भारत में कपास का आयात (Cotton Import) तेजी से बढ़ रहा है. व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के पहले छमाही में कपास का आयात साल दर साल 63 प्रतिशत बढ़कर 1.1 अरब डॉलर हो गया. इस बीच, कपड़ा उद्योग आयात शुल्क में राहत जारी रखने की मांग कर रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार कपास पर 11 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी की छूट को दिसंबर 2026 के अंत तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है.

क्यों बढ़ी कपास की कीमते ?

नई फसल का मौसम शुरू हो गया है, पर फिर भी घरेलू बाजार में कपास के दाम ऊँचे ही रह रहे हैं. अनियमित बारिश और पैदावार में कमी की चिंता को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है. घरेलू बाजार में कपास की कीमत 9,000 रुपये प्रति 100 किलोग्राम से ऊपर बताई जा रही है, जबकि सरकार द्वारा तय न्यूनतम मूल्य 8,717 रुपये है.

जानिए आयात शुल्क में होगा कितना फायदा

भारत ने 1 जून से 31 अक्टूबर तक कपास के आयात पर लगा 11 फीसदी सीमा शुल्क हटा दिया था. अब इस छूट को अगले दो महीने तक बढ़ाने की बात कही जा रही है. अगर ऐसा होता है तो अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया से कपास लाने वाली टेक्सटाइल मिलों को फायदा हो सकता है. इससे उनकी उत्पादन लागत कम हो सकती है.

इसे उत्पादन कम और मांग ज्यादा होने की आशंका

व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन 290 लाख गांठों से कम हो सकता है. वहीं घरेलू मांग 340 लाख गांठों से अधिक होने की उम्मीद है. इस अंतर से बाजार में कीमतों पर दबाव बना रहेगा.

जानकारों के मुताबिक. आयात शुल्क हटाने से भारतीय कपड़ा कंपनियों को उत्पादन खर्च कम करने और वियतनाम तथा बांग्लादेश जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, आयात शुल्क की लागत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के भाव, माल ढुलाई का खर्च और रुपये की विनिमय दर का भी असर पड़ेगा. आयात शुल्क के छूट बढ़ाने को लेकर सरकार की आधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है. Cotton Import

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें...