Rabi Farming-
रबी सीजन में किसानों को बेहतर उत्पादन और मौसम की बदलती स्थिति से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जिला स्तर पर खेती का रोडमैप तैयार किया जाएगा. इस में स्थानीय मौसम, मिट्टी और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विगत दिनों भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ वर्चुअल बैठक में इस संबंध में दिशा निर्देश दिए.
केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रबी फसलों की योजना ऐसी होनी चाहिए, जिसे किसान आसानी से अपने खेत में अपना सकें. उन्होंने बदलते मौसम, बारिश और तापमान में हो रहे बदलाव को देखते हुए खेती की तैयारी करने पर जोर दिया.
मिट्टी और फसल की सेहत पर ध्यान
रबी सीजन के रोडमैप में मिट्टी की जांच, सही मात्रा में खाद और पोषक तत्वों का उपयोग, फसलों में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव तथा कम पानी में बेहतर खेती जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को ऐसी फसल किस्मों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिन में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी जैव सुदृढ़ीकृत फसलें कुपोषण की समस्या कम करने में मददगार हो सकती हैं.
देशभर से जुड़े 40-45 हजार किसान
वर्चुअल बैठक में देशभर से करीब 40 से 45 हजार किसान जुड़े. आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव (डेयर) डा. मांगी लाल जाट और अपर सचिव (डेयर) एवं सचिव (आईसीएआर) ज्ञानेंद्र डी. त्रिपाठी ने किसानों को संबोधित किया. उन्होंने आईसीएआर की ओर से किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों और कृषि संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी.
अविकानगर से 55 किसानों ने लिया हिस्सा
आईसीएआर-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर- सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर में निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर की अध्यक्षता में 55 किसान वर्चुअल बैठक में शामिल हुए. इन में 24 महिला और 31 पुरुष किसान थे. संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी भी बैठक से जुड़े.
किसान और वैज्ञानिकों ने की चर्चा
बैठक के बाद संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों से रबी फसलों की खेती को लेकर चर्चा की. डा. लीलाराम गुर्जर और डा. रंगलाल मीना ने किसानों को फसल की सही देखभाल, मिट्टी में नमी की जांच, खाद और पोषक तत्वों के सही इस्तेमाल तथा फसलों में लगने वाले कीट और रोगों की पहचान और बचाव के बारे में जानकारी दी. वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए खेती के काम समय पर करें और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं.
कृषि के साथ पशुपालन पर भी जोर
एससीएसपी के नोडल अधिकारी डा. अजय कुमार ने किसानों को कृषि और पशुपालन के काम योजनाबद्ध तरीके से करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि संस्थान की ओर से बताई गई उन्नत तकनीकों को अपना कर किसान अपनी उपज और आमदनी बढ़ा सकते हैं.
इस मौके पर संस्थान के निदेशक डा. अरुण कुमार तोमर ने अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के तहत 34 अंगीकृत किसानों को उपयोगी सामग्री भी बांटी. इन में फीडिंग ट्रफ, बाल्टी, बैटरी, छाता, पानी की बोतल, मिनरल मिक्सचर, दीवार घड़ी और अविकामिनमिक्स पाउडर शामिल थे. इस सामग्री वितरण का उद्देश्य किसानों को खेती और पशुपालन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना और उन्हें वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था.





