Drought news-

छत्रपति संभाजीनगर जिले में बारिश की कमी ने किसानों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. जिले के निपानी गांव में पिछले एक महीने से अधिक समय से अच्छी बारिश नहीं हुई है, जिसके चलते हजारों एकड़ में फैली फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं.

खेतों में खड़ी झुलसी फसलें, बर्बाद होने की कगार पर

महाराष्ट्र के निपानी गांव में इस खरीफ सीजन में किसानों ने मुख्य रूप से सोयाबीन, कपास, तुवर, बाजरा और मक्का की बुवाई की थी. जुलाई महीने तक बारिश ठीक होने से फसलें लहलहा रही थीं और किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद थी. लेकिन अगस्त की शुरुआत से ही बारिश ने साथ छोड़ दिया. पूरा अगस्त महीना सूखा निकल गया और सितंबर में भी अब तक कोई बड़ी बारिश नहीं हुई.

लगातार बारिश का इंतजार कर रही फसलों में अब नमी पूरी तरह खत्म हो गई है। खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियां पीली पड़कर झुलसने लगी हैं. सोयाबीन और कपास की फसल में दाने बनने की प्रक्रिया रुक गई है. कई जगह फसलों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे किसानों का नुकसान और बढ़ गया है.

चारा और पीने के पानी का भी संकट बढ़ा

फसल बर्बादी के साथ ही गांव में पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए पीने के पानी का संकट भी बढ़ गया है. खेतों में मौजूद हरा चारा पूरी तरह सूख चुका है. गांव के कुएं, बोरवेल और तालाबों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है. ट्यूबवेल से सिंचाई की कोशिश कर रहे किसानों को बिजली कटौती के कारण और परेशानी झेलनी पड़ रही है.

पशुपालक किसानों को मजबूरन बाजार से महंगे दाम पर सूखा चारा खरीदना पड़ रहा है. इससे खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी आर्थिक बोझ बढ़ गया है. ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है.

किसानों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई

निपानी के किसानों के अनुसार, उन्होंने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर खाद, बीज और मजदूरी पर पैसा लगाया था. अब फसल सूखने से उनके सामने कर्ज चुकाने का भी संकट खड़ा हो गया है.

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में फसलों के नुकसान का पंचनामा कराया जाए, गांव को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए और चारा छावनी व पानी के टैंकरों की व्यवस्था की जाए. किसानों को अब सरकार से मुआवजे और मदद का इंतजार है. Drought news

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