खेत में एक निश्चित फसल न उगा कर फसलों को अदलबदल कर उगाना चाहिए. किसी निश्चित क्षेत्र पर निश्चित अवधि के लिए भूमि की उर्वरता को बनाए रखने के उद्देश्य से फसलों को अदलबदल कर उगाने की क्रिया को फसल चक्र कहते हैं अथवा किसी निश्चित क्षेत्र में एक नियत अवधि में फसलों को इस क्रम में उगाया जाना कि उर्वरा शक्ति का कम से कम नुकसान हो, फसल चक्र कहलाता है.

फसल चक्र के निर्धारण में कुछ मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखना जरूरी होता है, जैसे :

* अधिक खाद चाहने वाली फसलों के बाद कम खाद चाहने वाली फसलों का उत्पादन करें.

* अधिक पानी चाहने वाली फसल के बाद कम पानी चाहने वाली फसल लगाएं.

* अधिक निराईगुड़ाई वाली फसल के बाद कम निराईगुड़ाई चाहने वाली फसल लगाएं.

* दलहनी फसलों के बाद अदहलनी फसलों का उत्पादन करें.

* अधिक मात्रा में पोषक तत्त्वों का शोषण करने वाली फसल के बाद खेत को परती रखना चाहिए.

* एकनाशी जीवों से प्रभावित होने वाली फसलों को लगातार नहीं उगाना चाहिए.

* उथली जड़ वाली फसल के बाद गहरी जड़ वाली फसल को उगाना चाहिए.

* फसलों का समावेश स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप रखना चाहिए.

* फसल का समावेश जलवायु तथा किसान की आर्थिक क्षमता के अनुरूप करना चाहिए.

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