आलू की फसल तैयार होने के कगार पर है, लेकिन इन दिनों फसल पर झुलसा रोग लगने का खतरा भी अधिक होता है, जो आपकी फसल की उपज में कमी लाने का खास कारण है. कैसे करें इस रोग से रोकथाम और कैसे पाएं आलू की भरपूर पैदावार, आइए जानते हैं : Crop Disease
झुलसा रोग के क्या हैं लक्षण
आलू की फसल में झुलसा रोग एक प्रमुख रोग है, जो प्रायः फसल की बढ़वार के समय में दिखाई देता है. इसके लक्षणों में पत्तियों पर भूरे या काले रंग के धब्बे बनना तथा पत्तियों का सूखकर झुलस जाना शामिल है. रोग के बढ़ने पर तना और कंद भी प्रभावित हो जाते हैं, जिससे उपज और गुणवत्ता में भारी कमी आती, पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं और तना और कंद भी प्रभावित हो जाते हैं.
कब अधिक होता है रोग का खतरा
यह रोग अधिक नमी, लगातार बरसात और अनुकूल तापमान की स्थिति में तेजी से फैलता है और ऐसे मौसम में आलू की फसल में झुलसा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, Crop Disease इसलिए समय पर प्रबंधन जरूरी है.
कैसे हो रोग की रोकथाम
इस रोग की रोकथाम के लिए रोग-प्रतिरोधी किस्मों को लगाना, संतुलित मात्रा में उर्वरक प्रबंधन, फसलचक्र अपनाना और खेत में उचित जल निकासी आवश्यक है. इसके अतिरिक्त, मैंकोजेब या मेटालेक्सिल युक्त फफूंदनाशकों का समय पर छिड़काव करें. यह रोग नियंत्रण में काफी प्रभावी होता है.
क्या होता है फसल पर असर
झुलसा रोग होने के कारण आलू कंदों का आकार छोटा रह जाता है और भंडारण क्षमता भी घट जाती है. इसकेनियंत्रण के लिए रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन, Crop Disease संतुलित उर्वरक प्रयोग, उचित फसलचक्र अपनाना और खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था आवश्यक है.
आलू की पूरे साल मांग रहती है, इसलिए आलू से अच्छी उपज लेने के बाद उसे लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है और जब बाजार में अच्छा भाव मिले उस समय उसकी बिक्री कर अच्छा लाभ भी लिया जा सकता है.





