Digital Farming : ड्रोन दीदी और डिजिटल खेती की नई शुरुआत

Digital Farming: भारतीय कृषि आज केवल उत्पादन की प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि वह विज्ञान, तकनीक और सामाजिक परिवर्तन के संगम की प्रयोगशाला बनती जा रही है. बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अनिश्चितताओं, घटते प्राकृतिक संसाधनों और किसानों की आय को दोगुना करने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के बीच कृषि क्षेत्र से अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे समय में पारंपरिक कृषि पद्धतियां अकेले इन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकतीं. आवश्यक है कि खेती अधिक सटीक, अधिक दक्ष और अधिक टिकाऊ बने. इसी संदर्भ में डिजिटल तकनीकों का प्रवेश और विशेषकर ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं भारतीय कृषि के लिए एक नई दिशा निर्धारित कर रही हैं.

क्या है ड्रोन तकनीक

ड्रोन, जिन्हें तकनीकी भाषा में मानव रहित हवाई वाहन कहा जाता है, प्रारंभ में रक्षा और निगरानी तक सीमित थे. किंतु तकनीकी प्रगति और लागत में कमी के साथ ही इनका उपयोग कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ने लगा है. आज ड्रोन फसल सर्वेक्षण, भूमि मानचित्रण, बीज छिड़काव, उर्वरक और कीटनाशक वितरण तथा फसल स्वास्थ्य आकलन जैसे कार्यों में प्रयुक्त हो रहे हैं. ड्रोन के माध्यम से छिड़काव पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक सटीक होता है, जिससे रसायनों की खपत घटती है और उत्पादन लागत में कमी आती है. साथ ही किसान को रासायनिक पदार्थों के सीधे संपर्क से भी सुरक्षा मिलती है. इस प्रकार ड्रोन तकनीक खेती को अधिक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है.

भविष्य की कृषि का एक जरुरी उपकरण

डिजिटल खेती (Digital Farming) का मूल सिद्धांत है सटीक जानकारी के आधार पर सही निर्णय. ड्रोन इस सिद्धांत को व्यवहार में उतारने का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं. ड्रोन से प्राप्त चित्रों और आंकड़ों के आधार पर फसल में रोग, कीट प्रकोप या पोषक तत्त्वों की कमी की पहचान समय रहते हो जाती है. इससे अनावश्यक उर्वरक और कीटनाशक प्रयोग पर रोक लगती है, जल और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है तथा उत्पादकता में वृद्धि होती है. यही कारण है कि ड्रोन को भविष्य की कृषि का एक अनिवार्य उपकरण माना जाने लगा है.

इस तकनीकी परिवर्तन के साथ भारतीय ग्रामीण समाज में एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन भी आकार ले रहा है, जिसे ड्रोन दीदी पहल के रूप में पहचाना जा रहा है. स्वयंसहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन संचालन, मरम्मत और सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सहित विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि वे कृषि सेवाएं उपलब्ध करा सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.

ड्रोन दीदी है महिला सशक्तीकरण की खास पहल

ड्रोन दीदी पहल केवल कौशल विकास या रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है. जब महिलाएं आधुनिक तकनीक का संचालन करती हैं, तो उनका सामाजिक आत्मविश्वास बढ़ता है और पारंपरिक भूमिकाओं की सीमाएं टूटती हैं. ड्रोन संचालन के माध्यम से महिलाएं न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि वे ग्रामीण तकनीकी सेवा प्रदाताओं के रूप में भी अपनी पहचान बना रही हैं. इससे स्वयंसहायता समूहों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं.

ड्रोन दीदियों द्वारा अपनाया गया ‘ड्रोन-एज-ए-सर्विस’ मॉडल किसानों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है. अधिकांश छोटे और सीमांत किसान स्वयं ड्रोन खरीदने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में ड्रोन सेवा किराए पर उपलब्ध होने से किसान कम लागत में उन्नत तकनीक का लाभ उठा पा रहे हैं. यह मॉडल तकनीक को किसानों के लिए सुलभ बनाता है और डिजिटल विभाजन को कम करने में सहायक होता है.

