Crop Varieties : नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026. 25 फसलों में अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को रेखांकित करते हुए 184 नई फसल किस्मों के विमोचन के अवसर पर आईसीएआर नेतृत्व कार्यक्रम का आयोजन 4 जनवरी, 2026 को ए. पी. शिंदे ऑडिटोरियम, एनएएससी परिसर में किया गया.
कार्यक्रम के दौरान डॉ. डी. के. यादव, उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान) ने नव-विकसित किस्मों के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने आईसीएआर की किस्म विकास एवं अधिसूचना प्रक्रिया की जानकारी दी तथा नव-विमोचित फसल किस्मों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, साथ ही कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया.
10 वर्ष, 3200 किस्में विकसित
डॉ. एम. एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (आईसीएआर) ने कहा कि पिछले दस वर्षों में आईसीएआर द्वारा 3,200 से अधिक फसल किस्में (Crop Varieties) विकसित की गई हैं. उन्होंने अम्लीय मिट्टी, जैविक एवं प्राकृतिक खेती प्रणालियों तथा पुनर्योजी कृषि पर केंद्रित प्रजनन कार्यक्रमों के महत्व पर भी बल दिया.
200 करोड़ का किया कारोबार
देवेश चतुर्वेदी, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु कृषि मंत्रालय की कार्ययोजना पर चर्चा की. उन्होंने बीज गुणन में राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है और 200 करोड़ रुपए का कारोबार हासिल किया गया है.
विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बना भारत
शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में गुणवत्तापूर्ण बीजों की अहम भूमिका पर जोर दिया और विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनने की भारत की उपलब्धि की सराहना की. उन्होंने दलहन एवं तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी फसलों के उत्पादन में संतुलन बनाए रखने की बात कही. उन्होंने किसानों के हित में बीज मूल्य विनियमन, नव-विमोचित किस्मों की समय पर उपलब्धता के लिए त्वरित बीज गुणन तथा जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों के विकास का आह्वान किया.
कृषि मंत्री ने बताई कुछ विशेष बातें
कृषि मंत्री ने क्षेत्र-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों एवं फसल किस्मों के विकास के लिए क्षेत्रीय बैठकों और सम्मेलनों के महत्व को भी रेखांकित किया. उन्होंने यह भी बताया कि कई नव-विमोचित किस्मों में सूखा, बाढ़ और लवणता सहनशीलता तथा प्रमुख कीटों और रोगों के प्रति प्रतिरोध जैसे विशेष गुण मौजूद हैं, जो किसानों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे और स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करेंगे.
उन्होंने बीजों को किसी भी उत्पादन प्रणाली की नींव बताते हुए कहा कि भारत अब केवल खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पौष्टिक खाद्य उत्पादन की दिशा में अग्रसर है.
कृषि योजनाओं पर फोकस
जल संरक्षण, कृषि वानिकी और पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए कृषि योजनाओं के अभिसरण पर सरकार के फोकस का उल्लेख किया, साथ ही दलहन एवं तिलहन के लिए उत्पादकता वृद्धि, मूल्य स्थिरता और प्रसंस्करण अवसंरचना को प्राथमिकता देने पर जोर दिया.
184 नव-विमोचित किस्मों में से एक धान संकर एवं चार मक्का संकर/किस्में आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा विकसित की गई हैं, जो भारत की बीज एवं किस्म विकास प्रणाली को सशक्त बनाने में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है.





