SMAM Scheme-
खेती में तकनीक का हो साथ,
कम हो मेहनत, बढ़े काम की रफ्तार.
खेती में समय और लागत का सीधा संबंध होता है. खेत की तैयारी, बुवाई और फसल की देखभाल में देरी होने पर किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. आधुनिक कृषि मशीनों से कुछ काम तेजी से पूरे किए जा सकते हैं, लेकिन इनकी कीमत कई बार किसानों के बजट से बाहर होती है.
छोटे और सीमांत किसानों के लिए ट्रैक्टर से चलने वाले यंत्र या दूसरी आधुनिक मशीनें खरीदना मुश्किल हो सकता है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाती हैं. इनमें सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन यानी SMAM योजना महत्वपूर्ण है.
SMAM योजना का उद्देश्य क्या है?
SMAM योजना का मुख्य उद्देश्य खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाना और किसानों के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता आसान बनाना है. मशीनों की मदद से खेत की तैयारी, बुवाई और फसल से जुड़े कई काम कम समय में पूरे किए जा सकते हैं.
यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित होती है. राज्यों के कृषि विभाग इसके क्रियान्वयन और आवेदन प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं.
योजना में व्यक्तिगत किसानों को कृषि उपकरण खरीदने के लिए सहायता देने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया जाता है, जिनसे किसान किराये पर मशीनें इस्तेमाल कर सकें.
कृषि मशीनों पर कितनी आर्थिक सहायता मिल सकती है?
SMAM के तहत सहायता की दर सभी किसानों के लिए समान नहीं है. अगस्त 2026 की संशोधित गाइडलाइन में व्यक्तिगत किसानों के लिए सामान्यतः दो सहायता दरों का प्रावधान बताया गया है.
• 50 प्रतिशत तक सहायता: निर्धारित पात्र श्रेणियों में आने वाले किसानों के लिए, जैसे छोटे और सीमांत किसान, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसान, महिला किसान तथा संबंधित नियमों के तहत पात्र क्षेत्रों के किसान.
• 40 प्रतिशत तक सहायता: अन्य पात्र किसानों के लिए.
ये अधिकतम निर्धारित दरें हैं. किसान को वास्तव में कितनी रकम मिलेगी, यह संबंधित मशीन, स्वीकृत लागत, अधिकतम अनुदान सीमा और राज्य में लागू नियमों पर निर्भर करता है.
इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि हर किसान को मशीन की कीमत का आधा पैसा मिल जाएगा. आवेदन करने से पहले अपने राज्य की योजना में संबंधित मशीन के लिए निर्धारित सहायता की जांच करना जरूरी है.
कस्टम हायरिंग सेंटर से किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
हर किसान के लिए अपनी कृषि मशीन खरीदना जरूरी या आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होता. कई छोटे किसानों को साल में कुछ ही दिनों के लिए किसी खास मशीन की जरूरत पड़ती है. ऐसे में किराये पर मशीन लेना बेहतर विकल्प हो सकता है. कस्टम हायरिंग सेंटर इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं. यहां से किसान अपनी खेती के काम के लिए मशीन किराये पर ले सकते हैं.
SMAM के तहत पात्र कस्टम हायरिंग सेंटर परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक सहायता देने का प्रावधान बताया गया है. उपलब्ध दिशा-निर्देशों में अधिकतम परियोजना लागत 2.5 करोड़ रुपये तक निर्धारित है.
ध्यान रहे कि यह सहायता पात्र परियोजना के लिए है. इसे किसी व्यक्तिगत किसान को एक मशीन खरीदने पर मिलने वाले अनुदान के बराबर नहीं माना जाना चाहिए. परियोजना की पात्रता और वास्तविक सहायता संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होती है.
फार्म मशीनरी बैंक क्या है?
फार्म मशीनरी बैंक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पात्र समूह या संस्थाएं, एफपीओ किसानों की जरूरत के अनुसार कृषि मशीनों का संग्रह तैयार कर सकती हैं. इन मशीनों को आसपास के किसानों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है.
