कृषि एवं खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिकों की महती जिम्मेदारी

नई दिल्ली : 18 जुलाई 2023. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 95वें स्‍थापना दिवस समारोह का समापन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में हुआ.

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के संबंध में वर्तमान व भविष्य की चुनौतियों के समाधान में आईसीएआर के वैज्ञानिकों की महती जिम्मेदारी है, इन में वे सफल हों. साथ ही, वैज्ञानिकों का अनुसंधान आम लोगों के ध्यान में भी आएं, वे और प्रशंसा के पात्र बनें, इस दृष्टि से स्थापना दिवस को प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाने की सार्थकता है.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमारे कृषि प्रधान देश में किसानों के अथक परिश्रम, वैज्ञानिकों के अनुसंधान व केंद्र एवं राज्यों की किसान हितैषी नीतियों के कारण हमारा देश आज खाद्यान्न अतिशेष बन चुका है और अधिकांश कृषि उत्पादों की दृष्टि से दुनिया में नंबर वन या टू पर है.

farming

उन्होंने यह भी कहा कि हमारे वैज्ञानिकों का दूरगामी दृष्टिकोण भारत को हर विधा में नंबर वन पर पहुंचाने का है और इस दिशा में आईसीएआर के संस्थानों से ले कर देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों तक, सभी वैज्ञानिक प्रयत्नशील हैं.

कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौती हम सब लोगों क सामने है, सारी दुनिया इस से जूझ रही है. जलवायु परिवर्तन के दौर में जिन बीजों की जरूरत है और खाद्यान्न-बागबानी, पशुपालन, मत्स्यपालन क्षेत्र में भी दूरगामी सोच व आपूर्ति की अपेक्षा के अनुरूप हमारे वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, उन की सफलता का विश्वास है.

उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि उद्घाटन समारोह के दौरान विभिन्न विषयों से संबंधित 17 समझौतों का आदानप्रदान हुआ. साथ ही, आईसीएआर एवं वैज्ञानिकों को परामर्शदाता के रूप में आगे आने के लिए भागीदारों द्वारा रुचि की अभिव्यक्ति भी की गई है.

आईसीएआर ने 16 जुलाई, 2023 को 95वां स्थापना दिवस मनाया. पहली बार स्थापना दिवस को प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया गया. परिषद द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों व नवाचारों के बारे में लोगों को बताने व जागरूक करने के लिए प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिस में किसानों, कृषि उद्योग से जुड़े लोगों ने सहभागिता की.

प्रदर्शनी का केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अवलोकन किया. इस में नई दिल्ली के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया व वैज्ञानिकों से संवाद किया. इस तरह के प्रयासों से छात्रछात्राओं को कृषि विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है.

 

आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक ने बताया कि आयोजन के दौरान कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने व व्यावसायीकरण के लिए वैज्ञानिक उद्योग इंटरफेस बैठकें भी साइड इवेंट में आयोजित की गई. कार्यक्रम में किसान, स्टार्टअप प्रतिनिधि, आईसीएआर कर्मी भी मौजूद थे.

एमपीयूएटी की अकादमिक परिषद की 62वीं बैठक

उदयपुर : 18 जुलाई,2023. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की 62वीं वीसी बैठक कुलपति सचिवालय में संपन्न हुई.

कुलपति सचिवालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक ने की. बैठक में कुलसचिव सुधांशु सिंह, वित्त नियंत्रक विनय भाटी, सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक अनुसंधान, निदेशक प्रसार शिक्षा, छात्र कल्याण अधिकारी, ओएसडी, डा. विरेंद्र नेपालिया एवं चयनित सदस्य उपस्थित थे.

सब से पहले बैठक के एजेंडे पर प्रकाश डाला. बैठक में निम्न बिंदुओं पर चर्चा हुई और सहमति के पश्चात अनुमोदन किया गया.

MPUT

– बैठक में विगत 15 दिसंबर को आयोजित अकादमिक परिषद में लिए गए निर्णयों एवं मिनिट्स का अनुमोदन किया गया.

– विश्वविद्यालय के स्ववित्तपोषित बजट हेड में अभियांत्रिकी महाविद्यालय के चयनित विभागों, जिन में डिपार्टमेंट औफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एवं कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, माइनिंग इंजीनियरिंग, इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं सिविल इंजीनियरिंग विभाग आते हैं, में पीएचडी स्कालर को मैरिट के आधार पर लेक्चर आधारित टीचिंग असिस्टेंटशिप का अवसर दिया जाएगा. उन्हें अन्य गेस्ट लेक्चर फैकल्टी के अनुरूप प्रति लेक्चर पारिश्रमिक राशि का भुगतान किया जाएगा.

– अभियांत्रिकी महाविद्यालय में अकादमिक सत्र 2023-24 के लिए एम. टैक एवं पीएचडी की विभिन्न ब्रांच में सीट मैट्रिक्स निर्धारित की गई और सदन द्वारा प्रस्तावित सीट मैट्रिक्स का अनुमोदन किया गया.

इसी प्रकार सभी संकायों में यूजी एवं पीजी और पीएचडी की सीटों के लिए आईसीएआर की संशोधित सीट मैट्रिक्स का अनुमोदन किया गया.

– विश्वविद्यालय में विभिन्न कंसल्टेंसी प्रोजैक्ट के सफल संचालन के लिए एक विस्तृत नियमावली बनाई गई और बैठक में इस नियमावली पर चर्चा के पश्चात इसे विश्वविद्यालय की फाइनेंस कमेटी एवं प्रबंध मंडल के समक्ष अप्रूवल के लिए सदन के पटल पर रखे जाने का प्रस्ताव पारित किया गया.

