IVF : अभी तक गाय को लेकर ही आप लोगों तक खबर पहुंची थी कि अब बछिया ही होगी, लेकिन आने वाले समय में भैंस से भी आप उन्नत नस्ल के मादा बच्चे ले सकते हैं. इस काम में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने भैंसों, खासकर ब्लैक डायमंड और मुर्रा नस्ल में आईवीएफ तकनीक में सफलता पाई है. इससे पशुपालकों की बढ़ेगी आमदनी और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा.
पशुपालकों की बढ़ेगी आमदनी
बिहार में पशुपालन के क्षेत्र में यह एक क्रांतिकारी कदम है. पशुओं में आईवीएफ तकनीक पहली बार भैंसों पर सफल हुई है. इस सफलता से भैंसों से अच्छी नस्ल तैयार हो सकेगी जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आमदनी में भी इजाफा होगा खासकर ब्लैक डायमंड कही जाने वाली भैंस के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ेगी और डेयरी उद्योग में तरक्की के नए रस्ते खुलेंगे.
मुर्रा नस्ल के साथ हुई परीक्षण की शुरुआत
पशु वैज्ञानिकों द्वारा मुर्रा नस्ल के साथ इस परीक्षण की शुरुआत की गई है, जिसमें उन्हें सफलता मिली है और अब ब्लैक डायमंड मानी जाने वाली भैंसों पर भी अब आईवीएफ तकनीक का सफल प्रयोग किया गया है. वहां भी कामयाबी के रास्ते खुल रहे हैं.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत मिली यह सफलता
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत स्थापित प्रयोगशाला में इस तकनीक पर कार्य किया गया है. इस शोध में डॉ. दुष्यंत यादव के अलावा डॉ. शीतल, डॉ. एस. पी. साहू, डॉ. सी. एस. आजाद और डॉ. प्रमोद कुमार शामिल हैं.
क्या होता है आईवीएफ?
डॉ. दुष्यंत यादव ने किसानों से आईवीएफ तकनीक के बारे में समझाते हुए बताया कि यह नस्ल सुधार की सबसे अत्याधुनिक तकनीक है. मान लीजिए कि किसी किसान के पास एक ऐसी गाय है जो 50 लिटर तक दूध देती है. सामान्य तरीके से इस गाय से सालभर में एक बच्चा जन्म लेता है. लेकिन आईवीएफ के जरिए एक ही अच्छी नस्ल वाली मादा से कई बच्चे पैदा कराए जा सकते हैं.
हो सकता है इतना खर्चा
बिहार में फिलहाल भैंसों पर यह तकनीक परीक्षण के दौर में है, इसलिए अभी इच्छुक किसान इसका लाभ मुफ्त में भी ले सकते हैं. लेकिन आने वाले समय में इस काम के लिए कुछ तय रकम या शुल्क भी तय किया जा सकता है.
आम पशुपालकों को मिलेगा लाभ
आज के समय में डेरी फार्मिंग के जरिए पशुपालक अच्छी कमाई भी कर रहे हैं और आने वाले समय में इस काम को अधिक मुनाफेदार बनाया जा सके इसके लिए पशु विशेषज्ञों का यह कदम निश्चित ही फायदेमंद साबित होगा और जल्दी ही यह तकनीक आम किसानों और पशुपालकों तक पहुंचा सके इस की तैयारी चल रही है, ताकि वे भी उन्नत नस्ल और बेहतर उत्पादन का लाभ उठा सकें.





