Spices: मसाला उत्पादन और मसाला निर्यात के मामले में भारत का पहला स्थान है, इसीलिए भारत को ‘मसालों का घर’ भी कहा जाता है. मसाले हमारे भोजन को जायका तो देते ही हैं, साथ ही हम इस से विदेशी मुद्रा भी कमाते हैं.
न करें लापरवाही
मसाले की फसलों में कटाई के बाद भंडारण में रखरखाव की लापरवाही से उन में सूक्ष्म जीवों का प्रकोप हो जाता है. इन सूक्ष्म जीवों में कवक (मोल्ड) व जीवाणु मुख्य होते हैं, जो रासायनिक क्रिया द्वारा जहर पैदा करते हैं. कवक या फफूंद जो जहर बनाते हैं, उसे विष फफूंद कहते हैं.
ये विष फफूंद मसालों की महक को नष्ट करते हैं और स्वास्थ्य के लिए काफी घातक होते हैं. ये कैंसर भी पैदा कर सकते हैं.
निर्यात होने वाले खाद्य पदार्थ जीवाणु, फफूंद, किसी नुकसानदायक रसायन या कीटनाशक दवा के अवशेषों या किसी दूसरी मिलावट जैसे कीट, कूड़ाकरकट, जंतुओं के मलमूत्र या खेत, गोदाम व ढुलाई के समय होने वाली अशुद्धियों से रहित होने चाहिए. खाद्य पदार्थों में मिलावट से कई प्रकार की बीमारियां पैदा हो सकती हैं.
बचाव के तरीके
मसाला फसलों की कटाई समय पर करें. कटाई के बाद मसाला फसलों के बीजों को मिलावटी पदार्थों से बचाएं. चूहों, जानवरों और चिडि़यों के अवशिष्ट (बाल, मलमूत्र, पंख), खेत या भंडारण के कीटों के कवक (मोल्ड), जीवाणु और घूल, मिट्टी, कंकड़ वगैरह मिलावटी पदार्थ कहलाते हैं. इन सभी मिलावटी पदार्थों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि विष फफूंद न पनपे.
भंडारण से पहले
कटाई के बाद मसाला फसलों की सफाई के लिए पक्के फर्श, प्लास्टिक की चादर या तिरपाल का इस्तेमाल करें.
बारिश की आशंका होने पर खलिहान को तिरपाल से ढक कर रखें, ताकि मसाले भीगने न पाएं. भंडारण या रखरखाव के समय सही नमी का खयाल रखें और मसालों को साफसूखी बोरियों में भरें.
कटाई के बाद भंडारण कक्ष में चूहों व पक्षियों को न घुसने दें. भंडारण कक्ष में मसालों से भरी बोरियों को सीधे फर्श के संपर्क में न रखें. बोरियों को दीवार से सटा कर न रखें, क्योंकि इस से नमी का खतरा रहता है और नमी से विष फफूंद पनपते हैं.
कहने को तो सब्जियों व अन्य पकवानों में मसाले जरा से ही डाले जाते हैं, मगर उन की अहमियत और वजूद बहुत ज्यादा होता है. मसालों की सही मात्रा किसी भी पकवान को लजीज बना देती है. दुनिया भर में भारत के इन्हीं मसालों की धाक है, मगर इन्हें खुशबूदार व जायकेदार बनाए रखना बेहद जरूरी है.





