हरियाणा में धान की कटाई का मौसम शुरू होने के साथ ही पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन इस बार कड़े कदम उठाने की तैयारी में है. खेतों में आग लगाने वाले किसानों पर रैड एंट्री के साथ एफआईआर और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी.
सैटेलाइट से होगी निगरानी
हरियाणा सरकार और प्रशासन की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है. 2026 के धान कटाई सीजन से पहले केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने भी हरियाणा समेत पंजाब और उत्तर प्रदेश को पराली जलाने की रोकथाम के लिए निगरानी और कार्रवाई मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.
पराली जलाई तो नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
खेत में पराली जलाने वाले किसान की ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रैड एंट्री की जाएगी. ऐसे किसान के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है. इस के साथ ही किसान को 2 साल के लिए पोर्टल पर प्रतिबंधित किया जाएगा. इस प्रतिबंध के कारण किसान को फसल बिक्री, भावांतर भरपाई, सब्सिडी और अन्य कृषि योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है.
लगेगा जुर्माना
पराली जलाने पर किसान की जमीन के रकबे के अनुसार जुर्माना भी लगेगा.
2 एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5,000 रुपए, 2 से 5 एकड़ तक 10,000 रुपए और 5 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों पर 30,000 रुपए के हिसाब से जुर्माना भी लगेगा.
पराली प्रबंधन के लिए मिलेगी प्रोत्साहन राशि और कृषि यंत्रों और छूट
हरियाणा में किसानों को पराली जलाने के बजाय उस के प्रबंधन के लिए 1,200 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. इस के अलावा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था भी है. 2026-27 में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान पर आवेदन का प्रावधान किया गया था.
इन यंत्रों पर मिलेगा लाभ
सरकार यह लाभ पराली प्रबंधन करने वाले यंत्रों पर दे रही है. इन यंत्रों में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, बेलर, श्रेडर और अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र शामिल हैं. इन की मदद से पराली को खेत में मिलाया जा सकता है या खेत से बाहर निकाल कर दूसरे उपयोग में लिया जा सकता है.
निगरानी तेज, हर किसान पर सैटेलाइट की नजर
पराली जलाने की रोकथाम के लिए राज्य और जिला प्रशासन खेत स्तर पर निगरानी कर रहा है. सैटेलाइट से मिलने वाली आग की लोकेशन के आधार पर स्थानीय टीमें मौके पर जाकर जांच कर सकती हैं. गांव स्तर पर भी अधिकारियों और कर्मचारियों को निगरानी तथा किसानों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है.
सरकार का जोर किसानों को पराली जलाने के बजाय उस का प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करने पर है. इस के लिए आर्थिक सहायता और कृषि यंत्रों पर अनुदान के साथसाथ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं यानी साफ है कि हरियाणा में पराली जलाना अब किसान के लिए केवल पर्यावरण से जुड़ा मामला नहीं है. आग लगाने पर रैड एंट्री, एफआईआर, पर्यावरण क्षतिपूर्ति और सरकारी कृषि योजनाओं के लाभ पर रोक जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. Stubble Burning