5. अभियांत्रिकी महाविद्यालय के बोर्ड औफ स्टडीज के प्रस्ताव पर विभिन्न विभागों एवं विषयों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अनुमोदन किया गया.

– बैठक में अधिष्ठाता अभियांत्रिकी के प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त और उदयपुर में रह रहे प्राध्यापकों एवं आचार्यों को पीजी विधार्थियों के अनुसंधान और थीसिस गाइड करने के बिंदु पर सभी अधिष्ठाता और डीन पीजी की एक समिति बना कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की गई.

– निदेशक, आवासीय निर्देशन निदेशालय के प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय के अनुभवी प्राध्यापकों को एमएससी, एम. टैक एवं पीएचडी अनुसंधान गाइडेंस के लिए अनुमति प्रदान करते हुए अनुमोदन किया गया.

– बैठक में विश्वविद्यालय की विभिन्न संस्थाओं में यूजी एवं पीजी की संशोधित फीस स्ट्रक्चर का अनुमोदन भी किया गया.

– बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्ताव पर परिषद ने अनुमोदन किया कि इग्नू के सहयोग से एमपीयूएटी में रेगुलर लर्निंग सपोर्ट सैंटर की स्थापना की जाएगी. इस विद्यार्थी सहायता केंद्र के माध्यम से सीटीएई, आरसीए, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालयों में एक पीजी डिप्लोमा, 4 विषयों में डिप्लोमा, 4 विषयों में सर्टिफिकेट कोर्स एवं एक नौन क्रैडिट प्रोग्राम संचालित किया जाएगा. प्रोग्राम को संचालित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया.

लखनऊ के अवध शिल्पग्राम मेले में आम महोत्सव की धूम – आम की महक विदेशों तक पहुंची

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अवध शिल्पग्राम में 14 जुलाई से 16 जुलाई तक चलने वाले में उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2023 में आगाज किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आम महोत्सव के माध्यम से हमारे किसानों और बागबानों की मेहनत व प्रदेश की औद्यानिक फसलों की संभावनाओं को देखने, समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है. आम महोत्सव प्रदेश के कृषि उत्पादों को देश व दुनिया के बाजार में स्थान दिला रहा है. यह अन्नदाता किसानों की आय को बढ़ाने का एक मंच है. प्रदेश में आम की लगभग 1,000 से भी ज्यादा प्रजातियों का उत्पादन किया जाता है. इन आमों को जून से अगस्त माह तक प्रदेश सहित देशवासियों व दुनिया के अन्य देशों की मांग के अनुरूप आपूर्ति करने का काम किया जा रहा है.

आमों के निर्यात के लिए दिखाई हरी झंडी

Mango Importमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौस्को, दुबई व बहरीन को निर्यात किए जाने वाले आम के ट्रकों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. इस के तहत लखनऊ से 2 टन आम मौस्को, 12 टन आम बहरीन और 1 टन आम दुबई निर्यात किया जा रहा है.

उन्होंने उत्कृष्ट आम उत्पादक बागबानों/किसानों व आम निर्यातकों को सम्मानित किया. साथ ही, उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2023 की स्मारिका का विमोचन किया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि सरकार अन्नदाता किसानों के उत्पादों को मार्केट उपलब्ध कराए और बीज से बाजार तक की दूरी को कम करने का प्रयास करे.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत 6 वर्षों में फसलों के उत्पादन व कृषि उत्पादों के निर्यात की दिशा में जो सफल प्रयास किए हैं, आज उस के परिणाम लोगों के सामने हैं. प्रदेश सरकार राज्य की औद्यानिक फसलों व कृषि उत्पादों के निर्यात में सहूलियतें व सुविधाएं प्रदान कर रही है. किसानों के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने का काम किया जा रहा है. राज्य सरकार ने वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा व सहारनपुर में पैक हाउस बनाए हैं. विगत दिनों वाराणसी पैक हाउस से आम व ताजी सब्जियां दुबई के लिए भेजी गईं. वैश्विक बाजार में हमारे कृषि उत्पादों की बहुत मांग है.

Mango Festival
Mango Festival

मौस्को में आयोजित ‘आमरस महोत्सव’ को सराहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों, बागबानों और निर्यातकों के साथ मिल कर वैश्विक बाजार में अपने गुणवत्तायुक्त उत्पादों को पहुंचाने की संभावनाओं पर लगातार काम कर रही है. कृषि उत्पादों व फसलों के निर्यात से हमारे अन्नदाता किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने में मदद मिलेगी. 7 से 9 जुलाई, 2023 को रूस की राजधानी मौस्को में आयोजित ‘आमरस महोत्सव’ में प्रदेश के कृषि, विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल सम्मिलित हुआ.

प्रतिनिधिमंडल ने वहां प्रदेश के आम की प्रजातियों की मांग की संभावनाओं को देखा. उत्तर प्रदेश के आम की मांग वहां बहुत ज्यादा है. मौस्को में 800 रुपए किलोग्राम के दाम पर प्रदेश के बागबानों/किसानों के आम खरीदे जा रहे हैं. हमारे किसानों को प्रति किलोग्राम 600 रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है, जो यहां के बाजार मूल्य से कई गुना अधिक है. अपने कृषि उत्पादों को खाड़ी देशों व यूरोपीय देशों तक पहुंचाने का यह सब से अच्छा समय है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें अपनी औद्यानिक फसलों व अन्य कृषि उत्पादों की वैश्विक संभावनाओं की तलाश को तेज करना होगा. वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप वहां अपने कृषि उत्पादों की मात्रा बढ़ानी होगी. अपने दूतावासों के सहयोग से प्रदर्शनियां लगानी होंगी. अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनरूप अपने कृषि उत्पादों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित करनी होगी.

