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क्या मोबाइल से फसल के कीटों की पहचान हो सकती है? क्या बिना केमिकल के फसल बच सकती है? इन्हीं सवालों का जवाब चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCSU) मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में मिला.

AI के भरोसे खेती – क्या है प्लान?

पादप संरक्षण विभाग के इस सम्मेलन में छात्रों ने 9 स्टार्टअप आइडिया पेश किए, जो AI और जैविक तरीकों पर आधारित हैं.

1. किसान अपनी फसल केवपत्ते की फोटो खींचेगा, AI बताएगा कौन सा रोग या कीट है. या कीट रोग की समस्या आने वाली है.
2. स्मार्ट ट्रैप: खेत में लगा सेंसर कीटों की गिनती करके फोन पर अलर्ट भेजेगा.
3. AI मौसम देखकर पहले ही बता देगा कि 2 दिन बाद क्या फसल में फफूंद लग सकती है या नहीं.

इससे किसान समय पर दवा छिड़क पाएगा और फसल का बचाव हो जाएगा.

ये होगा फायदा

– केमिकल की जगह फफूंद और बैक्टीरिया से बनी जैविक दवाएं बन सकेंगी.
– लाभकारी कीटों को लैब में तैयार किया जा सकेगा.
– किसान के लिए डिजिटल सलाह केंद्र स्थापित होंगे.

सरकार देगी मदद

एग्री एक्सपर्ट डॉ. एसआर सिंह ने बताया कि ऐसे आइडिया के लिए सरकार RKVY योजना में 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक की मदद देती है.

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि रिसर्च तभी कामयाब है जब वो लैब से निकलकर खेत तक पहुंचे. कृषि मंत्रालय के सलाहकार डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि भविष्य में फसल सुरक्षा के लिए AI और जैविक तरीका ही कामयाब होगा

AI के भरोसे खेती कितनी कामयाब ?

अभी पूरा भरोसा तो नहीं, पर AI एक अच्छा हथियार बन सकता है. कीट की पहचान जल्दी होगी, दवा कम लगेगी और खर्चा घटेगा. छात्रों के ये 9 आइडिया उसी दिशा में पहला कदम हैं AI Trends

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