डिजिटल खेती (Digital Farming) के इस नए स्वरूप में ड्रोन दीदियां जमीनी स्तर पर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. वे किसानों और तकनीक के बीच सेतु का कार्य कर रही हैं. जब किसान देखते हैं कि उनके ही गांव की महिलाएं ड्रोन जैसे उन्नत उपकरणों को कुशलता से संचालित कर रही हैं, तो तकनीक के प्रति उनका विश्वास बढ़ता है. यह विश्वास कृषि क्षेत्र में नवाचार अपनाने के लिए आवश्यक आधार प्रदान करता है.

स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देता ड्रोन

ड्रोन आधारित खेती का पर्यावरणीय प्रभाव भी उल्लेखनीय है. सटीक छिड़काव से रसायनों का अत्यधिक प्रयोग कम होता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है. यह पहल जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देती है और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में योगदान देती है. बदलते जलवायु परिदृश्य में ऐसी तकनीकों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है, जो जोखिम को कम कर सकें और उत्पादन को स्थिर बनाए रखें.

ड्रोन संचालन के लिए तकनीकी जानकारी जरूरी

हालांकि इस पहल के समक्ष कुछ चुनौतियां भी हैं. ड्रोन संचालन के लिए निरंतर प्रशिक्षण, तकनीकी रखरखाव, बैटरी और चार्जिंग अवसंरचना तथा नियमों और अनुमतियों की जटिलता जैसे मुद्दों पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है. इसके अतिरिक्त, छोटे किसानों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए सेवा लागत को संतुलित रखना भी एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है. इन सभी पहलुओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों, ग्रामीण संस्थाओं और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है.

डिजिटल खेती का बढ़ता दायरा

भविष्य में जब ड्रोन तकनीक को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह आधारित आंकड़ों और मोबाइल ऐप्स से जोड़ा जाएगा, तब डिजिटल खेती (Digital Farming) और अधिक प्रभावशाली हो सकेगी. ऐसे में ड्रोन दीदियां केवल सेवा प्रदाता ही नहीं, बल्कि डेटा आधारित कृषि सलाहकार के रूप में भी उभर सकती हैं. इससे खेती अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और सम्मानजनक पेशा बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी.

‘ड्रोन दीदी और डिजिटल खेती (Digital Farming) का नया अध्याय’ भारतीय कृषि के उस परिवर्तनशील स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें तकनीक और सामाजिक सशक्तीकरण साथ-साथ आगे बढ़ते हैं. यह पहल न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का भी सशक्त उपकरण भी है. ड्रोन दीदियां आज खेतों के ऊपर उड़ते ड्रोन के साथ-साथ ग्रामीण भारत की आकांक्षाओं और संभावनाओं को भी नई ऊंचाइयां प्रदान कर रही हैं

Drones : खेती में ड्रोन का इस्तेमाल करे कमाल

Drones : आजकल खेती में नएनए प्रयोग हो रहे हैं, नईनई तकनीकें आ रही हैं और उन आधुनिक तकनीकों को अपनाने से खेती में कम मेहनत और कम समय में अच्छी और गुणवत्तायुक्त पैदावार भी मिल रही है. जमीन से ले कर आसमान तक में उड़ने वाले यंत्र बन रहे हैं.

ऐसी ही एक तकनीक है कृषि ड्रोन (Drones) तकनीक. खेती में ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है और ड्रोन बनाने वाली अनेक कंपनियां इस में उतर पड़ी हैं. हालांकि ड्रोन महंगा यंत्र है, लेकिन इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार भी मदद कर रही है और वह इस यंत्र की खरीद पर अच्छी सब्सिडी भी मुहैया करा रही है.

किसान ड्रोन की 4 उन्नत वैराइटी

फसलों पर कीटनाशकों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन (Drones) उम्दा यंत्र है. इस ड्रोन को कैमरा तकनीक से भी जोड़ा गया है, जिस से खेत में कीड़े, बीमारियां, पानी की देखभाल, खरपतवार और जानवरों की निगरानी कर सकते हैं.

ड्रोन (Drones) में मौजूद सैंसर फसल में बढ़ते कीड़ों और बीमारियों के जोखिम या अन्य समस्याओं के प्रति किसानों को आगाह कर देते हैं.