उद्यान एवं कृषि विपणन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उद्यान विभाग किसानों की आय बढ़ाने, मूल्य संवर्धन करने और उन की उपज को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहा है. विदेश में हमारे आम की बहुत मांग है. प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उत्पादों के निर्यात को लगातार बढ़ाया जा रहा है.

इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह, महापौर लखनऊ सुषमा खर्कवाल, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र, कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना संजय प्रसाद सहित शासनप्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी व तमाम किसान उपस्थित थे.

1100 नए एफपीओ के गठन की कार्ययोजना

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सहकारिता क्षेत्र में एफपीओ विषय पर राष्ट्रीय महासंगोष्ठी-2023 का उद्घाटन किया और साथ ही पीएसीएस यानी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों द्वारा 1100 नए एफपीओ के गठन की कार्ययोजना का विमोचन किया.

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा, सचिव, सहकारिता मंत्रालय, ज्ञानेश कुमार और सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, मनोज आहूजा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन करने का निर्णय एक अलग दृष्टिकोण से लिया.

उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश में सहकारिता आंदोलन बहुत पुराना है, लेकिन आजादी के 75 वर्ष के बाद जब पीछे मुड़ कर देखते हैं, तो पता चलता है कि देश में सहकारिता आंदोलन कई टुकड़ों में बंट गया था.

उन्होंने आगे कहा कि सहकारिता की दृष्टि से देश को 3 वर्गों में बांट सकते हैं- ऐसे राज्य, जहां सहकारिता आंदोलन अपनेआप को आगे बढ़ाने और मजबूत करने में सफल रहा है, ऐसे कुछ राज्य, जहां सहकारिता आंदोलन अभी भी चल रहा है, और ऐसे कुछ राज्य, जहां सहकारिता आंदोलन लगभग मृतप्रायः हो गया है.

अमित शाह ने कहा कि इतने बड़े देश में, जहां लगभग 65 करोड़ लोग कृषि से जुड़े हैं, सहकारिता आंदोलन को रिवाइव करना, इसे आधुनिक बनाना, इस में पारदर्शिता लाना और नई ऊंचाइयां छूने का लक्ष्य तय करना बहुत आवश्यक हो गया है.

उन्होंने आगे कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सहकारिता ही एकमात्र ऐसा आंदोलन है, जिस के माध्यम से हर व्यक्ति को समृद्ध बनाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि किसी के पास पूंजी है या नहीं है, लेकिन अगर श्रम करने का हौसला, काम करने की लगन और अपनेआप को आगे ले जाने की कूवत है, तो सहकारिता आंदोलन बिना पूंजी वाले ऐसे लोगों को समृद्ध बनाने का बहुत बड़ा साधन बन सकता है.

उन्होंने कहा कि देश के 65 करोड़ से ज्यादा कृषि से जुड़े लोगों को संबल देने और कोआपरेटिव के माध्यम से उन की छोटी पूंजी को मिला कर एक बड़ी पूंजी बना कर उन्हें समृद्ध बनाने की दिशा में सहकारिता आंदोलन महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.

एफपीओ के जरीए से किसानों को बहुत फायदा हुआ

सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विगत 2 सालों में सहकारिता मंत्रालय ने कई इनीशिएटिव्स लिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी नेतृत्व में देश में एफपीओ के गठन का निर्णय लिया गया.

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद कृषि को मज़बूत और किसानों को समृद्ध करने के लिए कई कदम उठाए, जिन में से एक एफपीओ के लिए भी है. इन के माध्यम से किसानों को बहुत फायदा हुआ है, लेकिन सहकारिता क्षेत्र में एफपीओ और इस का फायदा बहुत सीमित मात्रा में पहुंचा था और ऐसा इसीलिए हुआ, क्योंकि हम ने लक्ष्य रख कर लक्षांक तय नहीं किए.

उन्होंने कहा कि पीएसीएस अगर एफपीओ है, तो पीएसीएस के सभी किसानों के पास एफपीओ का मुनाफा पहुंचेगा.

उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने की सब से अधिक क्षमता अगर किसी में है तो वो पीएसीएस के माध्यम से बने एफपीओ में है, इसीलिए पीएसीएस, एफपीओ और एसएचजी के रूप में तीनसूत्रीय ग्रामीण विकास समृद्धि का मंत्र ले कर कृषि मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय आने वाले दिनों में कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे.

उन्होंने कहा कि पीएसीएस अगर एफपीओ बनना चाहते हैं, तो एनसीडीसी उन्हें मदद कर सकता है और इस के लिए कोई सीमा नहीं है, इसीलिए आज की ये महासंगोष्ठी सहकारिता आंदोलन को गति देने की संगोष्ठी बनने वाली है.

कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन भारत की जीडीपी का 18 फीसदी हिस्सा बनाते हैं

अमित शाह ने कहा कि कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन आधारित आर्थिक गतिविधियां भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत हैं, लेकिन कभी इन के बारे में देश में चर्चा तक नहीं होती. आज ये तीनों सै एलक्टर मिल कर भारत की जीडीपी का 18 फीसदी हिस्सा बनाते हैं.

