Weather : पिछले दिनों मार्च महीने में बेमौसम बारिश से गेहूं, सरसों, सब्जी आदि की फसल को भारी नुकसान हुआ. किसानों की फसल बरबाद हुई और बाजारों में भी सब्जी के दाम बढ़ गए.
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक प्रो. रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि बेमौसम बारिश से पोस्ट-हार्वेस्ट गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जिससे जल्द खराब होने वाली फलों/सब्जियों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है. कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल सड़ने की आशंका बनेगी. मौसम (Weather) साफ होने पर खलिहान में रखी फसल को फैला कर सुखाएं. जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित करें जिससे फसलों को बचाया जा सके. मौसम (Weather) ठीक होने पर फसल सूखने के बाद तुरंत गेहूं, सरसों की कटाई-मड़ाई कर अनाज को सुखाकर भंडारण करें.
बरसात में गेहूं फसल में होता है भारी नुकसान. इन दिनों गेहूं फसल में दाने बन चुके होते हैं और कुछ ही दिनों में फसल की कटाई शुरू हो जाती है. लेकिन इस बेमौसम आंधी-बरसात से जगह-जगह फसल गिर गई है, खेतों मैं जलभराव हो गया है, जिससे किसानों की उपज कम और उसकी गुणवत्ता खराब होने के आसार बन रहे हैं.
बरसात के कारण फसल को नुकसान हो सकता है, जिससे उत्पादन कम हो सकता है. फसल की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे उसकी कीमत कम हो सकती है. बरसात के कारण फसल का भंडारण मुश्किल हो जाता है, जिससे फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है. बरसात के कारण फसल की कटाई मुश्किल हो जाती है, जिससे फसल को समय पर कटाई नहीं की जा सकती है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है इसका समाधान
बरसात या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनमें से एक प्रमुख योजना है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना. इस योजना के तहत, किसानों को उनकी फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाता है.Weather
कितना मिलता है मुआवजा
100 फीसदी फसल खराब होने पर प्रति एकड़ 15,000 रुपए. 25-50 फीसदी फसल नुकसान पर प्रति एकड़ 9,000 रुपए. 51-75 फीसदी फसल नुकसान पर प्रति एकड़ 12,000 रुपए.
कैसे मिलेगा मुआवजा
फसल खराब होने के 72 घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी है. हेल्पलाइन नंबर 14447 पर कॉल करें या कृषि रक्षक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें.
किस किसान को मिलेगा मुआवजा
फसल बीमा योजना का लाभ उन किसानों को मिलता है जो इस प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पंजीकृत हैं और जिनकी फसल प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बरसात, ओलावृष्टि, सूखा आदि से खराब हो जाती है.
फसल बीमा योजना के लिए पात्रता
-किसान की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए.
-किसान के पास खेती योग्य जमीन होनी चाहिए.
-किसान ने फसल बीमा योजना में पंजीकरण करवाया हो.
-किसान ने प्रीमियम राशि का भुगतान किया हो.
फसल बीमा योजना के तहत लाभ
-फसल खराब होने पर मुआवजा दिया जाता है.
-मुआवजे की राशि फसल के नुकसान के अनुसार दी जाती है.
-मुआवजा राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाती है.
अगर किसान ने फसल बीमा नहीं कराया है तो क्या उसे भी सरकारी मदद मिल सकती है? यह सवाल उठना लाजिमी है की क्या बिना फसल बीमा के किसानों को भी सरकारी मदद मिलती है? यदि आपकी फसल प्राकृतिक आपदा से खराब हो जाती है, तो आपको राज्य सरकार की फसल सहायता योजना के तहत मदद मिल सकती है. इस योजना के तहत, किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपए से 22,500 रुपए तक की मदद मिलती है, जो फसल के प्रकार और नुकसान की मात्रा पर निर्भर करती है.
मुआवजा दिलवाने में पटवारी की होती है खास भूमिका
फसल खराब होने पर पटवारी की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि पटवारी ही फसल खराब होने की सूचना मिलने पर करता है ये काम :
-पटवारी फसल खराब होने की सूचना दर्ज करता है और इसकी रिपोर्ट बनाता है.
-पटवारी फसल खराब होने का सर्वे करता है और इसकी रिपोर्ट बनाता है.
-पटवारी फसल खराब होने का पंचनामा बनाता है, जिसमें फसल खराब होने की जानकारी और नुकसान की मात्रा दर्ज होती है.
-पटवारी फसल खराब होने की रिपोर्ट तहसीलदार को भेजता है, जो आगे की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होता है.
-पटवारी किसान को फसल खराब होने की सूचना देता है और किसान को जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए कहता है.
बेमौसम बरसात हो, सूखा हो या हो कोई प्राकृतिक आपदा ये किसान की खड़ी फसल को बरबाद करने और किसन को तबाह करने में देर नहीं लगाते. पलक झपकते ही किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. ऐसे में किसानों को सरकारी मदद मिलना बहुत जरूरी हो जाता है, इसलिए किसानों को जागरूक होना बहुत जरूरी है.Weather





