Animal Care. हमारे देश में खास कर गांवों में पशुओं की बीमारियों की रोकथाम और उचित उपचार की हमेशा से कमी रही है, लेकिन अब इन बीमारियों की रोकथाम और सही इलाज के लिए सरकार द्वारा अनेक तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.

यहां हम पशुओं की कुछ बीमारियों और उन की रोकथाम के बारे में बता रहे हैं:

संक्रामक गर्भपात:

पशुओं में गर्भपात या मरे बच्चे का जन्म एक जीवाणु ब्रूसेल्ला एबार्टस के कारण होता है. ब्रूसेल्ला एबार्टस जंगली भैंस और एल्क को भी अपनी चपेट में ले लेता है. कुछ प्रजातियां इस जीव के पालनपोषण के लिए पोशिता का काम करती हैं. इस के अलावा बू्रसेल्ला एबार्टस इनसानों में भी बीमारी पैदा करता है.

बू्रसेल्ला एबार्टस गाय, जंगली भैंस, अफ्रीकी भैंस, एल्क और ऊंट यानी दुधारू पशुओं में होता है. एबार्टस जरायुनाल, भ्रूण, भू्रण का तरल पदार्थ, संक्रमित पशुओं की योनि रिसाव और प्रजनन लिंग के साथ संपर्क से फैलता है. यह पशु के दूध, पेशाब और वीर्य में भी पाया जाता है. संक्रमण आमतौर पर अंदरूनी और श्लेष्म झिल्ली के माध्यम से होता है, लेकिन कभीकभी यह घावों से भी फैलता है, जिस से पशुओं में गर्भपात हो जाता है. ज्यादा नमी, कम तापमान और धूप की कमी में यह जीवाणु पानी, गर्भपात भू्रण, ऊन, घास और उपकरणों में कई महीने तक जीवित रहता है.

लक्षण

गर्भपात आमतौर पर दूसरी छमाही (6 से 8 महीने) के दौरान होता है. योनि और गर्भाशय पर सूजन हो जाती है. योनि का बाहरी भाग लाल और दाने पड़े हुए दिखाई देते हैं. कुछ बछड़े जिंदा लेकिन कमजोर पैदा होते हैं और जन्म के फौरन बाद ही वे मर जाते हैं. दूध की मात्रा कम हो जाती है और गर्भपात की दर 30 से 80 फीसदी तक हो सकती है.

रोकथाम व उपचार:

बू्रसेल्ला एबार्टस के 2 टीके उपभेद-19 और आरबी-51 को इस बीमारी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. गर्भपात होने की दशा में पशु की जांच करा कर बीमारी का पता लगाएं. पशुओं को साफ, संतुलित आहार और चारा दें. पशुओं को इस बीमारी से रहित सांड़ से प्रजनन कराना चाहिए. पशु आवास को कीटाणुनाशक घोल से साफ करना चाहिए. इस बीमारी को खत्म करने के लिए ढाई फीसदी सोडियम हापोक्लोराइट, 3 फीसदी कास्टिक सोडा, 20 फीसदी चूने का घोल या 2 फीसदी फार्मेल्डिहाइड घोल से पशु आवास को साफ करना चाहिए.

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