Mother Dairy. अगर आपके घर में गाय या भैंस है, तो आने वाले समय में सिर्फ दूध ही नहीं, गोबर भी आपकी नियमित आय का जरिया बन सकता है. देश की प्रमुख डेयरी कंपनी मदर डेयरी गोबर के संग्रह और उसके व्यावसायिक उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा रही है. इस पहल का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथसाथ जैविक खेती, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है.
सबसे खास बात यह है कि गोबर खरीद का मॉडल भारत में नया नहीं है. कई राज्यों और संस्थाओं ने पहले ही इसे अपनाया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. ऐसे में मदर डेयरी की पहल को भी पशुपालकों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
गोबर अब नहीं ‘वेस्ट’, बन गया ‘वेल्थ’
आज गोबर केवल खेत में डालने या उपले बनाने तक सीमित नहीं है. इससे बायोगैस, बायो-सीएनजी, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक उर्वरक तैयार किए जा रहे हैं. यही वजह है कि गोबर अब एक मूल्यवान हरा सोना बन चुका है.
गोबर खरीद के पहले भी सफल रहे हैं मॉडल
छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना
गोबर खरीद का सबसे सफल उदाहरण छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना है. इस योजना के तहत सरकार पशुपालकों से गोबर खरीदकर उससे वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक उत्पाद तैयार कराती है. इस मॉडल से लाखों ग्रामीण परिवारों और महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मिल रहा है तथा पशुपालकों की आय भी बढ़ रही है.
इंदौर नगर निगम का बायो-सीएनजी मॉडल
मध्य प्रदेश के इंदौर में नगरनिगम ने गोबर और जैविक कचरे से बायो-सीएनजी बनाने का सफल मॉडल विकसित किया. इससे स्वच्छ ईंधन के उत्पादन के साथ गोबर के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं मजबूत हुई हैं.
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की पहल
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) भी कई राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से गोबर आधारित बायोगैस, जैविक खाद और गोबर प्रबंधन को बढ़ावा दे रहा है. इससे पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है.
इनके अलावा देश के अनेक राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, गुजरात और हरियाणा सहित कई राज्यों में गोबर से जैविक खाद, बायोगैस और बायो-सीएनजी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर विभिन्न परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं.
मदर डेयरी की पहल से क्या बदलेगा?
मदर डेयरी के बड़े स्तर पर गोबर खरीदने से सीधा फायदा उन पशुपालकों को मिलेगा जो पहले गोबर को बेकार समझकर छोड़ देते थे. अब वही गोबर अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पशुपालन केवल दूध बेचने का व्यवसाय नहीं रहेगा. यदि गोबर की नियमित खरीद शुरू होती है, तो एक ही पशु से दोहरी आय संभव होगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा और डेयरी सेक्टर में भी नया बदलाव होगा, अधिक मुनाफा मिलेगा. Mother Dairy