कार्बन फाइबर कृषि ड्रोन-मोड 2

आसानी से चलने वाले इस किसान ड्रोन (Drones) को केसीआई हैक्साकौप्टर कहते है. इस ड्रोन में फसलों पर छिड़काव के लिए 10 लिटर तक तरल कीटनाशक भर सकते हैं. भारत में इसे लगभग 3 लाख, 60 हजार की कीमत पर बेचा जा रहा है. सब से खास बात यह है कि इस ड्रोन को एनालौग कैमरा टैक्नोलौजी से भी जोड़ा गया है, जिस से फसलों की निगरानी आसान हो जाती है.

एस-550 स्पीकर ड्रोन

लगभग 4 लाख, 50 हजार रुपए की कीमत वाले इस ड्रोन से खेत में 10 लिटर तरल पदार्थ भर कर फसल पर छिड़का जा सकता है. इस किसान ड्रोन में सैंसर भी लगाए गए हैं, जो जोखिम से पहले ही किसानों को सचेत कर सकते हैं.

केटी-डौन ड्रोन

खास सुविधा वाला यह ड्रोन 10 से 100 लिटर तक कीटनाशक या अन्य तरल पदार्थ का भार झेल सकता है. इस ड्रोन की कीमत तकरीबन 3 लाख रुपए तक हो सकती है.

आईजी ड्रोन एग्री

यह ड्रोन अन्य ड्रोन के मुकाबले अधिक आधुनिक है. यह हवा में तेजी से घूमने में सक्षम है. इस में फसलों पर छिड़काव के लिए 5 से 20 लिटर तक कीटनाशक और तरल उर्वरक भर सकते हैं. इस कृषि ड्रोन की कीमत तकरीबन 4 लाख रुपए के आसपास हो सकती है.

कृषि ड्रोन खरीदने पर 50 फीसदी तक सब्सिडी

भारत में ज्यादा से ज्यादा किसान ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर सकें इस के लिए ट्रेनिंग और सब्सिडी भी दी जाती है. इस में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति, लघु और सीमांत महिलाओं व पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को ड्रोन की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी या अधिकतम 5 लाख रुपए आर्थिक सहायता के रूप में दिए जाते हैं. सामान्य वर्ग के किसानों के लिए ड्रोन की खरीद पर अधिकतम 4 लाख की सहायता राशि और 40 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है.

कृषि संस्थानों को  किसान ड्रोन की खरीद के लिए कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान, आईसीएआर  संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को इस तकनीक के प्रसारप्रचार के लिए 100 फीसदी तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है.

Farming Schemes : खेतीबाड़ी की योजनाएं बंद कमरों में नहीं, खेतों में बनेंगी

Farming Schemes : देशभर में चलने वाले 15 दिवसीय ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत  11 जून, 2025 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों के साथ दिल्ली के बाहरी इलाके स्थित तिगीपुर गांव में पहुंच कर वहां के किसानों से चौपाल पर संवाद किया. जहां उन्होंने कृषि ड्रोन तकनीक का अवलोकन भी किया और कहा कि केंद्र सरकार की हर कृषि योजना का लाभ अब दिल्ली के किसानों को भी मिलेगा. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब खेतीबारी की योजनाएं बंद कमरों में नहीं बल्कि खेतों में बनेंगी.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिल्ली पहुंचते ही सब से पहले तिगीपुर में किसान चौपाल में किसानों से खुला संवाद कर उन की बातें ध्यानपूर्वक सुनी. उन्होंने बीज उत्पादन, पौलीहाउस खेती, स्ट्राबेरी उत्पादन और अन्य उच्च मूल्य फसलों से जुड़े उत्पादन को ले कर किसानों से चर्चा की. उन्होंने नवाचार करने वाले किसानों के अनुभव को जाना और उन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान देश की नई खेती के अग्रदूत हैं.

इस के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन देखा, जिस में कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव की आधुनिक विधियों को प्रस्तुत किया गया. उन्होंने वैज्ञानिकों से तकनीक की लागत, प्रभावशीलता और अनुकूलन के बारे में भी जानकारी ली. साथ ही, उन्होंने ने नर्सरी का भी अवलोकन किया और अन्य किसानों से चर्चा करते हुए उन की खेतीबारी से जुड़ी बातें जानीं.

