Pigs and Poultry. मांस कारोबार के लिए अब नागालैंड में शूकर और पोल्ट्री के मानवीय वध तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे पशुओं को पीड़ा से नहीं गुजरना होगा. क्या है यह तकनीक और कैसे होगा इसका इस्तेमाल?

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र, मेद्जीफेमा, नागालैंड, ने आईसीएआर-राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुपृ-एनएमआरआई), हैदराबाद तथा नागालैंड सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अंतर्गत दीमापुर और चुमौकेदिमा के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के कार्यालयों के सहयोग से मेद्जीफेमा में शूकर एवं पोल्ट्री के लिए मानवीय वध तकनीक के आरंभ एवं विद्युत स्टनिंग उपकरणों के वितरण का कार्यक्रम का आयोजन हुआ.

मांस विक्रेताओं के लिए ख़ास कदम

यह कार्यक्रम नागालैंड में पशु कल्याण तथा खाद्य सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ. दीमापुर और चुमौकेदिमा जिलों के स्थानीय मांस विक्रेताओं ने संस्थान में पहली बार शूकरों और पोल्ट्री के लिए मानवीय वध विधियों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुनील डोले, प्रमुख, भाकृअनुप-मिजोरम केंद्र, कोलासिब, ने प्रतिभागियों को मानवीय वध पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा, कानूनी मानकों का पालन तथा मांस क्षेत्र में सकारात्मक उदाहरण स्थापित करने में सहायता मिलेगी.

उन्होंने तकनीक को प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए वैज्ञानिक समुदाय की ओर से निरंतर तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का आश्वासन भी दिया.

संबोधन में डॉ. गिरीश पाटिल एस., निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसी ऑन मिथुन ने कहा कि कई क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक वध पद्धतियान पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित मानवीय वध प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं है. उन्होंने बताया कि ऐसी पद्धतियों से पशुओं को अनावश्यक पीड़ा होती है तथा स्वच्छता और मांस की गुणवत्ता से संबंधित चिंताएं उत्पन्न हो सकती हैं.

मानवीय वध तकनीक क्या है?

मांस के लिए पशुओं का वध पारंपरिक तरीके से करने पर पशु अत्यंत पीड़ा से गुजरता है. लेकिन इस तकनीक के माध्यम से वध से पहले पशुओं को अचेत कर दिया जाता है, जिससे उनकी पीड़ा और तनाव कम होता है तथा मांस की स्वच्छता एवं उपभोक्ता सुरक्षा में सुधार होता है.

कसाइयों को इस तकनीक को बढ़ाने के लिए किया प्रेरित

इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रतिभागियों को विद्युत स्टनिंग उपकरणों के सही उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. प्रत्यक्ष प्रदर्शन के जरिए से उन्हें उपकरणों के इस्तेमाल करने का अनुभव और आत्मविश्वास प्राप्त हुआ. कसाइयों को स्थानीय बाजारों में स्वच्छ एवं मानवीय मांस प्रबंधन पद्धतियों को व्यापक रूप से अपनाने और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया.

इस पहल के अंतर्गत 28 लाभार्थियों को विद्युत स्टनिंग उपकरणों के पूर्ण सेट वितरित किए गए, ताकि जमीनी स्तर पर मानवीय वध प्रथाओं और स्वच्छ मांस प्रबंधन को बढ़ावा मिल सके.

यह कार्यक्रम नागालैंड सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अंतर्गत दीमापुर और चुमौकेदिमा के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के कार्यालयों के सहयोग से आयोजित किया गया. Pigs and Poultry

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