अमित शाह ने यह भी कहा कि एक प्रकार से कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें मजबूत करने का मतलब देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है.

उन्होंने कहा कि अगर मैन्युफैक्चरिंग के द्वारा जीडीपी बढ़ती है, तो रोजगार के आंकड़े इतने नहीं बढ़ते, लेकिन अगर कोआपरेटिव्स के माध्यम से कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन को मजबूत करते हैं तो जीडीपी के साथसाथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

भारत में लगभग 65 फीसदी लोग कृषि और इस से संबद्ध गतिविधियों के साथ जुड़े हैं

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत में लगभग 65 फीसदी लोग कृषि और इस से संबद्ध गतिविधियों के साथ जुड़े हैं, लगभग 55 फीसदी कार्यबल कृषि और इस से संबद्ध गतिविधियों में लगा है. परोक्ष रूप से देखें, तो इन 65 फीसदी लोगों और 55 फीसदी कार्यबल के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में बाकी सभी सेवाएं भी एक प्रकार से कृषि पर ही निर्भर हैं.

अमित शाह ने यह भी कहा कि आज देश के 86 फीसदी किसान छोटे और सीमांत किसान हैं, जिन के पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है.

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में सिर्फ भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिस ने छोटे किसानों को मजदूर नहीं बनने दिया और वे अपनी भूमि के मालिक हैं.

उन्होंने कहा कि कृषि को आधुनिक बनाने, कृषि उपज के अच्छे दाम पाने और कृषि को फायदेमंद बनाने के लिए हमें परंपरागत तरीकों से बाहर निकल कर आज के समयानुकूल तरीकों को अपनाना होगा और ये पीएसीएस और एफपीओ इसी क्रम में एक नई शुरुआत है.

अमित शाह ने कहा कि सरकार और कोआपरेटिव सैक्टर की जिम्मेदारी है कि कृषि के साथ जुड़े हुए सभी लोगों का जीवन उतना ही सुविधाजनक हो, जितना सेवा से जुड़े लोगों का है.

उन्होंने कहा कि एफपीओ की कल्पना वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय योगेंद्र अलग समिति ने की थी. उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने एफपीओ के सुझाव को अमल में लाने का निर्णय लिया.

देश में एफपीओ 11,770 काम कर रहे हैं

मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस इनीशिएटिव का परिणाम है कि आज 11,770 एफपीओ देश में काम कर रहे हैं और इन के माध्यम से देश के लाखों किसान अपनी आय बढ़ाने में सफल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि बजट में 10,000 एफपीओ स्थापित करने की घोषणा की गई और वर्ष 2027 तक इन की स्थापना करने का लक्ष्य है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने 6.900 करोड़ रुपए इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए आवंटित किया है.

अमित शाह ने कहा कि इनपुट से ले कर आउटपुट तक, मैन्युफैक्चरिंग से ले कर प्रोसैसिंग और ग्रेडिंग तक और पैकेजिंग से ले कर मार्केटिंग और भंडारण तक पूरी व्यवस्था, यानी कृषि उत्पादन से ले कर मार्केटिंग तक की पूरी व्यवस्था एफपीओ के तहत हो जाए, ऐसा कौन्सेप्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ले कर आए हैं.

सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि इनपुट की खरीद, बाजार की जानकारी, टैक्नोलौजी और इनोवेशन का प्रचार, उपज के लिए इनपुट का एकत्रीकरण, भंडारण की सुविधाएं, सुखाने, सफाई और ग्रेडिंग की व्यवस्थाएं, ब्रांड बिल्डिंग के साथसाथ पैकेजिंग, लेबलिंग और मानकीकरण की प्रक्रियाएं, गुणवत्ता पर नियंत्रण. संस्थागत खरीदारों और कारपोरेट घरानों के साथ जुड़ कर किसान को ज्यादा दाम दिलाने की एक अच्‍छी व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर किसानों को सारी सरकारी योजनाओं की सूचना दे कर योजनाओं के वाहक बनने का काम भी एफपीओ ने किया है.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के सभी एफपीओ का आह्वान किया कि वे जिस स्वरूप में हैं, उसी स्‍वरूप में काम करते रहें, लेकिन अपने साथ पीएसीएस को भी जोड़ते रहें.

उन्होंने आगे कहा कि एक नया हाईब्रिड मौडल बनाना चाहिए, जो पीएसीएस और एफपीओ के बीच की व्यवस्था के आधार पर सूचना के आदानप्रदान, मुनाफा शेयरिंग और मार्केटिंग की पूरी व्यवस्था कर सके.

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने अब तक 127 करोड़ रुपए से ज्यादा ऋण एफपीओ को दिया है, जो 6,900 करोड़ रुपए के अतिरिक्तहै. आदिवासी जिलों में भी 922 एफपीओ बने हैं, जो वन उपज के लिए एफपीओ का काम करते हैं. इस से मालूम होता है कि कितनी बारीकियों के साथ मोदी सरकार और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर आगे बढ़े हैं.

उन्होंने आगे कहा कि आज गुजरात, महाराष्‍ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब ने एफपीओ के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है.

गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमें फिर से युवाओं में इस बात को प्रस्थापित करना है कि कृषि फायदे का व्यापार है. इसे आधुनिक तरीके से करने की जरूरत है और मार्केटिंग की व्यवस्था करनी है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह आत्मविश्वास देश के 12 करोड़ किसानों में भर देते हैं तो कृषि उपज तो बढ़ेगी ही, जीडीपी में हमारा योगदान भी बढ़ेगा और साथ ही यह 12 करोड़ किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और देश को भी आत्मनिर्भर बनाएंगे.

मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस के लिए कई काम किए हैं और अब कोआपरेटिव एफपीओ के माध्यम से मोदी सरकार किसान को व्यापारी और उद्योजक बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे.

सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बजट आवंटन में लगभग 5.6 गुना की वृद्धि हुई. वर्ष 2013-14 में 21,000 करोड़ रुपए का बजट था, जो आज वर्ष 2023-24 में 1.15 लाख करोड़ रुपए का हो गया है.

उन्होंने यह भी बताया कि पहले संयुक्त बजट 21,000 करोड़ रुपए था, आज 4 विभागों में से सिर्फ कृषि मंत्रालय का बजट 1.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है और यह बताता है कि देश के प्रधानमंत्री और उन के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता कृषि है.

एमएसपी में हुई वृद्धि, खरीदारी भी बढ़ी

अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2013-14 में देश में 265 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ था और आज वर्ष 2022-23 में 324 मिलियन टन हुआ है.

उन्होंने कहा कि कुछ किसान एमएसपी की बात करना चाहते हैं, इस पर कहीं पर भी चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है. धान की एमएसपी में 10 साल में 55 फीसदी और गेहूं की एमएसपी में 51 फीसदी की वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार आजादी के बाद पहली ऐसी सरकार है, जिस ने किसानों के लिए लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक मुनाफा तय किया है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने धान की खरीद में 88 फीसदी की वृद्धि की है यानी लगभग डबल धान खरीदा है और गेहूं की खरीद में दोतिहाई यानी 72 फीसदी की वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि 251 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का काम मोदी सरकार ने किया है और लाभार्थियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है.

उन्होंने कहा कि यही बताता है कि मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कितना काम किया है. साथ ही, जैविक खेती को बढ़ावा दिया, सिंचाई में 72 लाख हेक्‍टेयर का माइक्रो इरिगेशन कर 60 लाख किसानों को कवर किया, सूक्ष्‍म सिंचाई कोष बनाया, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन बनाया, 24 हजार करोड़ का कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया, कृषि यंत्रीकरण का कोष बनाया और ई नाम के माध्यम से लगभग 1260 मंडियों को जोड़ने का काम भी मोदी सरकार ने किया है.

जो पसीना बहाता है, मुनाफा उसी के पास जाता है

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है और अब उस का फायदा किसान तक पहुंचे, इस के लिए सहकारिता मंत्रालय बनाया गया है.

उन्होंने कहा कि कोआपरेटिव के मंत्र के अनुसार जो पसीना बहाता है, मुनाफा उसी के पास जाता है और यह काम सहकारिता मंत्रालय ने किया है.

अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में मोदी सरकार ने कई काम किए हैं. पीएसीएस के मौडल बायलौज बनाए, जिन्हें 26 राज्यों ने स्वीकार कर लिया है. अब पीएसीएस डेरी भी बन पाएंगे, मछुआरा समिति भी बन पाएंगे, पेट्रोल पंप चला पाएंगे, गैस की एजेंसी भी चला सकेंगे, सीएससी भी बन पाएंगे, सस्ती दवा की दुकान भी चला सकेंगे, सस्ते अनाज की दुकान भी चला सकेंगे, भंडारण का भी काम करेंगे, गांव की हर घर जल की समिति में जल व्यवस्थापन में भी कमर्शियल काम कर सकेंगे.

अमित शाह ने कहा कि ऐसा कर के मोदी सरकार ने 22 अलगअलग कामों को पीएसीएस के साथ जोड़ने का निर्णय लिया है. जब तक पीएसीएस मजबूत नहीं होता, एपीएसीएस कभी मजबूत नहीं हो सकता. एफपीओ, पीएसीएस और सेल्फ हेल्प ग्रुप एक-दूसरे के पूरक बनेंगे, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण विकास और कृषि विकास का एक नया युग शुरू होगा.

मात्स्यिकी महाविद्यालय में मनाया मत्स्य कृषक दिवस

उदयपुर : 10 जुलाई, 2023. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर में 23वां भारतीय मत्स्य कृषक दिवस मनाया गया. इस अवसर पर मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. बीके शर्मा, पूर्व अधिष्ठाता डा. एसके शर्मा व सहप्राध्यापक डा. एमएल ओझा, महाविद्यालय केे कर्मचारी व छात्रछात्राएं उपस्थित रहे.

इस अवसर पर अधिष्ठाता डा. बीके शर्मा ने बताया कि देश में पहली बार 10 जुलाई ,1957 को मत्स्य वैज्ञानिक प्रोफैसर हीरालाल चौधरी व सहयोगी डा. केएच अलीकुन्ही ने ओडिशा के अंगुल में भारतीय प्रमुख कार्प मछली को पिट्युटरी हार्मोन की मदद से सफल प्रेरित प्रजनन करवाया था.

उन्होंने कहा कि डा. हीरालाल चौधरी व डा. केएच अलीकुन्ही के इस महत्वपूर्ण सहयोग की याद में हर साल भारत में मत्स्य किसान दिवस मनाया जाता है. सब से पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस 10 जुलाई, 2001 को मनाया था एवं आज हम 23वां मत्स्य किसान दिवस मना रहे हैं. साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि मत्स्यपालन में किसानों के योगदान, मत्स्यपालन में रोजगार व भविष्य के बारे मे भी छात्रछात्राओं को इस क्षेत्र के अवसरों के बारे में अवगत कराया.

