Sugarcane . देश का चीनी उद्योग अब सिर्फ चीनी बनाने तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि आने वाले 2026-27 पेराई सत्र के लिए चीनी मिलें नई तैयारी कर रही हैं. अब उनका लक्ष्य गन्ने से केवल चीनी ही नहीं, बल्कि एथेनॉल और बिजली बनाकर तीन गुनी कमाई करना है यानी हर टन गन्ने का पूरा उपयोग कर ज्यादा मूल्य हासिल करना.
गन्ने का मिलेगा अधिक दाम
इस बार केंद्र सरकार ने गन्ने का मूल्य 365 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल से करीब 2.8 फीसदी अधिक है. वहीं उत्तर प्रदेश में किसानों की नजर राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) पर है. इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन चीनी मिलें इसी को ध्यान में रखकर अपनी खरीद और भुगतान की योजना बना रही हैं.
किसानों का भुगतान सबसे बड़ी जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार किसानों को गन्ना खरीदने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना जरूरी है, इसलिए चीनी मिलें पहले से ही इसकी तैयारी में जुटी हैं. समय पर भुगतान से किसानों का भरोसा भी बना रहता है.
एथेनॉल से मिलों को मिल रही मजबूती
आज एथेनॉल चीनी उद्योग की कमाई का बड़ा आधार बन चुका है. ऑयल कंपनियां एथेनॉल का भुगतान आमतौर पर तीन सप्ताह के भीतर कर देती हैं. इससे चीनी मिलों को नकदी की कमी नहीं होती और किसानों का भुगतान समय पर करने में मदद मिलती है.
अब सिर्फ गन्ना नहीं, मक्का भी बना सहारा
देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल होने के बाद अब एथेनॉल उत्पादन में मक्का की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. ऐसे में जिन चीनी मिलों के पास गन्ने के रस, शीरा और अन्य फीडस्टॉक से एथेनॉल बनाने की सुविधा है, वे बाजार में ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं.
बिजली उत्पादन भी बढ़ाएगा आमदनी
आज कई चीनी मिलें गन्ने के अवशेष से भी बिजली बना रही हैं. अगर यह को-जनरेशन सिस्टम पूरी क्षमता से काम करे तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर मिलों को अच्छी अतिरिक्त आय मिल सकती है.
भविष्य की चीनी मिलें होंगी ज्यादा आधुनिक
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वही चीनी मिलें सबसे सफल होंगी जो पहले से बेहतर तैयारी करेंगी, किसानों का भुगतान समय पर करेंगी, आधुनिक तकनीक अपनाएंगी और चीनी के साथ एथेनॉल व बिजली उत्पादन पर भी बराबर ध्यान देंगी.
किसानों के लिए यह बदलाव की अच्छी खबर है. आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत चीनी मिलें गन्ने की समय पर खरीद और भुगतान करने में सक्षम होंगी. ऐसे में किसान भी बेहतर गुणवत्ता वाली गन्ना किस्मों और वैज्ञानिक खेती अपनाकर इस बदलते दौर का पूरा लाभ उठा सकते हैं





