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खेती में खनिज पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए अब खदानों से निकलने वाले अवशेषों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी संभावना को तलाशने के लिएभारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली और आर्सेलरमित्तल निप्पौन स्टील इंडिया ने एक समझौता किया है.

इस के तहत लौह अयस्क की प्रोसैसिंग के बाद बचने वाले अवशेषों यानी आयरन ओर टेलिंग्स का कृषि में इस्तेमाल करने पर वैज्ञानिक शोध किया जाएगा.

पहले भी हो चुका है अध्ययन
दोनों संस्थान वर्ष 2024 से इस दिशा में शुरुआती अध्ययन कर रहे हैं. जांच में पता चला कि आयरन ओर टेलिंग्स में सिलिका, आयरन औक्साइड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमिना जैसे खनिज पाए जाते हैं. ये खनिज पौधों और मिट्टी के लिए उपयोगी हो सकते हैं. हालांकि, खेतों में इन के इस्तेमाल से पहले इन की मात्रा, गुणवत्ता और सुरक्षा की पूरी जांच करना जरूरी है.

छत्तीसगढ़ के किरंदुल स्थित इकाई के आसपास किए गए शुरुआती परीक्षणों में धान, गेहूं और सब्जियों में इस के इस्तेमाल की संभावनाएं सामने आई हैं.

कई मौसम तक चलेगा परीक्षण

नए समझौते के तहत अब दोनों संस्थान कई फसल मौसमों तक इस का परीक्षण करेंगे. वैज्ञानिक यह देखेंगे कि इन अवशेषों के इस्तेमाल से फसल की पैदावार और मिट्टी पर क्या असर पड़ता है. साथ ही मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता, पौधों पर किसी तरह के जहरीले प्रभाव और पानी के साथ खनिजों के नीचे जाने जैसी बातों की भी जांच की जाएगी.

आयरन की कमी वाली मिट्टी के लिए उम्मीद

इस शोध का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसी मिट्टी में आयरन की कमी को दूर करने की संभावना तलाशना है, जहां पोषक तत्वों की कमी है या मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो चुकी है. वैज्ञानिक यह भी जांचेंगे कि इन आयरन युक्त अवशेषों के इस्तेमाल से फसलों में आयरन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है या नहीं.

अगर शोध के नतीजे सुरक्षित और उपयोगी पाए जाते हैं, तो खनन से निकलने वाला यह अवशेष लंबे समय तक जमा करने के बजाय कृषि में एक उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा. Soil Health

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