उपलब्ध नियमों के अनुसार, पात्र फार्म मशीनरी बैंक परियोजनाओं के लिए 30 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 80 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है. पूर्वोत्तर राज्यों में पात्र परियोजनाओं के लिए 95 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान भी बताया गया है.
इसका लाभ उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, जहां किसानों के लिए व्यक्तिगत रूप से महंगे कृषि यंत्र खरीदना कठिन है. हालांकि, इन परियोजनाओं के लिए आवेदन करने वाले समूहों या संस्थाओं को निर्धारित पात्रता और दस्तावेजों की शर्तें पूरी करनी होती हैं.
किन कृषि मशीनों के लिए किसान जानकारी ले सकते हैं?
रबी की बुवाई और खेत की तैयारी में इस्तेमाल होने वाले कई कृषि यंत्रों की योजना के तहत पात्रता जांची जा सकती है. इनमें शामिल हैं:
• जीरो टिल सीड ड्रिल
• हैप्पी सीडर
• सुपर सीडर
• सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल
• रोटावेटर
• रेज्ड बेड प्लांटर
• लेजर लैंड लेवलर
इन सभी मशीनों पर हर राज्य में एक जैसी सहायता उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है. किसान को अपने राज्य की स्वीकृत मशीन सूची और संबंधित आवेदन की स्थिति देखनी चाहिए.
SMAM योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
इस योजना में आवेदन की पात्रता संबंधित राज्य, मशीन और लाभार्थी की श्रेणी के नियमों से तय होती है. सामान्य तौर पर खेती करने वाले पात्र किसान कृषि मशीनों पर सहायता के लिए जानकारी ले सकते हैं. इन श्रेणियों के किसानों को योजना में निर्धारित नियमों के अनुसार विशेष सहायता मिल सकती है:
• छोटे और सीमांत किसान
• अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसान
• महिला किसान
• निर्धारित नियमों के तहत पात्र क्षेत्रों के किसान
कस्टम हायरिंग सेंटर या फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए पात्र समूहों और संस्थाओं के आवेदन अलग प्रक्रिया के अंतर्गत आ सकते हैं.
केवल किसी श्रेणी में शामिल होना अनुदान मिलने की गारंटी नहीं है. किसान को संबंधित मशीन की पात्रता, राज्य के नियम, आवेदन की उपलब्धता और अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी.
आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज तैयार रखें?
SMAM योजना के तहत आवेदन करते समय किसान से पहचान, बैंक खाते और खेती से जुड़े प्रमाण मांगे जा सकते हैं. दस्तावेजों की अंतिम सूची राज्य और योजना के अनुसार अलग हो सकती है.
आमतौर पर इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है:
1. आधार कार्ड.
2. बैंक खाते का विवरण या पासबुक की प्रति.
3. किसान पंजीकरण का विवरण, जहां लागू हो.
4. जमीन या खेती से जुड़े दस्तावेज.
5. अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र, यदि संबंधित श्रेणी के तहत आवेदन किया जा रहा हो.
6. ट्रैक्टर से चलने वाली मशीन के लिए ट्रैक्टर की आरसी, जहां जरूरी हो.
7. मशीन का विवरण, अधिकृत विक्रेता का कोटेशन या अन्य प्रमाणपत्र, यदि योजना में मांगा गया हो.
कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक जैसी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है. आवेदन करने से पहले पोर्टल पर दी गई दस्तावेज सूची जरूर पढ़ें.
SMAM योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी जानकारी और आवेदन की उपलब्ध प्रक्रिया केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट: https://agrimachinery.nic.in/ पर देखी जा सकती है.
आवेदन की प्रक्रिया सामान्य रूप से इस प्रकार आगे बढ़ सकती है:
• कृषि यंत्रीकरण DBT पोर्टल पर जाकर किसान पंजीकरण और आवेदन से संबंधित विकल्प देखें.
• पोर्टल पर मांगे गए पहचान संबंधी विवरण भरें. राज्य, किसान का नाम और अन्य जरूरी जानकारी सही दर्ज करें.