बाद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसान सम्मेलन में शामिल हुए, जहां उन्होंने कहा कि अब अनुसंधान बंद कमरों में नहीं बल्कि खेतों में किसानों के साथ मिलकर होगा. वैज्ञानिक गांवगांव पहुंच कर जो फीडबैक लाएंगे, उसी के आधार पर किसानों के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले 15 दिनों में देशभर में आईसीएआर की 2,170 टीमों ने किसानों के बीच जा कर तकनीक और शोध संबंधी जागरूकता फैलाई है. साथ ही, किसानों की समस्याओं को सुन कर जो समाधान मिल सके, उस के लिए त्वरित कार्य कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और बाकी पर गंभीरता से प्रयास जारी है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को मिट्टी की घटती उर्वरता के बारे में आग्रह किया और कहा कि मिट्टी की जांच अवश्य कराएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर फसल का चयन करें. यही टिकाऊ कृषि का आधार है.

उन्होंने आगे बताया कि सरकार का विशेष फोकस अब फसल विविधीकरण, बाजारोन्मुखी खेती, और बागबानी आधारित मौडल पर है. उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे क्षेत्रों को बागबानी हब के रूप में विकसित किया जा सकता है क्योंकि यहां बाजार की उपलब्धता बहुत मजबूत है और अब तकनीक के बिना खेती में प्रतिस्पर्धा संभव नहीं है. खेती हो या मार्केटिंग दोनों में किसानों को प्रौद्योगिकी का सहयोग लेना होगा. केंद्र सरकार इस के लिए हर स्तर पर सहयोग देने के लिए समर्पित है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि अब तक दिल्ली के किसान केंद्र सरकार की कई योजनाओं से वंचित थे, लेकिन अब यह स्थिति बदलेगी. दिल्ली के किसान अब आत्मनिर्भर भारत के सपनों में पूरी भागीदारी निभाएंगे. केंद्र की हर कृषि योजना का लाभ अब दिल्ली के किसानों को मिलेगा.

उन्होंने आगे कहा कि कई योजनाएं हैं जिन में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), मूल्य समर्थन योजना, मूल्य घाटा भुगतान योजना, बाजार हस्तक्षेप योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना व अन्य प्रावधान जिन में अनुदान देना, पौलीहाउस और ग्रीन हाउस बनाने के लिए केंद्र सरकार से सब्सिडी शामिल हैं, जिस से अब तक दिल्ली के किसान वंचित रहे हैं.

Farming Schemesइस के साथ ही परंपरागत कृषि विकास योजना, नए बाग लगाने के लिए योजना, पुराने बागों के जीर्णोद्धार के लिए योजना, नर्सरी के लिए योजना सब्सिडी की योजनाएं, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी दिल्ली के किसानों तक नहीं पहुंच पाया है, लेकिन अब ये सारी योजनाएं दिल्ली में लागू की जाएंगी. दिल्ली सरकार से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है. इलेक्ट्रोनिक कांटे व खाद की खरीद के लिए भी मदद की जाएगी. किसान अपने खूनपसीने से देश के अन्न भंडार भर रहे हैं. अपने किसानों की उन्नति के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नकली कीटनाशकों और उर्वरक बनाने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आया जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी हमारे किसानों के साथ धोखाधड़ी या गड़बड़ी करेगा, उस को बख्शा नहीं जाएगा. सरकार इस संबंध में कड़ा कानून लाने जा रही है और हम दिल्ली के किसानों की तरक्की करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

इस अभियान के जरीए किसानों की समस्याएं सुन, किसान-वैज्ञानिक संवाद स्थापित करने और कृषि में प्रौद्योगिकी को तेज गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है.

ड्रोन (Drones) जैसी आधुनिक तकनीक से कृषि बनेगी सुगम

हिसार : हाल ही में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि मेला संपन्न हुआ. मेले में अनेक उन्नत किस्में, नई तकनीकें, प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शन हुआ. मेले में मुख्य तौर पर किसानों ने विभिन्न स्टालों पर तकनीकी जानकारी ली और उन्नत किस्मों के बीज खरीदे. साथ ही, प्रश्नोत्तरी सत्र में किसानवैज्ञानिकों के संवाद के अलावा विशेष तौर पर खेती में ड्रोन तकनीक के महत्व पर चर्चा की गई.

मेले में दोनों दिन हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से तकरीबन 67,360 किसान शामिल हुए.

कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रोन तकनीक समय, श्रम व संसाधनों की बचत करने वाली एक आधुनिक तकनीक है, जो कृषि लागत को कम करने में व फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है. ड्रोन का उपयोग अपनी फसलों के बारे में नियमित जानकारी प्राप्त करने और अधिक प्रभावी कृषि तकनीकों के विकास में सहायक है. बदलते मौसम की स्थिति में भी ड्रोन तकनीक का कुशलता से प्रयोग कर सकते हैं.

दुर्गम इलाकों में और असमतल भूमि में कीटनाशक, उर्वरकों व खरपतवारनाशक के छिडक़ाव में भी सहायक है. खरपतवार पहचान एवं प्रबंधन में ड्रोन तकनीक सब से महत्वपूर्ण है. ड्रोन के माध्यम से किए गए सर्वे पारंपरिक सर्वे की तुलना में 10 गुना तेज व अधिक सटीक होते हैं. ड्रोन का उपयोग कर के मिट्टी व खेत का विश्लेषण भी किया जा सकता है.

कीट व बीमारियों से लड़ने के लिए बड़े स्तर पर ड्रोन का उपयोग किया जा सकता है. मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजरी सिस्टम से लैस ड्रोन द्वारा कीड़ों, टिड्डी व सैनिक कीट के आक्रमण का पता लगते ही समय पर कृषि रसायनों का छिड़काव करने से फसल के नुकसान को बहुत ही कम किया जा सकता है. प्रिसिजन फार्मिंग, जेनेटिक इंजीनियरिंग से ले कर जलवायु स्मार्ट कृषि और कृषि से जुड़े अन्य डिजिटल तकनीक को सही तरीके से क्रियान्वित करने के लिए ड्रोन तकनीक बहुत ही सहायक सिद्ध होगी.

उन्होंने बताया कि मेले के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई नवीनतम किस्मों व कृषि पद्धतियों को जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिस से कि फसलों की पैदावार बढ़ेगी. वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में आ रही चुनौतियों जैसे भूजल के स्तर का गिरना, भूमि की उर्वराशक्ति में कमी आना, भूमि की लवणता, क्षारीयता व जलभराव की स्थिति, जलवायु परिवर्तन, फसल विविधीकरण और फसल उत्पादन में कीटनाशक एवं रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग शामिल है.

ड्रोन (Drones)

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्टालों को दिए पुरस्कार
विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान सिंह मंडल ने बताया कि स्टालों में से सीड ग्रुप में शक्तिवर्धक सीड्स/आईएफएसए सीड्स, सुपर गोल्ड, करनाल व नाजीरेडू सीड्स/सुपर सीड्स ने क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा   पुरस्कार, इंसेक्टिसाइड्स व पेस्टीसाइड्स ग्रुप में ग्वाला और्गेनिक, देवी क्राप साइंस/मेगामनी और्गेनिक, मिकाडो क्राप साइंस/इंदोरमा ने क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार प्राप्त किए. फर्टिलाइजर ग्रुप में यारा, इफको/एनएफएल, बायोस्टड इंडिया/आईकेएमएस बायोटेक को क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा पुरस्कार, मशीनरी व ट्रैक्टर ग्रुप में फील्ड मार्शल, करतार ट्रैक्टर्स/एमएसडब्ल्यू, रतिया, बीरबल चीमा/रेनबो को पहला, दूसरा व तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया. फार्मास्यूटिकल ग्रुप में टाइटेनिक फार्मा, एमडी बायोसीड्स/बायोडिसेंट फार्मा और वेक्सटर हेल्थकेयर को क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया.

प्रगतिशील किसान समूह में सुभाष कंबोज, धर्मवीर/श्रीभगवान व राजेश कुमार क्रमश: पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे. इसी प्रकार हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग, कम्यूनिटी साइंस/एग्री टूरिज्म, एमबीबी/माइक्रोबायोलौजी को क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा पुरस्कार, सरकारी विभाग/एमएचयू/लुवास/एनजीओ में एमएचयू/आईएफएफडीसी, एचएसडीसी/नैशनल सीड्स, जिला विधिक सेवाएं/सरोज ग्रेवाल क्रमश: पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे.

