Grafting: एक ही पौधे पर बैगन और टमाटर आना अजूबा लग सकता है, लेकिन यह सच है. ग्राफ्टिंग (Grafting) के जरिए एक ही पौधे में बैगन और टमाटर उगाने की यह एक अलग तकनीक है. आइए जानते हैं, क्या है यह तकनीक :

क्या है यह तकनीक

एक ही पौधे पर एक से अधिक प्रजाति के फल-सब्जी उत्पादन की इस तकनीक में एक ही परिवार के दो या दो से अधिक पौधों को एक-साथ ग्राफ्ट किया जाता है, ताकि एक ही पौधे से एक से अधिक सब्जियां प्राप्त की जा सकें. इसे दोहरी या बहु ग्राफ्टिंग भी कहते हैं.

किस संस्थान ने विकसित की तकनीक?

उत्तरप्रदेश के वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) में ग्राफ्टेड पोमाटो (आलू + टमाटर) के सफल फील्ड प्रदर्शन के बाद, 2020-21 के दौरान बैगन और टमाटर की दोहरी ग्राफ्टिंग (ब्रिमाटो) का फील्ड प्रदर्शन किया गया.

इन किस्मों को मिलाकर किया प्रयोग

इस प्रयोग में बैगन की संकर किस्म काशी संदेश और टमाटर की उन्नत किस्म काशी अमन को बैगन के रूटस्टॉक में ग्राफ्ट किया गया और बैगन के पौधों की ग्राफ्टिंग प्रक्रिया तब की गई जब वे 25 से 30 दिन के थे और टमाटर के पौधे 22 से 25 दिन के थे. ग्राफ्टिंग के तुरंत बाद, पौधों को तय वातावरण में 5 से 7 दिनों तक रखा गया. उसके बाद फिर अगले 5 से 7 दिनों तक आंशिक छाया में रखा गया.

कुल-मिलाकर ग्राफ्टिंग के 15 से 18 दिन बाद ग्राफ्ट किए गए पौधों को खेत में रोप दिया गया. पौधों की बढ़वार के शुरुआती दिनों के दौरान, बैगन और टमाटर के पौधों की देखभाल में विशेष सावधानी बरती गई. ग्राफ्टिंग जोड़कर नीचे यदि कोई शाखा निकलती थी, तो उसे तुरंत हटा दिया गया. उचित देखभाल और खाद उर्वरक से बैगन और टमाटर दोनों में रोपण के 60 से 70 दिन बाद फल लगने शुरू हो गए.

कहां अपनाई जा सकती है यह तकनीक

दोहरी ग्राफ्टिंग ब्रिमाटो तकनीक शहरी क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी होगी, जहां छत, बगीचे या गमलों में सब्जियां उगाने के लिए कम जगह मौजूद है.

बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इस तकनीक पर आईसीएआर-आईआईवीआर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में अनुसंधान जारी है.

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...