पूर्व अधिष्ठाता डा. एसके शर्मा ने कहा कि मत्स्य किसान दिवस का उद्देश्य एक्वाकल्चर में शामिल लोगों जैसे मछुआरे भाईबहन, मत्स्य कृषक, मत्स्य वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ और अन्य हितधारकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है. साथ ही, डा. एसके शर्मा ने मत्स्यपालन में छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के अवसरों और आर्थिक क्षेत्र में प्रगति के बारे में बताया गया.

डा. एमएल ओझा ने प्रजनन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार प्रेरित प्रजनन से हमारे देश में मछलीपालन में क्रांति आई व उस की वजह से आज विश्व में मत्स्य उत्पादन में भारत दूसरे स्थान पर है.

उन्होंने प्रेेरित प्रजनन के इतिहास और वैज्ञानिक पद्धति पर जानकारी प्रदान की. इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों रामजस चौधरी, विकास कुमार और लक्ष्य ने अपने विचार व्यक्त किए. काव्य ने समाचार संकलन में सराहनीय सहयोग दिया.

मात्स्यिकी महाविद्यालय के छात्र थाईलैंड में लेंगे प्रशिक्षण

उदयपुर : 11 जुलाई, 2023. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यिकी महाविद्यालय के 2 छात्र मोनिका कुमावत बीएफएससी तृतीय वर्ष एवं अनिल सिंह शेखावत, बीएफएससी द्वितीय वर्ष भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम इंटरनेशनल डवलपमेंट प्रोग्राम, राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (आईडीपी/एनएएचईपी) के अंतर्गत 60 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए प्रिंस औफ सोंगकला कृषि उद्योग विश्वविद्यालय (पीएसयू), थाईलैंड गए हैं.
यह प्रशिक्षण 10 जुलाई से 10 सितंबर, 2023 तक आयोजित किया जाएगा.

यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र पर समुद्री उत्पाद विज्ञान एवं खोज, प्रिंस औफ सोंगकला कृषि उद्योग विश्वविद्यालय, थाईलैंड में होगा.

परियोजना प्रभारी डा. पीके सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण के दौरान ये विद्यार्थी मत्स्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के अलावा मत्स्य विज्ञान के अन्य विषयों पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे, जिस से राजस्थान में उस का लाभ मिल सकेगा.

यहां यह बताना प्रासंगिक है कि छात्रा मोनिका कुमावत एक छोटे से गांव हिंगोनीया, जोबनेर की रहने वाली है, जबकि छात्र अनिल सिंह शेखावत गांव बनगोठड़ी कलां, झुंझुनूं के रहने वाले हैं.

मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. बीके शर्मा ने बताया कि महाविद्यालय के छात्र अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए पहली बार गए हैं एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन दोनों विद्यार्थियों से दूसरे छात्रों को भी इस तरह का प्रशिक्षण प्राप्त करने की जिज्ञासा बढ़ेगी एवं वे भी अपनी पढ़ाई के प्रति सजग रह कर अपने मातापिता, समाज, विश्वविद्यालय एवं गांव का नाम रोशन करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि उपरोक्त छात्रों का पूरा खर्च (आईडीपी/एनएएचईपी) के द्वारा वहन किया जाएगा.

मास्को में आमरस-2023 महोत्सव : रूस के लोगों ने आमों का चखा स्वाद

लखनऊ : रूस के मास्को में स्थित भारतीय दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय आमरस- 2023 महोत्सव का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिस का प्रतिनिधित्व प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने किया.

इस महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न प्रजातियों के आमों को प्रदर्शित किया गया. साथ ही, रूस के ‘ढाबा’ रेस्टोरेंट में आम से अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए गए. इस दौरान उद्यान मंत्री ने रूस के व्यापारियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने रूस के लोगों को प्रदेश के आमों की विशिष्ट प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी व इस के गुणों से भी परिचित कराया.

Mango Festival
Mango Festival

उन्होंने आगे बताया कि रूस में उत्तर प्रदेश के आमों का बोलबाला रहा और वहां के लोगों ने यहां के आमों को काफी पसंद भी किया. उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने महोत्सव में आए रूस के व्यापारियों को उत्तर प्रदेश में बागबानी एवं अन्य क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित भी किया.

मास्को में आयोजित आमरस-2023 महोत्सव में उत्तर प्रदेश के अलगअलग जनपदों से विभिन्न प्रजातियों के आम जैसे दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, आम्रपाली, रामकेला सहित अन्य रंगीन प्रजातियों को प्रदर्शित किया गया. इस महोत्सव में लगभग 2,000 लोग सम्मिलित हुए और उन सभी का उत्साह उत्तर प्रदेश के फलों के राजा आम के प्रति चरम पर रहा. सभी ने पूरे उत्साह व उमंग से प्रदेश के आमों के स्वाद को चखा व इस की जम कर तारीफ भी की.

मास्को में उत्तर प्रदेश के आमों के प्रति उत्साह को देखते हुए उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश के बागबानी उत्पाद अपनी गुणवत्ता के कारण पूरे विश्व में मशहूर हो रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि यह उत्साह उत्तर प्रदेश के बागबानों की आय बढ़ाने और प्रदेश के फलों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में विकसित करने का एक बड़ा अवसर है.

इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा निर्यातकों ने भी भागीदारी की और उन्होंने आमों के प्रति मास्कोवासियों के उत्साह को बागबानी के लिए शुभ संकेत बताया.

