Sesame Farming-
तिल को भले ही छोटा दाना कहा जाता है, पर बाजार में इस की बड़ी इज्जत है. तेल, तिलपट्टी, लड्डू, गजक और बेकरी प्रोडक्ट्स… हर जगह इस की मांग सालभर बनी रहती है. किसानों के लिए सब से अच्छी बात यह है कि यह कम पानी में तैयार होने वाली फसल है. जहां दूसरी फसलें पानी के बिना सूख जाती हैं, वहां तिल कम लागत में भी मुनाफा देती है.
बोआई का सही समय क्या है?
भारत में तिल मुख्य रूप से खरीफ की फसल है.
–खरीफ सीजन : उत्तर और मध्य भारत में जूनजुलाई में मानसून की पहली बारिश के बाद बोआई करें. खेत में हलकी नमी होनी चाहिए.
-गरमी का सीजन : जहां नहर या ट्यूबवैल की सुविधा है, वहां फरवरीमार्च में भी बोआई हो सकती है.
कैसी मिट्टी चाहिए?
-तिल की खेती के लिए हलकी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सब से अच्छी मानी जाती है.
-तापमान 25-35 डिगरी के बीच हो तो अंकुरण बढ़िया होता है.
-खेत समतल हो और पानी निकासी का इंतजाम होनी चाहिए. तिल के खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए. 24 घंटे भी पानी रुका तो जड़ गलने लगती है.
कैसे करें बोआई?
तिल की खेती में छिटकवां विधि से बोआई करने से बचें तथा कतारों में बोआई करें. कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सैंटीमीटर रखें.
पौधों की दूरी का रखें ध्यान
बोआई के 12-15 दिन बाद जब पौधे 3-4 इंच के हो जाएं, तो घने पौधों को निकाल दें. पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सैंटीमीटर रखें. इस से हर पौधे को धूप और हवा मिलेगी और फसल गिरेगी नहीं. उचित पैदावार भी मिलेगी.
खाद और उर्वरक प्रबंधन
-बोआई से 15 दिन पहले 4-5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति एकड़ डालें.
-नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मात्रा मिट्टी जांच के अनुसार ही डालें.
-नाइट्रोजन को 2 बार में दें. आधी बोआई के समय और आधी फूल आने से पहले. एकसाथ ज्यादा यूरिया डालने से पौधा तो बढ़ेगा, पर फल कम लगेंगे.
पानी और खरपतवार का रखें ध्यान
-बारिश न हो तो 2 से 3 सिंचाई काफी हैं. सब से जरूरी समय है फूल आने और फली में दाना बनने का समय. इस समय नमी जरूर रखें.
-पहले 20-25 दिन फसल को खरपतवार से बचाना सब से जरूरी है, इसलिए समय पर निराईगुड़ाई करें. अगर खरपतवारनाशी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो कृषि विशेषज्ञ के अनुसार ही दवा का इस्तेमाल करें.
उन्नत किस्में कौन सी लगाएं?
टी-65, जीटी-10, आरटी-125, आरटी-46 जैसी किस्में कई राज्यों में लोकप्रिय किस्में हैं. कोई किस्म 75 दिन में तैयार होती है तो कोई 90 दिन में, इसलिए अपने एरिया की जलवायु के अनुसार किस्म का चुनाव करें.
रोगों से कैसे बचाएं?
तिल की खेती में तना गलन, जड़ गलन और पत्ती झुलसा रोग होना आम हैं, इसलिए बरतें यह सावधानी.
-हर साल एक ही खेत में तिल न लगाएं, फसलचक्र अपनाएं.
-प्रमाणित और उपचारित बीज ही बोएं.
-खेत में पानी न रुकने दें और रोग दिखते ही कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें, मनमरजी से दवा न डालें.
तिल की खेती (Sesame Farming) कम लागत की स्मार्ट फसल है. सही किस्म, समय पर बोआई और जलनिकासी वाली जमीन… इन 3 बातों का ध्यान रख लिया तो छोटा दाना भी बड़ा मुनाफा दे जाएगा





