचने का कारोबार करने वाले ज्यादातर लोग अपनी दुकान में कीटनाशक दवाओं को भी रखते हैं. ऐसे में गांवकस्बों के रहने वाले पढ़ेलिखे लोगों के लिए बीज कारोबार में लगना फायदे का सौदा होने लगा है.
हाइब्रीड ने बदले हालात
एक वह समय था जब किसान अपने पुराने बीजों की ही बोआई करता था. अब नए बीजों की बोआई करने का चलन बढ़ रहा है. इस का बड़ा कारण हाइब्रीड बीज हैं. किसानों को हाइब्रीड बीज से ज्यादा मुनाफा होने लगा है. एक मोटे अनुमान के अनुसार पूरे देश में 2000 से अधिक बीज बनाने वाली कंपनियां हैं. हालांकि इन में से 12-15 कंपनियां ही सही तरह से बीजों का उत्पादन और प्रसार का काम करती हैं.
नकली बीजों से सावधान
देश में 10 हजार करोड़ का बीज कारोबार है. रिटेलर को 10 फीसदी का कमीशन मिलता है. नकली बीजों के लिए कमीशन ज्यादा मिलता है. ऐसे में वह इन का प्रयोग भी करने लगता है. बीज कारोबार करने वाले रत्नेश मौर्या बताते हैं कि बीज बेचने वाले और किसान के बीच बहुत ही मधुर रिश्ता होता है. ऐसे में नकली बीजों का कारोबार करने वाले को किसान कभी माफ नहीं करता और उस की दुकान भी नहीं चलती है. किसान का भरोसा जिस दुकानदार से टूट जाता है वह कभी वापस नहीं आता. इस के बाद भी नकली बीजों का कारोबार खूब चल रहा है. यही वजह है कि अच्छी कंपनियों को नकल से बचने के लिए उपाय भी करने पड़ते हैं
असली बीजों के पैकेट की छपाई अच्छी होती है. कई बार तो उन पर होलमार्क और हैल्पलाइन नंबर भी लिखे होते हैं. ऐसे में किसान को अगर कोई शंका हो तो वह सीधे कंपनी से बात कर सकता है. रत्नेश मौर्या कहते हैं कि किसान की जरूरत के हिसाब से छोटेबड़े पैकेटों में बीज मिलने लगे हैं. ऐसे में जब तक बहुत जरूरत न हो खुले बीज न खरीदें. अपनी भरोसे वाली दुकान से ही बीज खरीदें. बीज खरीद की रसीद जरूर लें और अगर रिटेलर कोई गलत बात कर रहा है तो उस की शिकायत भी की जा सकती है. Seed Business