इस अवसर पर प्रदेश के उद्यान निदेशक डा. आरके तोमर, उपनिदेशक उद्यान राजीव वर्मा सहित अनेकों लोग मौजूद रहे.

जल संसाधनों में लगातार कमी होना चिंताजनक

हरिद्वार : 30 जून, 2023. एसएमजेएनपीजी कालेज में पर्यावरण प्रकोष्ठ, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ व नेहरू युवा केंद्र, हरिद्वार द्वारा ‘कैच द रेन अभियान’ के अंतर्गत जनजागरूकता हेतु ‘जल संरक्षण एवं जल संवर्धन’ विषय पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया.

इस अवसर पर स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड्स की राष्ट्रीय परिषद के सलाहकार गिरीश चंद्र बलूनी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उन्होंने इस अवसर पर उत्तराखंड के जल संसाधन में लगातार हो रही कमी को समझाते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण बहुत ही जरूरी है. इस के बिना एक सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना नहीं की जा सकती है.

उन्होंने उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में हो रही जल संकट की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर हो रही जल संकट की समस्या को स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों से ही हल किया जा सकता है.

स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड्स की राष्ट्रीय परिषद के सलाहकार गिरीश चंद्र बलूनी ने एसएमजेएनपीजी कालेज और नेहरू युवा केंद्र, हरिद्वार द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चलाए जा रहे संयुक्त प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार के साथ मिल कर महाविद्यालय एवं नेहरू युवा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे कार्यक्रमों को उत्तराखंड समेत पूरे देश तक पहुंचाए जाएंगे.

वहीं कालेज के प्राचार्य प्रोफैसर सुनील कुमार बत्रा ने समाज के प्रत्येक तबके को पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का संदेश दिया. उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है.

केन्‍या में आयोजित हुआ भारतअफ्रीका अंतर्राष्‍ट्रीय मोटा अनाज सम्‍मेलन

नई दिल्ली : अंतर्राष्‍ट्रीय मोटा अनाज (श्री अन्‍न) वर्ष मनाने के लिए कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय और केन्‍या के कृषि एवं पशुधन विकास मंत्रालय केन्‍या में ‘भारतअफ्रीका अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज सम्मेलन’ की सहमेजबानी करेंगे. यह सम्‍मेलन अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) के समर्थन से आयोजित किया जाएगा. 30-31 अगस्त, 2023 तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्‍व के सरकारी नेतृत्‍वकर्ताओं, शोधकर्ताओं, किसानों, उद्यमियों और उद्योग संघ आदि भाग लेंगे.

‘भारतअफ्रीका अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज सम्मेलन’ के लिए आधिकारिक पूर्वावलोकन कार्यक्रम नैरोबी, केन्या में आयोजित किया गया. इस में एक झलक प्रस्‍तुत की गई कि क्या उम्मीद की जा सकती है.

केन्या के नैरोबी में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के उच्चायुक्त, भारत सरकार की संयुक्त सचिव (फसल), केन्या सरकार के प्रधान सचिव और आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक उपस्थित थे.

केन्या के कृषि क्षेत्र के अधिकारियों, राजनयिक समुदाय के सदस्यों, अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान नेतृत्‍वकर्ताओं, किसानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.

मोटे अनाज को ‘विश्‍व के उभरते स्मार्ट फूड’ के रूप में मिलेगा बढ़ावा

भारत और केन्‍या की सरकार का उद्देश्‍य अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से मोटा अनाज की सार्वजनिक जागरूकता ‘विश्‍व के उभरते स्मार्ट फूड’ के रूप में बढ़ाना है. इस के अतिरिक्त यह वैश्विक आयोजन मोटे अनाज वाले क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण विनिमय और सहयोग के अवसरों को उजागर करने में भी मदद करेगा.

मोटा अनाज स्वास्थ्य लाभ का है खजाना

आयरन, कैल्शियम, जिंक और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों जैसे उच्‍चस्‍तरीय खनिजों के साथ श्री अन्‍न यानी मोटा अनाज स्वास्थ्य लाभ का खजाना है. इस के अतिरिक्त ये सूखा प्रतिरोधी, कीट लचीला, जलवायु के अनुकूल फसलें भी हैं, जो विशेष रूप से उपसहारा अफ्रीका और एशिया में छोटे किसानों की आय के अवसरों और आजीविका को प्रोत्‍साहित कर सकती हैं.

पूर्वावलोकन कार्यक्रम का प्रारंभ

आईसीआरआईएसएटी की महानिदेशक डा. जैक्‍वेलीन ह्यूजेस ने कार्यक्रम के एजेंडे के बारे में जानकारी दी. उन्होंने मोटा अनाज के अनेक लाभों को गिनाते हुए, मशीनीकरण, बीज प्रणालियों, डिजिटल कृषि और बाजरा में मूल्यवर्धन के बारे में बढ़ती चर्चा की बात की.

डा. ह्यूजेस ने कहा, “हमें उपभोक्ता मांग सुनिश्चित करने के लिए मोटे अनाजों की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है, जो किसानों को लाभकारी बाजारों का आश्वासन देगा.”

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की संयुक्त सचिव (फसल) शुभा ठाकुर ने अपने उद्घाटन भाषण में बताया कि सम्मेलन प्रमुख हितधारकों के बीच संयुक्त उद्यम, सहयोग और तकनीकी हस्तांतरण के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करते हुए नेतृत्‍वकर्ताओं, निवेशकों, संस्थानों और व्यक्तियों द्वारा कार्यवाही योग्य रणनीतियों को उजागर करने में किस तरह सहायता करेगा.