• निर्देशों के अनुसार बैंक खाते, किसान पंजीकरण और भूमि से संबंधित जानकारी भरें. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें.
• जिस मशीन की जरूरत है, उसके लिए उपलब्ध योजना, पात्रता, अनुदान की दर और आवेदन की अंतिम तारीख देखें. अगर उस मशीन के लिए आवेदन बंद है, तो अगली आवेदन अवधि की प्रतीक्षा करें.
• यदि आवेदन खुले हैं और किसान पात्रता पूरी करता है, तो फॉर्म जमा करें. आवेदन संख्या या रसीद को सुरक्षित रखें.
• योजना के अनुसार विभागीय स्वीकृति, लाभार्थी चयन या अन्य प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. यदि मशीन खरीदने से पहले अनुमति लेना जरूरी है, तो स्वीकृति मिलने तक खरीद न करें.
• योजना के नियमों के अनुसार मशीन खरीदने के बाद बिल या अन्य प्रमाण जमा करने पड़ सकते हैं. जहां जरूरी हो, वहां विभागीय सत्यापन पूरा होने के बाद ही सहायता जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
यह सामान्य जानकारी है. वास्तविक प्रक्रिया और आवेदन के विकल्प राज्य की अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकते हैं.
सब्सिडी मिलने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
कृषि यंत्रों पर सहायता पाने के लिए किसान को केवल आवेदन भरने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. कुछ जरूरी बातों की पहले ही पुष्टि कर लेनी चाहिए.
• संबंधित मशीन के लिए आवेदन खुले हैं या नहीं.
• किसान और उसकी श्रेणी योजना की शर्तें पूरी करते हैं या नहीं.
• मशीन पर अधिकतम कितनी सहायता मिल सकती है.
• खरीदने से पहले विभागीय स्वीकृति जरूरी है या नहीं.
• अधिकृत विक्रेता से मशीन खरीदने की शर्त लागू है या नहीं.
• बिल, फोटो या मशीन के भौतिक सत्यापन की जरूरत है या नहीं.
पुराने वित्त वर्ष की प्रतीक्षा सूची को नए वित्त वर्ष में अपने आप मान्य नहीं मानना चाहिए. किसान को वर्तमान आवेदन प्रक्रिया और नई सूची की जानकारी आधिकारिक पोर्टल से लेनी चाहिए.
SMAM योजना से जुड़ी 2026 की जानकारी
कृषि यंत्रीकरण योजना से जुड़ी अगस्त 2026 की संशोधित गाइडलाइन में व्यक्तिगत किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक जैसी व्यवस्थाओं के लिए सहायता के प्रावधान दिए गए हैं. इसके अलावा, 2026 में कृषि यंत्रीकरण को लेकर जारी सरकारी जानकारी में आधुनिक मशीनों, प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन और किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने वाली व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.
इसलिए किसान अपने राज्य और जिले की नवीनतम सूचना देखें. योजना का नाम उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि हर समय आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं.
कृषि मशीन खरीदें अपनी जरूरत के अनुसार
सरकारी सहायता से मशीन खरीदने में मदद मिल सकती है, लेकिन किसान को खरीदारी का फैसला अपनी खेती की जरूरत देखकर करना चाहिए. मशीन कितने क्षेत्र में काम आएगी, साल में कितने दिन इस्तेमाल होगी और उसके रखरखाव पर कितना खर्च आएगा, इन बातों का आकलन करना उपयोगी रहता है.
SMAM Scheme के तहत पात्र किसानों को कृषि मशीनों की खरीद पर निर्धारित नियमों के अनुसार 40 या 50 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है. कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के लिए अलग परियोजना-आधारित प्रावधान हैं. लेकिन वास्तविक अनुदान, पात्रता और आवेदन की तारीख राज्य, मशीन और योजना की शर्तों पर निर्भर करती है. इसलिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल या जिला कृषि कार्यालय से जानकारी की पुष्टि जरूर करें.