 

ड्रोन तकनीक खेती के लिए खास

हिसार : बदलते समय के साथसाथ अगर हमें कृषि क्षेत्र में कृषि क्रियाओं को समयानुसार क्रियान्वित करने से जुड़ी चुनौतियों व श्रमिकों की कमी को देखते हुए ड्रोन तकनीक को अपनाना होगा. इस तकनीक को अपनाने से कृषि लागत को कम करने के साथसाथ संसाधनों की भी बचत की जा सकती है.

यह विचार चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने व्यक्त किया. वे विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कृषि मेला (खरीफ) के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे.

मेले में विशिष्ट अतिथि के रूप में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई मौजूद रहे.

इस बार मेले का मुख्य विषय खेती में ड्रोन का महत्व है. मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने आह्वान किया कि किसान समुदाय को नईनई तकनीकों व प्रौद्योगिकियों के बारे में समयानुसार अपडेट करते रहना समय की मांग है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि खेती में ड्रोन तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है, क्योंकि आज के दौर में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण को संरक्षित रखना मुख्य चुनौतियां हैं. साथ ही, किसानों द्वारा फसलों में कीटनाशक दवाओं का अधिक प्रयोग करने से इनसान अनेक बीमारियों की चपेट में भी आ रहा है. हमें उपरोक्त चुनौतियों से निबटना है तो किसानों को ड्रोन तकनीक को अपनाना होगा, क्योंकि ड्रोन के द्वारा कम समय में जल विलय उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवारनाशक का छिडक़ाव समान तरीके से व सिफारिश के अनुसार आसानी से किया जा सकता है, जिस से कम लागत होने के साथसाथ संसाधनों की भी बचत होगी.

मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने कृषि मेला खरीफ में महिलाओं की अधिक भागीदारी पर खुशी जताई. साथ ही कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र के अंदर महिलाओं की भूमिका दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है.

प्रो. बीआर कंबोज ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे विभिन्न फसलों की उन्नत 44 किस्में अनुमोदित व विकसित कर किसान समुदाय को माली मजबूती देने का काम कर रहे हैं, जिस की बदौलत हमारा विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में अनूठी पहचान बना रहा है.

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा ईजाद की गई अधिक पैदावार देने वाली किस्म, जिन में सरसों की रोग प्रतिरोधी व पाले के प्रति सहनशील किस्म आरएच 725, गेहूं की अधिक उत्पादकता देने वाली किस्म डब्ल्यूएच 1270 का जिक्र करते हुए खरीफ फसलों में चारे वाली ज्वार की अधिक पैदावार देने वाली सीएसवी 53 एफ व एचजे 1514, बाजरे की जिंक व लौह तत्व से भरपूर बायोफोर्टीफाइड किस्म एचएचबी 299 व एचएचबी 311 एवं मूंग की एमएच 421 किस्म के बारे में भी बताया.

महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने बताया कि हरियाणा का किसान प्रगतिशील किसान है. अपने प्रयासों की बदौलत वह अन्य राज्यों के किसानों, प्रौद्योगिकियों व नवाचारों के मुकाबले में सब से आगे हैं. इसलिए किसान खाद्य सुरक्षा, खाद्य भंडारण, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण संरक्षण जैसी अनेक चुनौतियों का हल निकालने में अपनी अहम भूमिका अदा कर सकता है. तिलहनी व दलहनी फसलों की मांग के मुकाबले उत्पादन कम है, जिस के कारण आयात करना पड़ता है. इस मांग को पूरा करने के लिए हमें खरीफ एवं रबी सीजन के अलावा रबी सीजन के तुरंत बाद आने वाली गरमी के मौसम में एक कम अवधि वाली फसल ले कर खेती को लाभदायक बनाने के बारे में भी प्रेरित किया. हकृवि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में शिक्षा, विस्तार के क्षेत्र सराहनीय काम कर रहा है.

गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि फसलों की अधिक पैदावार लेने के लिए पर्यावरण का अनुकूल होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हमें फसलों के अवशेष जैसे धान की पराली को नहीं जलाना चाहिए, क्योंकि पराली जलाने से एक ओर भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है, वहीं दूसरी ओर मित्र कीट एवं लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं. यदि फसल के अवशेष जलाने के बजाय किसान उन्हें खेत में ही समायोजित करें, तो भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहेगी व पर्यावरण संरक्षण होगा.

