Millet Farming: आज से 20-30 साल पहले भारत में मोटे अनाजों (Millet Farming) में ज्वार-बाजरा की खेती खूब होती थी, क्योंकि उस समय सिंचाई के इतने साधन मौजूद नहीं थे और ज्यादातर खेती मानसून पर ही निर्भर थी. ज्वार-बाजरा कम पानी वाली फसलें हैं, इसलिए तब इनके खराब होने का डर भी कम था. यह एक सोचने का विषय है कि धान-गेहूं से ज्यादा पोषक तत्त्व वाला अनाज होने के बावजूद बाजरे का रकबा कम होता जा रहा है. पिछले 50 सालों में बाजरे की पैदावार में गिरावट आई है. लेकिन अब किसान फिर से मोटे अनाजों (Millet Farming) की खेती की तरफ लौट रहे हैं, क्योंकि अब बाजार में मोटे अनाजों (Millet Farming) की मांग बढ़ रही है.

अधिक आमदनी के लिए उन्नत किस्म जरूरी

अब बाजरे के उन्नत किस्म के बीज बाजार में आने लगे हैं, जिनसे किसानों को अच्छी पैदावार मिलती है. साथ ही, किसानों को बाजरे की अहमियत समझ आने लगी है.

कई फूड प्रोडक्ट कंपनियां बाजरे के बिसकुट, दलिया आदि बना रही हैं, जिससे बाजार में बाजरे की अच्छी मांग है.

अपनाएं उन्नत किस्में

बाजरे की हाईब्रिड क्वालिटी 1827

बाजरे की हाईब्रिड क्वालिटी 1827 है. इस का सिट्टा (भुट्टा) लंबा, मोटा व ठोस होता है. पक्षी इसमें चोंच नहीं घुसा पाते. जिससे फसल पक्षियों से महफूज रहती है. इसका तना मजबूत व लचीलापन लिए होता है, जो गिरकर टूटता नहीं है. यह अच्छी पैदावार देता है. कीट-बीमारियां कम लगती हैं. पकने के बाद भी यह काफी समय तक हरा रहता है और इस में मीठापन होता है. इसे पशु बड़े ही स्वाद से खाते हैं.
इसका पकने का समय 80 से 88 दिन है. 90 दिन का बाजरा होने पर इसे काट देना चाहिए.

संकर बाजरा 1818
ज्यादा ठोस दाने व ज्यादा पैदावार वाला यह बाजरा 80 से 85 दिनों में तैयार होता है. इसका सिट्टा भी गठीला व मोटा होता है और ज्यादा फुटाव देता है. इसके दाने का रंग हल्का भूरा होता है. इसकी रोटियां उत्तम व स्वादिष्ठ बनती हैं.

बोआई का समय
अगर बरसात हो गई हो तो मई माह में भी इन किस्मों को बो सकते हैं, वरना 15 जून से लेकर 20 जुलाई तक इस की बोआई करनी चाहिए.

ज्यादा पैदावार के लिए सुझाव
• मिट्टी हल्की से मध्यम हो.
• 1 बार गहरी जुताई के बाद 2-3 बार हल्की जुताई करें.
• 1 एकड़ खेत में 8-10 बुग्गी (बैलगाड़ी) या 5 मीट्रिक टन के हिसाब से खाद डालें.
• 1-5 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज बोएं.
• बीज से बीज की दूरी 10 सेंटीमीटर व लाइन से लाइन की दूरी 40 सेंटीमीटर रखें.
• फुटाव और दाने भरने के समय खेत में सही मात्रा में नमी रहना बहुत जरूरी है.

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