मोटे अनाजों की खेती की वाणिज्यिक व्यावहारिकता को बढ़ाने पर जोर

शुभा ठाकुर ने कहा कि भारत सरकार भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान के सहयोग से वर्ष 2018 से मोटे अनाज की खेती से संबंधित चिंताओं का हल निकाल रही है, जब भारत ने अपना राष्ट्रीय श्री अन्‍न वर्ष मनाया था. भारत के प्रस्ताव पर कार्यवाही करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इन प्राचीन अनाजों को वैश्विक मंच प्रदान करते हुए वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ घोषित किया. हमारा फोकस टिकाऊ कृषि प्रथाओं को सुनिश्चित करने और मोटे अनाजों की खेती की वाणिज्यिक व्यावहारिकता को बढ़ाने पर रहा है.

केन्या में भारत की उच्चायुक्त नामग्या खंपा ने अपने स्वागत भाषण में कुपोषण और वैश्विक भूख के विषय से निबटने में मोटे अनाजों के महत्व पर प्रकाश डाला.

नामग्या खंपा ने कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व के बारे में कहा, “हमारा मानना है कि कृषि में ग्‍लोबल साउथ के बीच सहयोग हमारे देशों में खाद्य पर्याप्तता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.”

मोटे अनाजों को कम अवधि में उगाया सकता है

केन्या सरकार के प्रधान कृषि सचिव फिलिप केल्‍लो हरसमा ने छोटे किसानों की आर्थिक उन्नति में मोटे अनाजों के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि चूंकि मोटे अनाजों को कम से कम इनपुट की आवश्यकता होती है और इसे अपेक्षाकृत कम अवधि में उगाया जा सकता है, इसलिए केन्या के किसान इन आश्चर्यजनक अनाजों से बहुत लाभ उठा सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

पूर्वावलोकन कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में से एक भारतअफ्रीका अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज सम्मेलन के लोगो और वैबसाइट का लोकापर्ण था. वैबसाइट प्रतिभागियों को सम्मेलन के लिए पंजीकरण करने और सामान्य रूप से वैश्विक कार्यक्रम और मोटे अनाजों के बारे में अधिक जानने में सक्षम बनाएगी.

लोकापर्ण के बाद ‘अफ्रीका और भारत में मोटे अनाज को प्रोत्‍साहन’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई. इस का संचालन आईसीआरआईएसएटी में केन्या के क्षेत्रीय निदेशक और कंट्री प्रतिनिधि डा. रेब्बी हरावा ने किया. विशिष्ट पैनलिस्टों में केन्या कृषि और पशुधन अनुसंधान संगठन (केएएलआरओ) के महानिदेशक, अफ्रीका में हरित क्रांति के लिए गठबंधन (एजीआरए) के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे.

कार्यक्रम मीडिया के साथ बातचीत और केन्या के उपउच्चायुक्त की टिप्पणियों के साथ समाप्‍त हुआ.

मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से घरों पर पशु चिकित्सा सेवा

नई दिल्ली : पशुपालन और डेयरी विभाग ने आजादी का अमृत महोत्सव के भाग के रूप में कौमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क के माध्यम से पशुजन्य रोग पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. सीएससी नेटवर्क के माध्यम से जुड़े देशभर के डेढ़ लाख से अधिक किसानों ने जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया.

पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव अलका उपाध्याय ने इस अवसर पर किसानों को संबोधित किया और पशुजन्य बीमारी से जुड़े जोखिमों और पशुधन क्षेत्र और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इस के प्रभाव पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि विभाग राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) लागू कर रहा है, जो दो प्रमुख प्रचलित पशुजन्य रोग के नियंत्रण के लिए सितंबर, 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख योजना है. एफएमडी के लिए 100 फीसदी भैंस, भेड़, बकरी और सूअर और 4-8 महीने की 100 फीसदी गोजातीय बछड़ी को खुरपकामुंहपका रोग और ब्रुसेलोसिस का टीका लगा रहा है.

Animal Healthcare
Animal Healthcare

विभाग एंथ्रेक्स और रेबीज जैसी पशुजन्य बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण और ‘आकस्मिक और विदेशी बीमारियों के नियंत्रण’ के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सहायता भी कर रहा है. सामाजिक व आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए विभाग रोग के निदान, उपचार, छोटी सर्जरी और बीमार जानवरों की देखभाल और प्रबंधन आदि में जागरूकता के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयूएस) के माध्यम से किसानों के दरवाजे पर पशु चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है.

पशुपालन और डेयरी सचिव ने दोहराया कि पशुपालन और डेयरी विभाग किसानों के घरों पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने और पशु रोगों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए बेहतर पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता/पहुंच बढ़ाने की खातिर सभी हितधारकों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में जूनोसिस (पशुजन्य) रोगों से जुड़े जोखिम को नियंत्रित करने में ‘वन हेल्थ’ अवधारणा के महत्व पर भी प्रकाश डाला.

उन्होंने पशुजन्य बीमारी, टीकाकरण कार्यक्रम और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बीमारियों और अन्य आकस्मिक और विदेशी बीमारियों के उन्मूलन और नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी.

विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उपस्थित लोगों को ‘जूनोसिस के जोखिम और रोकथाम’ और ‘रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण’ के बारे में पूरी जानकारी दी गई.