मुख्यातिथि सहित अन्य अधिकारियों ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी को सराहा
कृषि मेला खरीफ में विश्वविद्यालय के समस्त महाविद्यालयों की ओर से विभिन्न विषयों पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी लगाई गई, जिस में विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में सहित आधुनिक तकनीकों व कृषि यंत्र शामिल रहे. मुख्यातिथि सहित अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया. साथ ही, वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों के प्रयासों को सराहा.drone-taknik2

इस प्रदर्शनी में कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए किसानवैज्ञानिक संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया, जिस में किसानों ने फसलों से संबंधित समस्याओं के हल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से जाने.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि प्रो. बीआर कंबोज ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया. इस के अलावा उन्होंने 2 पुस्तकों का विमोचन करते हुए संबंधित विभागों के वैज्ञानिकों को बधाई दी.

कृषि मेला खरीफ में पहले दिन हरियाणा व अन्य राज्यों से तकरीबन 40 हजार किसानों ने भाग लिया. मंच का संचालन हरियाणा कला परिषद, हिसार मंडल के अतिरिक्त निदेशक रामनिवास शर्मा ने किया. मेले में उपस्थित किसानों के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया.

ड्रोन तकनीकी (Drone Technology) पर बूटकैंप का आयोजन

भागलपुर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर में 11 मार्च से 16 मार्च तक ड्रोन तकनीकी के ऊपर बूटकैंप का आयोजन किया गया. बीएयू, सबौर और सी-डैक पटना संयुक्त रूप से इलैक्ट्रौनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजना “यूएएस (ड्रोन और संबंधित प्रौद्योगिकी) में मानव संसाधन विकास के लिए क्षमता निर्माण” के तहत ड्रोन और संबद्ध प्रौद्योगिकी पर 6 दिवसीय बूटकैंप का आयोजन किया गया.

यह बूटकैंप प्रतिभागियों को ड्रोन उद्योग और संबंधित प्रौद्योगिकियों की समझ में सुधार करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ व्यापक ज्ञान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

ड्रोन और संबंधित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के ज्ञान का विस्तार करने के लिए सी-डैक द्वारा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप को सत्र विशेषज्ञों के रूप में एक मंच पर लाया गया है. इस बूटकैंप कार्यक्रम द्वारा ड्रोन डिजाइन, सिमुलेशन और उड़ान यांत्रिकी के लिए इंटरैक्टिव मंच प्रदान किया गया. इस कार्यक्रम में हुए मंथन से ड्रोन प्रौद्योगिकी के प्रमुख पहलुओं की व्यापक समझ विकसित होने की संभावना है.

इस 6 दिवसीय कैंप के समापन समारोह मे बोलते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह ने कहा कि बीएयू कृषि क्षेत्र में उच्च तकनीक के प्रयोग मे अग्रणी रहा है. ड्रोन तकनीक का खेती में प्रचालन को बढ़ाना उसी कड़ी का हिस्सा है. हमारे प्रयासों में जल्द ही बिहार में ड्रोन आधारित खेती एक क्रांति के रूप में सामने आएगी.

कार्यक्रम में जानकारी देते हुए सी-डैक पटना के वरिष्ठ निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा ने बताया कि यह बूटकैंप कार्यक्रम इलैक्ट्रौनिक्स और प्रोद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ड्रोन तकनीकी के विभिन्न पहलुओं के बारे में अवगत कराना है, ताकि वर्ष 2030 तक भारत ड्रोन तकनीकी के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बन सके.

नवीन हस्तक्षेपों के माध्यम से छात्र समुदाय के बीच उद्यमशीलता मानसिकता को बढ़ावा देना और तकनीकी प्रतिभा का पोषण करना है. इस बूटकैंप के आयोजन से कृषि में ड्रोन और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के विविध अनुप्रयोगों का पता लगाना. साथ ही, AI यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर जैसी प्रौद्योगिकियों के साथ ड्रोन के संभावित एकीकरण को प्रदर्शित करना.

