पिछले कई सालों से दुनिया-भर के मौसम में बहुत बदलाव हो रहा है (World Earth Day) दिनोंदिन जमीन तप रही है. पृथ्वी का तापमान आने वाले समय में यदि इस कदर बढ़ता रहा तो भविष्य में दुनिया-भर के लोगों के लिए ये डरावने संकेत हैं, क्योंकि हम खुद दोषी हैं और आए रोज पर्यावरण को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
यह बात हमें अच्छी तरह समझने होगी कि प्रकृति से हमें जो उपहार मिले हैं जिनमें जल, जंगल और जमीन प्रमुखता से आते हैं, को हमें प्राकृतिक रूप से सहेजना होगा वरना वह दिन दूर नहीं जब हमें इसके दुष्परिणाम भुगतने होंगे. न साफ पानी मिलेगा, न हवा और न ही शुद्ध खाना.
प्रकृति के संकेतों को समझना होगा
पिछले कुछ सालों न से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं. आएदिन मौसम का बढ़ता तापमान, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि के रूप में यह एक गंभीर चेतावनी मिल रही है. ग्लोबल वार्मिंग के चलते दुनिया-भर में मौसम का मिजाज किस कदर बदल रहा है. इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कहीं भयानक सूखा तो कहीं बेमौसम अत्यधिक वर्षा, कहीं जबरदस्त बर्फबारी तो कहीं कड़ाके की ठंड, कभी-कभार ठंड में गर्मी का अहसास तो कहीं तूफान और कहीं भयानक प्राकृतिक आपदाएं, ये सब प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने के नतीजे हैं, इसलिए हमें अपना और आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रकृति को बचाना होगा. तभी पृथ्वी सुरक्षित होगी और हमारा और अन्य जीव-जंतुओं का जीवन भी सुरक्षित होगा (World Earth Day)
जागरूकता है जरूरी
हालांकि पर्यावरण सरंक्षण के लिए अनेक संस्थाएं और स्कूलों आदि में भी समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है. हाल ही में पृथ्वी दिवस 2026 (World Earth Day) की पूर्व संध्या पर विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली एवं युवा विकास समिति, बस्ती के संयुक्त तत्त्वावधान में युवा चेतना पुस्तकालय में आर्ट एवं पेंटिंग प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों एवं युवाओं ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की.
उदय शंकर सिंह, विश्व युवक केंद्र का क्या है कहना
कार्यक्रम की शुरुआत में उदय शंकर सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बच्चों को संबोधित किया(World Earth Day) उन्होंने कहा कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है. उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे छोटे-छोटे प्रयासों जैसे पेड़ लगाना, जल संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग को कम करना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
इसी क्रम में आनंद कुमार, सीनियर औफिसर-डिजिटल इनिशिएटिव्स, विश्व युवक केंद्र ने World Earth Day पर अपने संबोधन में कहा कि आज के डिजिटल युग में छात्र-छात्राओं की भूमिका और भी महत्त्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर पर्यावरण जागरूकता फैलाने के लिए भी किया जाना चाहिए. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम अधिक से अधिक लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचा सकते हैं.
World Earth Day के अवसर पर अतिथि के रूप में राघवेंद्र सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा नवाचारी कृषक अवार्ड से सम्मानित कृषक राम मूर्ति मिश्र, बबिता गौतम, संजय गौतम एवं माधुरी ने अपने विचार व्यक्त किए. वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं.
ये हैं खास कारण
पृथ्वी के विनाश का सबसे बड़ा कारण कोयला, तेल के जलने से निकलने वाली गैसों ने धरती के तापमान को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है, जिसके कारण ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और तटीय शहरों के डूबने का खतरा दिनोंदिन बढ़ रहा है.World Earth Day
पिछले कुछ सालों में जीव-जंतुओं की हजारों प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं या विलुप्ति की कगार पर हैं और जब कीड़े-मकोड़े, पक्षी और जानवर लुप्त होते हैं, तो पर्यावरण पर संकट आता है. खाद्य पदार्थों की कमी होने के आसार होने लगते हैं और दुनिया में अकाल या भुखमरी के हालात बन सकते हैं.
आज के समय प्लास्टिक के उत्पादों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है. हर साल करोड़ों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंका जा रहा है. यह प्लास्टिक न केवल समुद्री जीवों को मार रहा है, बल्कि ‘माइक्रोप्लास्टिक’ के रूप में अब हमारे भोजन और रक्त में भी प्रवेश कर चुका है, जिससे दिनोंदिन बीमारियां बढ़ रही हैं.
धरती पर 97 फीसदी पानी खारा समुद्री है, केवल 3 फीसदी से भी कम पानी पीने योग्य है. मीठा पानी सीमित है.World Earth Day भूजल का अत्यधिक दोहन और वनों की कटाई के कारण उपजाऊ भूमि मरुस्थल में बदल रही है, जिसका असर भविष्य में युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि पीने के पानी के लिए होंगे. पानी की कमी का सीधा असर कृषि पर पड़ेगा, जिससे भुखमरी के हालात पैदा होंगे.
विनाशकारी हथियारों की होड़ इन दिनों आप ईरान अमेरिका युद्ध में देख ही रहे हैं. परमाणु हथियार और जैविक युद्ध की बढ़ती संभावना पृथ्वी को मिनटों में खत्म कर सकती है. पर्यावरण को जितना नुकसान सदियों में नहीं पहुंचा उतना नुकसान पलभर में हो सकता है.
छोटे कदमों से लाएं बदलाव
अभी भी समय है. पृथ्वी दिवस 2026 (World Earth Day) पर हम इन छोटे कदमों से बदलाव ला सकते हैं :
पर्यावरण को बचाएं, पेड़ जरूर लगाएं, पेड़ों को न काटें, न कटने दें.
प्लास्टिक की चीजों को इस्तेमाल बंद करें.
World Earth Day पर ऊर्जा और पानी की बचत करने का संकल्प लें वरना प्रकृति से जिस बड़े पैमाने पर खिलवाड़ हो रहा है, उसका खामियाजा पूरी दुनिया को चुकाना होगा.