किसानों के सपनों को उड़ान देते ड्रोन

खूंटी( झारखंड): जनजातीय गौरव दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के खूंटी से विकसित भारत संकल्प यात्रा का उद्घाटन किया. सरकारी कल्याण कार्यक्रमों को मैदानी स्तर पर उतारने के लिए एक देशव्यापी पहल के रूप में शुरू होने वाली इस पहल ने अब एक अभिनव मोड़ ले लिया है, जो कृषि और संबद्ध गतिविधियों में ड्रोन प्रौद्योगिकी की परिवर्तनगामी शक्ति को दर्शाता है.

विकसित भारत संकल्प यात्रा की पहुंच 2.60 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों और 4,000 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों तक हो गई है. यह यात्रा एक विशाल आउटरीच कार्यक्रम, प्रगति और समावेशिता का प्रतीक बन गई है.

जैसेजैसे यात्रा गति पकड़ रही है, एक उल्लेखनीय पहलू जो ध्यान का केंद्र बन रहा है, वह है, कृषि परिदृश्य में ड्रोन का एकीकरण. इस पहल का उद्देश्य किसानों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, उन्हें उत्पादकता और सतत व्यवहारों को बढ़ाने के लिए उपकरण प्रदान करना है.

ड्रोन : शो के सितारे

लोग विकसित भारत संकल्प यात्रा की आईईसी वैन और ड्रोन के शो की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं. ये दोनों शो के सितारे बन गए हैं. घनगरज के साथ उड़ने वाली मशीनें दर्शकों, विशेषकर किसानों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं, क्योंकि पूरे अभियान के दौरान इन का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाता है. यह प्रदर्शन कृषि में क्रांति लाने में ड्रोन की क्षमता को दर्शाते हैं. ध्यान सिर्फ बढ़ी हुई दक्षता पर नहीं है, बल्कि किसानों को सूझबूझ के साथ निर्णय लेने के लिए ज्ञान और उपकरणों के साथ सशक्त बनाने पर है.

ड्रोन प्रदर्शनों को देश के कोनेकोने में स्थित किसान समुदाय, विशेषकर महिला किसानों से अत्यधिक प्रशंसा प्राप्त हो रही है. केरल से हिमाचल प्रदेश तक, गुजरात से त्रिपुरा तक, संदेश स्पष्ट था – ड्रोन कृषि में सकारात्मक बदलाव का प्रेरक हैं.

प्रत्यक्ष प्रदर्शन में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को दर्शाया गया है, जिस में अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों से बचने के महत्व पर जोर दिया गया है. ड्रोन ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी (डाईअमोनियम फास्फेट), और अन्य सूक्ष्म पोषक उर्वरकों का छिड़काव किया, जो प्रौद्योगिकी द्वारा कृषि में लाई जाने वाली सटीकता और दक्षता को प्रदर्शित करता है. ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव के प्रत्यक्ष प्रदर्शन ने प्रभावी कीट प्रबंधन में इस तकनीक की क्षमता को और उजागर किया.

तरल उर्वरकों और कीटनाशकों के हवाई छिड़काव का प्रत्यक्ष प्रदर्शन एक ऐसी विधि को बढ़ावा देता है, जो सीमित समय सीमा में अत्यधिक उर्वरक उपयोग को नियंत्रित करती है.

नारी शक्ति: ड्रोन की क्षमता को उजागर करना

महिलाओं के नेतृत्व में विकास सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निरंतर प्रयास रहा है. इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र लौंच किया.

कोमलापति वेंकट रावनम्मा आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं. उन्होंने केवल 12 दिनों में कृषि उद्देश्यों के लिए ड्रोन उड़ाने का कौशल हासिल कर लिया और 30 नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अनुभवों को साझा किया.

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांवों में कृषि उद्देश्यों के लिए ड्रोन को नियोजित करने के निहितार्थ के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि ड्रोन समय की बचत के साथसाथ पानी से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने में भी मदद करता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वेंकट जैसी महिलाएं उन लोगों के लिए मिसाल हैं, जो भारत की नारी शक्ति की क्षमता पर संदेह करते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि निकट भविष्य में कृषि में ड्रोन का उपयोग महिला नीति विकास का प्रतीक बन जाएगा. इस के अतिरिक्त उन्होंने विकसित भारत संकल्प यात्रा में महिलाओं की भागीदारी के महत्व पर जोर दिया.